राहुल, कश्मीर और विरोध प्रदर्शन

 शनिवार, 6 अक्तूबर, 2012 को 02:21 IST तक के समाचार
राहुल गाँधी

कश्मीर यात्रा में राहुल गाँधी के साथ रतन टाटा, कुमारमंगलम बिरला, दीपक पारिख, राजीव बजाज जैसे उद्दोगपति शामिल थे

कश्मीर पहुँचे कांग्रेस महासचिव राहुल गाँधी ने शुक्रवार को भारतीय उद्दोग जगत और नाराज नौजवानों के बीच तालमेल बढ़ाने की कोशिश की.

सुरक्षाबलों से घिरे कश्मीर विश्वविद्यालय पहुँचे राहुल गाँधी ने कुछ चुने हुए छात्रों से बात की. राहुल ने वादा किया कि विश्वविद्यालय में जल्द ही एक ऐसे केंद्र की स्थापना की जाएगी जहाँ नई खोजों पर काम होगा.

उन्होंने कहा कि ऐसे कदमों से नौजवान कश्मीरियों में भारत के प्रति आस्था बढ़ाने में मदद मिलेगी.

इस दौरान कई छात्रों ने राहुल गाँधी की यात्रा के खिलाफ प्रदर्शन किए. चारों ओर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे. प्रदर्शनकारियों ने राहुल के स्वागत में लगाए गए कई बैनरों को जला दिया.

एक छात्र नेता शफात सिद्दीकी ने कहा, “ये एक सैन्य किला है. पुस्तकालय के दरवाजे पर भी पुलिस थी.” सिद्दीकी उन लोगों में से थे जिन्होंने शुरुआत में कंपनी प्रमुखों के कश्मीर आने का स्वागत किया था.

कश्मीर यात्रा में राहुल गाँधी के साथ रतन टाटा, कुमारमंगलम बिरला, दीपक पारिख, अशोक रेड्डी, राजीव बजाज जैसे उद्दोगपति शामिल थे.

इन उद्योगपतियों ने स्वीकार किया कि कश्मीर में प्रतिभावान छात्रों की कोई कमी नहीं है और वो जल्द ही घाटी के विश्वविद्यालयों से भर्ती शुरू करेंगे.

ज्यादातर छात्रों और अनुसंधानकर्ताओं ने राहुल गाँधी की यात्रा का बहिष्कार किया. उनका आरोप था कि विश्वविद्यालय अधिकारियों के चुने हुए लोग राहुल गाँधी की सभा में शामिल हुए थे.

शफात ने राहुल गाँधी की घोषणाओं का स्वागत किया लेकिन अधिकारियों की कार्रवाइयों का विरोध भी किया.

उन्होंने कहा कि “अधिकारी कैंपस में बातचीत की संस्कृति को बढ़ाने पर काम नहीं करते हैं.”

शफात ने बीबीसी को बताया, “विश्वविद्यालय पीढियों के बीच बातचीत का मंच होता है. हमें राहुल गाँधी के अलावा हर तरह के लोगों का स्वागत करने की इजाजत होनी चाहिए, चाहे वो अलगाववादी ही क्यों ना हो.”

राजनीति

भावुक राहुल

"राहुल जी कश्मीर को लेकर भावुक हैं. वो कश्मीर के लिए कुछ करना चाहते हैं. हमारे युवाओं को उनके साथ हाथ मिलाना चाहिए"

युवा व्यापारी इरफान

विश्वविद्यालय के कैंपस में छात्र राजनीति पर प्रतिबंध के कारण यहाँ के सबसे पुराने छात्र संगठन कश्मीर युनिवर्सिटी स्टुडेंट्स यूनियन (कूसू) के कार्यकर्ता छिपकर एक दूसरे से मिलते हैं.

कूसू नेता फरहात जाफर ने कहा, “अगर यूनियन पर राजनीतिक होने के कारण प्रतिबंध है तो फिर राहुल गाँधी यहाँ क्या कर रहे थे? कांग्रेस छात्र संगठन के पोस्टर कैंपस की दीवारों पर लगे हुए थे. क्या ये राजनीति नहीं है?”

फरहात उन छात्र नेताओं में से एक थे जिन्होंने राहुल गाँधी की यात्रा के विरोध में आयोजित यात्रा में हिस्सा लिया.

विश्वविद्यालय में छात्रों के एक बड़े तबके का मानना है कि कमजोर प्रशासन और अधिकारियों के पक्षपाती रवैये के कारण कई छात्र राहुल गाँधी की सभा में हिस्सा नहीं ले पाए.

छात्र कार्यकर्ता वहीदुर रहमान ने कहा, “पहले अधिकारियों ने हर विभाग के पाँच छात्रों को चुना. बाद में नौकरशाहों और कांग्रेस राजनीतिज्ञों के बेटे-बेटियों को सत्र में आमंत्रित किया गया.”

कुछ साल पहले राहुल गाँधी ने कश्मीर में पार्टी के छात्र संगठन में भर्ती के लिए अभियान चलाया था और करीब 1,000 लोग संगठन में शामिल हुए थे.

संगठन में शामिल होने वाले युवा व्यापारी इरफान ने कहा, “राहुल जी कश्मीर को लेकर भावुक हैं. वो कश्मीर के लिए कुछ करना चाहते हैं. हमारे युवाओं को उनके साथ हाथ मिलाना चाहिए.”

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