ऐसा है तो केजरीवाल पर केस करें: अन्ना

  • 6 अक्तूबर 2012
अन्ना हज़ारे (फ़ाइल)
Image caption हाल के दिनों में अन्ना हज़ारे की भ्रष्टाचार विरोधी रैलियां बहुत ही सफल रहीं.

सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे ने कहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा की संपत्ति के मामले में न्यायिक जांच होनी चाहिए.

रालेगण सिद्धि में पत्रकारों से बातचीत करते हुए अन्ना हज़ारे ने कहा कि अगर कांग्रेस पार्टी को लगता है कि अरविंद केजरीवाल ने राबर्ट वाड्रा को लेकर जो आरोप लगाए हैं वो ग़लत है तो फिर वो न्यायिक जांच से क्यों घबरा रही है?

उन्होंने कहा, "कई कांग्रेस नेता कह रहे हैं कि ये आरोप बेबुनियाद हैं और राजनीति और चुनाव से प्रेरित हैं. हम कह रहे हैं कि अगर ये आरोप ग़लत हैं तो वो न्यायिक जांच की घोषणा क्यों नहीं कर रहे हैं. और ये इलज़ाम अगर ग़लत हैं तो अरविंद केजरीवाल के ख़िलाफ़ मानहानि का मुक़दमा दर्ज किया जाए. सच और झूठ सामने आ जाएगा."

आरोप

अरविंद केजरीवाल, प्रशांत भूषण और उनके पिता शांति भूषण ने शुक्रवार को दिल्ली में हुई एक पत्रकारवार्ता में कुछ दस्तावेज़ पेश करते हुए आरोप लगाया कि उत्तर भारत के एक बड़े रियल एस्टेट डेवलपर डीएलएफ़ समूह ने गलत तरीकों से रॉबर्ट वाड्रा को 300 करोड़ रुपयों की संपत्तियाँ कौड़ियों के दामों में दे दीं.

इसके बाद कांग्रेस ने पूरा ज़ोर लगाकर इन आरोपों को ख़ारिज किया है. एक नज़र इस पूरे विवाद में अब तक कौन क्या कह चुका है-

अरविंद केजरीवाल

पूरी बात यह है कि डीएलएफ़ वाले वाड्रा को 300 करोड़ रुपए देना चाहते थे. डीएलएफ़ ने वो 300 करोड़ रुपए छह कंपनियों में कुछ लेन-देन कर के दे दिया. सभी लाभ पाने वाली कंपनियों में रॉबर्ट वाड्रा और उनकी माँ निदेशक हैं. एक समय तक इन कंपनियों में प्रियंका गाँधी भी निदेशक थीं लेकिन उन्होंने बाद में इन कंपनियों से हाथ झाड़ लिया.

प्रशांत भूषण, वकील

डीएलएफ़ इनको पैसा दे-देकर अपनी ही सैकड़ों करोड़ की संपत्तियां कौड़ियों में दे रहा है. रॉबर्ट वाड्रा की कंपनियों में इनकी मूल पूँजी केवल 50 लाख रुपए लगी है. सवाल यह है कि कोई कंपनी किसी एक आदमी को इस तरह के लाभ क्यों दे रही है? डीएलएफ़ ने रॉबर्ट वाड्रा को बिना ब्याज के इतना क़र्ज़ क्यों दिया और इतनी संपत्तियां वाड्रा को अपने ही पैसे से कौड़ियों के दाम पर क्यों दीं? हरियाणा सरकार ने वजीराबाद में डीएलएफ़ को किसानों से अधिगृहीत कर के ज़मीन डीएलएफ़ को सौंप दी है. इस ज़मीन को सार्वजनिक इस्तेमाल के लिए अधिगृहीत किया गया था.

