हिंसक वारदातों के बीच 'जनजीवन' प्रभावित

तेलंगाना बंद
Image caption तेलंगाना बंद के दौरान सोमवार को कई जगहों पर हिंसक वारदातें हुईं

छात्र संगठनों की ओर से बुलाए गए बंद के दौरान सोमवार को पूरे तेलंगाना क्षेत्र में जन-जीवन प्रभावित रहा और हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय कैंपस में हिंसक घटनाएं हुईं.

तेलंगाना छात्र संयुक्त संघर्ष समिति और उस्मानिया विश्वविद्यालय छात्र संघर्ष समिति ने रविवार को हैदराबाद में तेलंगाना मार्च के दौरान पुलिस की ज़्यादतियों और लोगों की गिरफ्तारी के विरुद्ध तेलंगाना बंद का आह्वान किया था.

बंद के कारण हैदराबाद सहित पूरे क्षेत्र में स्कूल और कॉलेज बंद रहे. उस्मानिया और काकतीय विश्वविद्यालयों की परीक्षाएं रद्द कर दी गईं.

हैदराबाद में बंद का मिलाजुला असर रहा लेकिन तेलंगाना के दूसरे जिलों में दुकानें और बाज़ार बंद रहे साथ ही बस-सेवा भी स्थगित रही.

हैदराबाद शहर के भीतर बसें चलीं लेकिन ज़िलों की ओर जानेवाली बसें नहीं चल सकीं.

उस्मानिया विश्वविद्यालय में उस समय हिंसा शुरू हुई थी, जब वहां छात्रों ने जुलूस निकालने की कोशिश की और पुलिस द्वारा उन्हें रोकने की कोशिश के दौरान दोनों के बीच हिंसक झड़प हुई.

इस झड़प के दौरान छात्रों ने पुलिस पर पत्थर फेंके और पुलिस ने छात्रों पर आंसू गैस के गोले छोड़े.

कैंपस में हिंसा

विश्वविद्यालय कैंपस में पिछले पांच दिनों से लगातार हिंसक घटनाएं हो रहीं हैं.

इसके अलावा तेलंगाना में कई जगहों पर मंत्रियों के घरों को घेरने की घटनाएं भी हुईं हैं. निज़ामाबाद में सिंचाई मंत्री सुदर्शन रेड्डी के घर का छात्रों ने घेराव कर छात्रों ने उनसे त्यागपत्र की मांग की.

इस बीच पुलिस ने रविवार को तेलंगाना मार्च के दौरान हुई हिंसा के सिलसिले में कई मामले दर्ज किए हैं और दोषियों को ढूंढने की कोशिश कर रही है.

हैदराबाद के पुलिस आयुक्त अनुराग शर्मा के अनुसार कल की हिंसा में कम से कम 35 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं और पुलिस की चार गाड़ियों को जलाया गया है.

इसके अलावा कई दूसरी गाड़ियों को भी नुकसान पहुंचाया गया है. उनके मुताबिक पुलिस ने काफी संयम से काम लिया है.

लेकिन दूसरी और तेलंगाना के समर्थन में आंदोलन चलाने वाली संगठनों और खुद कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने आरोप लगाया है कि पुलिस और सरकार द्वारा भड़काने पर ही हिंसक घटनाएं हुई हैं.

Image caption तेलंगाना समर्थक 2-3 अक्तुबर को अनशन करेंगे.

इनका आरोप था कि, ''पुलिस ने तेलंगाना मार्च के लिए जिलों से आने वाले लोगों को बड़े पैमाने पर गिरफ्तार किया और पूरे रस्ते बंद कर दिए हैं. सरकार ने 40 ट्रेनों को भी रद्द कर दिया ताकि ज्य़ादा लोग तेलंगाना मार्च में हिस्सा न ले सकें, जिसके विरोध में हिंसक घटनाएं हुईं.''

तेलंगाना संयुक्त संघर्ष समिति ने 2 और 3 अक्तूबर को अनशन करने की घोषणा की है.

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