उत्तर प्रदेश में भी गुटखे पर प्रतिबंध लगा

  • 3 अक्तूबर 2012
गुटखे पर प्रतिबंध
Image caption कई राज्यों में पहले ही गुटखे पर प्रतिबंध लग चुका है

उत्तर प्रदेश सरकार ने अब से छह महीने बाद यानी पहली अप्रैल 2013 से गुटखा उद्योग पर प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया है.

राज्य सरकार की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि संसद में पारित खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत ये कदम उठाया गया है.

इस कानून के अंतर्गत किसी भी खाद्य पदार्थ में तंबाकू शामिल करने पर रोक है. गुटखा को खाद्य सामग्री के रूप में बेंचा जाता है और ज्यादातर गुटखा उत्पादों में तंबाकू होता है.

देश के कई राज्यों ने पहले ही गुटखा पर प्रतिबंध लगा दिया है. पिछले दिनों इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को भी 14 दिनों के अंदर प्रतिबंध आदेश जारी करने का निर्देश दिया था, जिसकी मियाद दो अक्टूबर को खत्म हो गई.

'वैकल्पिक रोजगार तलाशें'

राज्य सरकार की विज्ञप्ति में इस बात पर जोर दिया गया है कि गुटखा उद्योग लंबे समय से चल रहा है और उसमे बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार हासिल है.

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का कहना है, “गुटखा उद्योग से जुड़े हुए लाखों कामगारों, श्रमिकों व उद्यमियों की रोजी रोटी को ध्यान में रखते हुए गुटखा उद्योग पर लगाए जाने वाले प्रतिबंध को 1 अप्रैल 2013 से प्रभावी किए जाने के निर्देश दिए है.”

मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि, “इस अवधि का सदुपयोग करते हुए गुटखा उद्योग से जुड़े हुए कामगारों, श्रमिकों व उद्यमी अन्य रोजगार और वैकल्पिक उद्योग तलाश लेंगे.”

Image caption भारत के हर हिस्से में गुटखा खाने वाले लोग मिल जाएंगे

कानपुर और उसके आसपास कन्नौज और मैनपुरी गुटखा उद्योग के गढ़ हैं.

अपनी अपनी दलीलें

इस तरह मुख्यमंत्री के बयान में गुटखा उद्योग से जुड़े लाखों लोगों के साथ सहानुभूति जताई गई है और प्रतिबंध लगाने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार पर डाल दी गई है.

उधर डॉक्टरों का कहना है कि गुटखा और तंबाकू की वजह से लोगों में मुंह का कैंसर बढ़ रहा है. कैंसर विशेषज्ञ डॉक्टर लंबे अरसे से गुटखा पर प्रतिबंध का सुझाव देते रहे हैं.

दूसरी ओर गुटखा लॉबी का कहना है कि कैंसर और बीमारियों के लिए गुटखा नहीं बल्कि सिगरेट जिम्मेदार है.

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