नीतीश की अधिकार रैली में छाया विशेष दर्जे का मुद्दा

 रविवार, 4 नवंबर, 2012 को 15:09 IST तक के समाचार
अधिकार यात्रा के बाद नीतीश की अधिकार रैली

पटना में हर जगह रैली से जुड़े बड़े बड़े होर्डिंग लगे हैं

अपने जन समर्थन का लोहा मनवाने और बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना में अधिकार रैली को संबोधित किया.

इस मौके पर नीतीश कुमार ने कहा, ''मैंने प्रधानमंत्री से कई बार खुद इस मसले पर बात की है लेकिन उनके पास बिहार का मसला सुनने की फुर्सत ही नही हैं.''

उन्होंने कहा कि आज़ादी के बाद पहली बार ऐसा हुआ है बिहार के लोग जाति या वर्ग के मु्द्दे पर नहीं बल्कि विकास के मुद्दे पर एकजुट हुए हैं.

जनता दल यूनाइटेड (जदयू) की इस रैली का मकसद बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग को पुरज़ोर तरीके से उठाना है.

“अधिकार रैली” में शामिल होने के लिए बड़ी तादाद में जदयू समर्थक पटना पहुँचे और पार्टी की तरफ से किराए पर ली गई नौ विशेष रेलगाड़ियों और सैकड़ों बसों के ज़रिए लोगों को रैली में लाने और वापस भेजने की मुफ्त सुविधा उपलब्ध कराई गई हैं.

बड़े-बड़े होर्डिंग, बैनर और पोस्टर से पटना शहर के तमाम प्रमुख हिस्सों को इस क़दर पाट दिया गया है, जैसे इस अवैध अतिक्रमण की खुली छूट हो.

"मैंने प्रधानमंत्री से कई बार खुद इस मसले पर बात की है लेकिन उके पाकस बिहार की बात सुनने और उसका मसला समझने की फुर्सत ही नही हैं."

नीतीश कुमार, मुख्यमंत्री (बिहार)

रैली में आने वालों के मनोरंजन के लिए जदयू के विधायकों और इस दल से जुड़े मंत्रियों के सरकारी आवासों पर नाच-गाने के साथ मुफ्त भोजन की व्यवस्था है.

रैली बड़ी या विवाद बड़ा ?

सबसे दिलचस्प बात ये है कि इस रैली से जुड़े कुछ बड़े विवादों की चर्चा में “विशेष राज्य” वाली बात कहीं खो गई सी लगती है.

हत्या के एक मामले में जेल की सज़ा भुगत रहे एक पूर्व जदयू विधायक के खिलाफ एक निजी शिक्षा संस्थान ने दो करोड़ रुपए “रंगदारी” मांगने का मामला दर्ज कराया.

आरोप था कि जेल से मोबाइल फोन पर उस नेता ने कहा कि “अधिकार रैली” के लिए दो करोड़ रुपए दो, नहीं तो मरने को तैयार रहो.

पुलिस ने सरसरी तौर पर छानबीन के बाद उस नेता पर लगे आरोप को कुछ हद तक सही पाया और आगे जांच की बात कही.

इसी नेता ने कोर्ट में पेशी के लिए जाते समय “अधिकार रैली” के पर्चे बांटकर एक और विवाद पैदा कर दिया.

उधर पटना में इस रैली के प्रचार के लिए होर्डिंग्स लगाने वालों में जदयू के विवादस्पद या आपराधिक छवि वाले बाहुबली विधायकों की प्रमुखता भी चर्चा में है.

बेपरवाह नीतीश

बिहार में नीतीश सरकार से लोगों की नाराजगी

कई वर्गों में नीतीश सरकार को लेकर गुस्सा बढ़ रहा है

यहाँ विपक्ष के तमाम नेता आरोप लगा रहे हैं कि “विशेष राज्य” के मुद्दे पर रैली का आयोजन नीतीश कुमार का राजनीतिक स्टंट है.

उनके मुताबिक इस रैली के ज़रिए करोड़ों रुपए की वसूली और चुनावी प्रचार ही इसका असली मकसद है. लेकिन नीतीश कुमार ऐसे आरोपों से बेपरवाह दिखते हैं.

उनका कहना है, “बिहार को उसका वाजिब हक दिलाने के लिए ज़रूरी है कि यहाँ के लोगों की एकजुटता वाली ताक़त केंद्र सरकार देखे और सौतेला रवैया छोड़े.”

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस रैली में लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए हाल ही में राज्य भर का दौरा किया था.

उसी दौरान उन्हें कई जगहों पर जनाक्रोश का भी सामना करना पड़ा था. खासकर ठेके पर नियुक्त स्कूल-शिक्षक उनका खुलकर विरोध कर रहे थे.

इन शिक्षकों ने रैली की पूर्व संध्या पर शनिवार को भी पटना में जब धरना-प्रदर्शन शुरू किया तो पुलिस ने उन्हें लाठियों से पीटते हुए खदेड़ दिया.

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