किंगफिशर एयरलाइंस का लाइसेंस स्थगित

 शनिवार, 20 अक्तूबर, 2012 को 21:35 IST तक के समाचार
किंगफिशर

किंगफिशर पर लगभग 6,500 करोड़ का घाटा है और कंपनी मुश्किलों से घिरी है

किंगफिशर एयरलाइंस का लाइसेंस अगले आदेश तक निलंबित कर दिया गया है.

अधिकारियों के हवाले से मिल रही ख़बरों के अनुसार, “किंगफिशर के लाइसेंस को अगले आदेश तक के लिए निलंबित कर दिया गया है.”

उधर किंगफिशर ने अपने जवाब में कहा कि डीजीसीए के कदम का ये मतलब नहीं है कि लाइसेंस को रद्द कर दिया गया है बल्कि लाइसेंस को अस्थायी तौर पर स्थगित किया गया है.

किंगफिशर ने अपने वक्तव्य में कहा, “ये स्थगन तब तक लागू है जब तक हम डीजीसीए को ऐसी योजना नहीं पेश करते जिससे वो संतुष्ट हों कि ये योजना पक्की और भरोसे के लायक है.”

किंगफिशर ने कहा कि जैसे ही कर्मचारियों के साथ समस्या को सुलझा लिया जाता है, वो डीजीसीए को अपनी योजना पेश करेंगे और उसके बाद अपनी उड़ाने दोबारा शुरू कर देंगे.

कंपनी ने कहा कि डीजीसीए के आदेश से पहले ही उसने छह नवंबर तक बुकिंग बंद कर रखी है.

कंपनी ने बताया, “हम तुरंत अपनी सभी फॉरवर्ड बुकिंग को उस वक्त तक बंद कर रहे हैं जब तक हम दोबारा उड़ाने शुरू नहीं कर देते. हमारी कोशिश है कि हम जल्दी ही दोबारा उड़ाने शुरू करें और हम आपको भरोसा दिलाते हैं कि हम इस लक्ष्य की ओर काम कर रहे हैं.”

गौरतलब है कि लाइसेंस निलंबन का अर्थ है कि कंपनी अपने नेटवर्क और ट्रैवल एजेंटों के माध्यम से कोई बुकिंग नहीं कर पाएगी.

रिपोर्टों के मुताबिक विजय माल्या की कंपनी को 8,000 करोड़ रुपए के घाटे का सामना है. साथ ही कंपनी पर 7,500 करोड़ से ज्यादा का कर्ज है जिसके भुगतान के लिए जनवरी से कंपनी ने कोई कदम नहीं उठाए हैं.

एअरलाइंस के पास अभी 10 विमान हैं जबकि एक साल पहले उसके पास 66 विमान थे.

किंगफिशर एयरलाइंस में क्लिक करें कर्मचारियों को तनख्वाहें नहीं मिली हैं और वो हड़ताल पर हैं, कंपनी के शेयर गिरे हैं और कंपनी पर कर्ज का बोझ बढ़ा है.

विमानन कंपनियों की नियामक संस्था डीजीसीए के मुताबिक किंगफिशर एअरलाइंस अपनी आर्थिक परेशानियों का कोई हल सामने लेकर नहीं आ पाई, और ना ही कर्मचारियों को वेतन नहीं दिए जाने पर कोई समाधान सामने आया है.

एअरलाइंस बंद

विजय माल्या

एअरलाइंस की हालत के लिए मैनेजमेंट के गलत फैसलों को जिम्मेदार माना जाता है

एक अक्टूबर से एअरलाइंस बंद पड़ी है, हालाँकि कंपनी ने डीजीसीए के नोटिस पर जवाब में थोड़ा और समय मांगा था लेकिन समय बीत जाने के बावजूद कंपनी कोई खास विकल्प पेश नहीं कर सकी.

डीजीसीए ने पाँच अक्टूबर को एअरलाइंस को कारण-बताओ नोटिस जारी किया था, और पूछा था कि एअरलाइंस की उड़ानों पर क्यों ना रोक लगा दी जाए. डीजीसीए ने किंगफिशर को जवाब के लिए 15 दिनों का वक्त दिया था.

क्लिक करें किंगफ़िशर एयरलाइंस 2005 में शुरू हुई थी मगर तब से अब तक उसने कभी मुनाफ़ा दर्ज नहीं किया.

लंबे समय से किंगफ़िशर की माली हालत काफ़ी ख़राब रही है.

किंगफिशर ने हमेशा कहा कि वो एअऱलाइंस को जारी रखने का इच्छुक है लेकिन आलोचकों ने किंगफिशर के दावों को गलत बताया है.

किंगफिशर की हालत के लिए मैनेजमेंट के गलत फैसलों को जिम्मेदार ठहराया गया.

आलोचकों के अनुसार शुरुआत में कंपनी ने जरूरत से ज्यादा विमान खरीदे, बाद में बेहद महंगे दाम पर कैप्टन गोपीनाथ की एअर डेक्कन को खरीदा.

दरअसल विदेशों में उड़ान भरने के लिए किसी भी एअरलाइंस कंपनी के लिए पाँच वर्ष का अनुभव जरूरी था. ये अनुभव एअर डेक्कन के पास था जिसके कारण किंगफिशर ने बेहद महंगे में ये सौदा किया.

विशेषज्ञों के मुताबिक किंगफिशर नरेश गोयल की जेट एअरवेज से बराबरी करना चाहता था जिसने विदेशों में उड़ानें शुरू कर दी थीं.

एअर डेक्कन को बाद में किंगफिशर रेड का नाम दे दिया गया.

दुनिया भर में फैली आर्थिक मंदी को भी किंगफिशर की हालत के लिए जिम्मेदार माना जाता है.

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