हज़ारों ग़रीबों ने किया दिल्ली की तरफ़ कूच

 बुधवार, 3 अक्तूबर, 2012 को 16:17 IST तक के समाचार
 फेसबुक से साभार

घर बनाने की खातिर एक ज़मीन के छोटे से टुकड़े की मांग लिए हज़ारों हज़ार गरीब आदवासी, दलित भूमिहीन मजदूर दिल्ली की तरफ़ बढ़ रहे हैं.

मध्य प्रदेश के शहर ग्वालियर में देश के अलग अलग हिस्सों से जमा हुए कम से कम 50 हज़ार लोग दिल्ली के तरफ़ रवाना हो गए हैं.

एक सामाजिक संगठन एकता परिषद के झंडे तले जमा हुए यह लोग भारत के अलग अलग हिस्सों में मौजूद गाँवो से आए हैं.

इन लोगों को दिल्ली आने से रोकने के लिए किए केंद्र सरकार अब तक किए गए सभी प्रयास विफल हो गए हैं.

विफल सरकार

मंगलवार को केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश और केंद्रीय वाणिज्य राज्यमंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ग्वालियर पहुँच कर जमा लोगों को यह समझाने की कोशिश की थी कि सरकार उनके लिए कानून बना रही है और उनकी समस्याओं को हल करने की पूरी कोशिश कर रही है.

लेकिन किसी ठोस आश्वासन के अभाव में वो सफल नहीं हो सके.

अपनी इस यात्रा के ज़रिए एकता परिषद केंद्र सरकार पर यह दबाव डालने की कोशिश कर रही है कि वो किसी तरह से गरीब लोगों को ज़मीन के अधिकार दिलाने के लिए कोई संवैधानिक रास्ता निकाले.

एकता परिषद का कहना है कि बिना ज़मीन के अधिकार के लोगों को गरीबी के चंगुल से नहीं बचाया जा सकता.

एकता परिषद के नेता पीवी राजगोपाल का कहना है कि भारत सरकार उन्हें छोटी रियायतें दे कर उनके आंदोलन को कमज़ोर करना चाहती है.

हालाँकि केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश का कहना है कि उन्होंने 11 अक्तूबर को आंदोलनकारियों को दिल्ली बुलाया है ताकि कोई रास्ता निकाला जा सके.

जारी मार्च

रमेश का कहना है कि अगले छह महीने में वो राज्य सरकारों से बात करेंगे ताकि आंदोलनकारियों की मांगों को सुलझाने के लिए कि बीच का रास्ता निकाला जा सके.

जयराम रमेश का कहना है, "सरकार आंदोलनकारियों की ज़मीन विवादों को सुलझाने के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों को बनाने की मांग को मान मान गई है और इसके लिए जल्द ही राज्य सरकारों से बात की जाएगी."

पीवी राजगोपाल का दावा है कि अभी दिल्ली की तरफ़ कूच करने वाले लोगों की संख्या 50,000 है लेकिन दिल्ली पहुँचते-पहुँचते यह संख्या एक लाख तक हो जाएगी."

राजगोपाल का दावा है कि पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ एक मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री ने आवास के अधिकार को मूलभूत अधिकारों में शामिल करने की बात पर सहमति जताई थी.

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