सलमान ख़ुर्शीद, क़ानून मंत्री- भारत सरकार

Image caption रॉबर्ट वाड्रा पर लगे इस तरह के आरोपों के बाद कांग्रेस ने पूरा दम लगाकर उनका बचाव किया है

ये लोग एक पैदाइश से ही मरी हुई पार्टी के घोषणा पत्र के लिए दिवालिया विचार वाले लोग हैं. इसी तरह से वे अपनी पार्टी का इस तरह का घोषणा पत्र तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं. जाँच की माँग करने के लिए उन्हें पुख़्ता चीज़ों के साथ सामने आना पड़ेगा. किसी भी व्यक्ति का संदेह क़ानून के नियमों का आधार नहीं बन सकता. अब वो वक़्त आ गया है जब इन लोगों को बता दिया जाए कि उन्हें कहाँ ये सब बंद कर देना चाहिए.

डीएलएफ़ ग्रुप

डीएलएफ़ ग्रुप का रॉबर्ट वाड्रा के साथ व्यावसायिक संबंध उनके निजी उद्यमी के रूप में हैं और ये पूरी तरह से पारदर्शी रूप में है. डीएलएफ़ की मंशा उनके नाम या उनसे जुड़ाव का किसी भी तरह इस्तेमाल करने की नहीं है और व्यावसायिक संबंध उच्च मानकों के और पूरी तरह पारदर्शी रखे गए हैं.

रवि शंकर प्रसाद, भाजपा नेता

काफ़ी अहम सवाल उठे हैं. ये लाभ पहुँचाने का सीधा सा मामला दिखता है. इस बात की भी संभावना दिखती है कि राज्य सरकारों ने डीएलएफ़ को फ़ायदा पहुँचाया हो.

मनीष तिवारी- कांग्रेस प्रवक्ता

कांग्रेस नेतृत्त्व को 1970-1980 के दशक में बदनाम करने की जिन ताक़तों ने कोशिश की वे नए अवतार में फिर से सामने आ गई हैं. अरविंद केजरीवाल का संवाददाता सम्मेलन न सिर्फ़ एक राजनीतिक षड्यंत्र है बल्कि बेहद घटिया राजनीतिक छल है.

भूपिंदर सिंह हूडा- मुख्यमंत्री, हरियाणा

हमने किसी के साथ कोई पक्षपात नहीं किया है. हमने किसी को भी एक इंच ज़मीन तक आवंटित नहीं की है. हमने पारदर्शी तरीक़े से अंतरराष्ट्रीय बोली के ज़रिए ज़मीन उस व्यक्ति को दी जसने सबसे बड़ी बोली लगाई थी.

अंबिका सोनी, सूचना एवं प्रसारण मंत्री

केजरीवाल ने एक राजनीतिक दल बनाया है और वह दिल्ली से चुनाव लड़ना चाहते हैं. अपनी छवि सुधारने के लिए वह बिना किसी सबूत के आरोप लगा रहे हैं और आप (मीडिया) इस तरह के आरोपों को दिखाकर उनकी मदद कर रहे हैं. सार्वजनिक जीवन में हमें बेहद सावधान होना पड़ता है. हम बिना किसी सबूत के आरोप नहीं लगा सकते. अगर आरोप लगा रही आपकी उंगली सामने वाले की ओर है तो ध्यान रखिए कि बाक़ी तीन आपके ख़ुद की ओर इशारा कर रही हैं.

राजीव शुक्ला, संसदीय कार्य राज्य मंत्री

इस तरह का कोई सबूत नहीं है जिससे पता चले कि डीएलएफ़ को कोई फ़ायदा पहुँचाया गया. इसमें परस्पर लाभ की कोई बात नहीं है.

राशिद अल्वी, कांग्रेस प्रवक्ता

ये सिर्फ़ इत्तेफ़ाक की बात नहीं है कि केजरीवाल की ओर से ये आधारहीन आरोप तभी लगाए गए हैं जब कांग्रेस ने भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी का पर्दाफ़ाश कर दिया है.

पीके त्रिपाठी, मुख्य सचिव- दिल्ली सरकार

दिल्ली सरकार निजी संगठनों को ज़मीन आवंटन नहीं करती. ये आरोप कि दिल्ली सरकार ने डीएलएफ़ को ज़मीन आवंटित की तथ्यात्मक रूप से ग़लत है. ये आरोप दिल्ली सरकार की भी छवि ख़राब करने की कोशिश है और इसमें कोई दम नहीं है.

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