बाल ठाकरे के बिना शिवसेना के मायने

बाल ठाकरे
Image caption पहली बार ऐसा हुआ जब बाल ठाकरे ने मुंबई में दशहरा रैली को संबोधित नहीं किया

शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे दशहरे के मौके पर मुंबई में पार्टी की सालाना रैली में शामिल नहीं हुए.

ये एक ऐसी रैली है, जो पार्टी के रूप में शिवसेना की प्रगति से जुड़ी हुई है. वर्षों से चली आ रही इन रैलियों में अपने ख़ास अंदाज़ के भाषण से बाल ठाकरे ने धीरे-धीरे अपना समर्थन का आधार पुख्ता किया था.

लेकिन अब बाल ठाकरे बीमार हैं. थक गए हैं. अब उनमें वो पहले जैसी ऊर्जा नहीं. इस साल वे इस रैली में नहीं आए. उन्होंने एक रिकॉर्डेड संदेश के जरिए कांग्रेस पार्टी और गांधी परिवार के खिलाफ अपने बेटे उद्धव और पोते आदित्य के लिए समर्थन जरूर मांगा.

बाल ठाकरे ने अपने अंदाज़ में कांग्रेस पर निशाना साधना नहीं छोड़ा. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर हमला बोलते हुए ठाकरे ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका-रॉबर्ट वाड्रा और उनके राजनीतिक सचिव अहमद पटेल को 'पांच लोगों का गिरोह' बताया और कहा कि इसे 'तबाह' किया जाना चाहिए.

ठाकरे ने कहा, ''पंच-कड़ी को नष्ट किया जाना चाहिए और देश से बाहर निकाल फेंकना चाहिए.''

उन्होंने ज्यादा विस्तार में ना जाते हुए कहा कि ये देश 'धोखेबाज़ों का देश' बन गया है.

'मेरा दिल आपके पास है'

बेटे उद्धव और पोते आदित्य के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं से समर्थन मांगते हुए 86 वर्षीय बाल ठाकरे ने कहा, ''लोगों को शिवसेना के प्रति अपनी वफादारी अक्षुण्ण बनाए रखना चाहिए. आपने मेरा ख्याल रखा, अब उद्धव और आदित्य का ख्याल रखिएगा. उन्हें आप पर थोपा नहीं गया है. शिवसेना, गांधी परिवार की तरह नहीं है.''

बाल ठाकरे के इस रिकॉर्डेड संदेश को दादर स्थित शिवाजी पार्क में दिखाया गया जहां वो गुजरे सालों में दशहरे के मौके पर अपने समर्थकों को संबोधित करते रहे हैं.

बाल ठाकरे ने कहा कि इस बार उन्होंने दशहरे के मौके पर अपने समर्थकों को सीधे संबोधित इसलिये नहीं किया क्योंकि उनकी तबीयत ठीक नहीं है.

ठाकरे ने कहा, ''मैं चल भी नहीं सकता हूं. बोलते समय मेरी सांस फूल जाती है. मेरी बिगड़ती तबीयत के बावजूद मेरा दिल आपके साथ हैं, मैंने अपना दिल किसी को नहीं दिया, वो आपके पास ही है.''

ठाकरे ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि वो अपना वोट किसी 'बेचे' नहीं. उन्होंने कहा, ''कुछ बेशर्म लोग हैं जो अपना वोट बेच देते हैं. लोगों को पैसे के लिए अपना वोट नहीं बेचना चाहिए.''

ठाकरे ने अपने पुराने दोस्त और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के मुखिया शरद पवार को भी कोसा जिन्होंने कहा था कि मुंबई बहुभाषी शहर है. उन्होंने जोर देकर कहा, ''शिवसेना ने मराठी हितों की तिलांजलि नहीं दी है. ये हमारी बुनियाद है.''

ठाकरे के बयान के मायने

मुंबई स्थित वरिष्ठ पत्रकार अनुराग चतुर्वेदी का कहना है कि शिवसेना प्रमुख बाला साहब ठाकरे के दशहरे के मौके पर सालाना भाषण का उनके समर्थक सालभर बेसब्री से इंतजार करते हैं और उनके ना आने से एक बात पुख्ता हो गई है कि बाल ठाकरे और शिवसेना का साथ अब थोड़े ही दिनों का है.

वे कहते हैं, ''लगता है कि बाल ठाकरे ने अपने कैडर को ये संकेत दिया है कि ये उनकी चलाचली की बेला है. मेरी उपस्थिति, मेरा निर्देशन अब पार्टी को नहीं मिलेगा. पार्टी में इससे सन्नाटा छा गया है.''

वे कहते हैं, ''कार्यकर्ताओं को लग रहा है कि नेतृत्व अब ढीला पड़ गया है. उद्धव पर ज्यादा जिम्मेदारी आ गई है लेकिन पार्टी कार्यकर्ता निराश हैं. पार्टी अभी कुछ दिनों तक दिशाहीन रहेगी.''

बेटे उद्धव और पोते आदित्य ठाकरे के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं से समर्थन मांगे जाने पर उनका कहना है कि बाल ठाकरे ने इस तरह से विदाई का, शोक का गीत पूरा किया है कि मेरे अब कुछ ही दिन रह गये हैं.

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