सिर्फ़ ईरान की न्यूज़ एजेंसियों से रिश्ते थे: काज़मी

काजमी
Image caption काजमी पर आरोप है कि दिल्ली में इसराइली दूतावास की कार पर हुए हमले में उनकी भूमिका थी

फरवरी में इसराइली दूतावास की एक कार पर हुए हमले में कथित तौर पर शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार हुए पत्रकार सैयद मोहम्मद अहमद काज़मी को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत पर रिहा कर दिया है. उन्होंने करीब सात महीने जेल में बिताए.

काजमी ईरान की समाचार एजेंसियों के लिए सालों से काम करते रहे हैं. वर्ष 1983 से 1990 तक वो ईरान की एजेंसी इरना के दिल्ली ब्यूरो के साथ जुड़े रहे. इसके साथ-साथ ईरान के राष्ट्रीय टेलीविजन के लिए भी उन्होंने काम किया.

उसके बाद 1998 से ईरान की हिंदी और उर्दू सर्विस के लिए भी उन्होंने रिपोर्टिंग की. उन्होंने दूरदर्शन के लिए इराक पर अमरीकी हमले को भी कवर किया. वर्ष 1993 से 2012 तक वो दूरदर्शन से जुड़े रहे.

इसराइली दूतावास की कार पर हमले का मामला अभी अदालत में जारी है और अगली सुनवाई 30 अक्तूबर को होनी है.

बीबीसी संवाददाता विनीत खरे ने सैयद मोहम्मद काजमी से बात की, हालाँकि इस बातचीत में उन्होंने केस के ब्यौरे पर बात करने से इनकार किया.

जब आप पीछे मुड़कर देखते हैं तो क्या आपको समझ में आता है कि आखिर क्या हुआ और क्यों हुआ? क्या कोई भूलचूक हुई?

मैं इसे भूलचूक नहीं कहता. मैं ये कहूँगा कि मैने जिन विषयों पर काम किया है, जिस तरह से मामले को देखा है, उसे बिना झिझक के साथ कहा है और उस पर लिखा भी है. शायद ये बात कुछ लोगों को पसंद नहीं है.

आपके ईरान दौरों को लेकर बहुत बातें कहीं गई है. आप इतनी बार ईरान क्यों जाते थे?

जितना भी मेरा ईरान दौरा हुआ है, उनमें से करीब आधा इराक की लड़ाई के दौरान हुआ है. जब सद्दाम हुसैन के जमाने में इराक के लिए सीधी उड़ाने नहीं होती थीं, तब भी मैं ईरान के रास्ते इराक गया.

मैं शिया मुसलमान हूँ. मैं अपने बच्चों और पत्नी के साथ भी ईरान के धार्मिक स्थानों पर कई बार गया. वर्ष 2010 और 2011 में इमाम खुमैनी की पुण्यतिथि के कार्यक्रमों में पत्रकारों के साथ ईरान गया. इन कारणों से ईरान जाना आम बात है.

आप ईरान कितनी बार गए हैं?

1990 और 2012 के बीच मैं करीब 15-17 बार ईरान गया.

ये कहा गया कि ईरान की सरकारी प्रतिष्ठानों से आपके अच्छे रिश्ते थे?

सरकारी प्रतिष्ठानों से अच्छे रिश्तों वाली तो कोई बात नहीं थी. जब आदमी काम करता है तो उसकी मुलाकात अलग-अलग लोगों से होती है. डिप्लोमैटिक सर्कल्स में भी मुलाकातें होती हैं लेकिन उसके अलावा चीज़ों को ज्यादा समझ लिया गया.

ईरान की गुप्तचर एजेंसियों से भी आपके रिश्तों की बातें कही गई हैं.

ईरान की न्यूज एजेंसियों के अलावा मेरा रिश्ता किसी दूसरी एजेंसियों से नहीं रहा है.

पिछले सात महीने आपके परिवार पर कैसे गुजरे हैं?

मेरे परिवार के लोगों के लिए ये बहुत मुश्किल समय था. मैने उन्हें बेसहारा हालत में देखा. आर्थिक रूप से भी उन्हें परेशानी हुई. ये उनके लिए बहुत मुश्किल समय था. जेल में अनिश्चितता की जिंदगी गुजारना बहुत मुश्किल काम है

मीडिया के व्यवहार पर आपकी टिप्पणी.

मीडिया के एक हिस्से ने वही कहा जो उन्हें पुलिस ने बताया. क्या ये उनकी व्यावसायिक मजबूरी थी, ये तो वही लोग बता पाएँगे.

इसराइल को लेकर आपके विचारों को लेकर काफी बातें कहीं गई हैं. इसराइल पर आपकी क्या सोच है?

मुझे इस विवरण में अभी नहीं जाना है. मैं भी इस मुद्दे को उसी तरह देखता हूँ जिस तरह एक संतुलित दिमाग वाला व्यक्ति इसे देखता है.

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल का आपके साथ कैसा व्यवहार रहा?

मेरी नजर में मेरी गिरफ्तारी से ही गलत व्यवहार की शुरुआत हुई. मैं ये तो नहीं कहूँगा कि मुझे शारीरिक यातनाएँ दी गईं, लेकिन मानसिक रूप से मुझे काफी परेशान किया गया लेकिन मैं उसके विवरण में नहीं जाऊँ तो बेहतर है.

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