मुसलमानों को लेकर नायपॉल पर बरसे कर्नाड

गिरीश कर्नाड
Image caption कर्नाड के अचानक इस रुख से लोग हैरान हैं

मशहूर नाटककार गिरीश कर्नाड ने नोबेल पुरस्कार विजेता लेखक वीएस नायपॉल की कड़ी आलोचना की है. उन्होंने कहा है कि नायपॉल को भारतीय इतिहास में मुसलमानों के योगदान के बारे में कुछ नहीं पता है.

कर्नाड ने नायपॉल को 'संगीत की कद्र न करने वाला' और सम-सामयिक विषयों पर एक 'गैर भरोसेमंद' लेखक बताया.

ये बातें उन्होंने शुक्रवार को मुंबई में एक साहित्य उत्सव के दौरान कही जिसमें नायपॉल को साहित्य में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया. हालांकि कर्नाड ने जब ये टिप्पणियां कीं तो नायपॉल वहां मौजूद नहीं थे.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार कर्नाड ने अपने बयान पर माफी मांगने से इनकार किया है. शनिवार को उन्होंने कहा, “मैं पूरी तरह से अपने बयान पर कायम हूं. मैंने कोई गलती नहीं की है बल्कि मैं तो इसके लिए तैयार था.”

आयोजक हैरान

साहित्य उत्सव के आयोजक कर्नाड की कही बातों से सकते में हैं. उत्सव के निदेशक अनिल धारकर ने कहा, “वीएस नायपॉल पर गिरीश कर्नाड के हमले से हम सब हैरान हैं. आखिरकार हमने तो उन्हें यहां थिएटर में अपने अनुभव बांटने के लिए बुलाया था. नायपॉल से उनका कोई लेना-देना नहीं था.”

जब कर्नाड ने नायपॉल के बारे में ये बातें कहीं तो वहां मौजूद लोगों में मशहूर अभिनेता नसीरुद्दीन शाह भी शामिल थे.

कर्नाड ने कहा, “नायपॉल को नहीं पता है कि भारतीय इतिहास में मुसलमानों का कितना योगदान रहा है.”

उन्होंने बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के बाद नायपॉल के कथित रूप से भारतीय जनता पार्टी के मुख्यालय जाने के लिए भी उनकी आलोचना की.

नायपॉल के लेखन में कथित मुस्लिम विरोधी नजरिए की आलोचना करते हुए कर्नाड ने कहा, “हमारे रोजमर्रा के अस्तित्व में संगीत का बड़ा योगदान है. सड़क, रेस्त्रां, या कहीं भी आपको संगीत मिल जाएगा.. अब तक नायपॉल भारत पर तीन किताबें लिख चुके हैं. उनमें कहीं भी आपको संगीत का जिक्र नहीं मिलेगा. इससे पता चलता है कि उन्हें संगीत की कद्र ही नहीं है.”

इस बीच विवादास्पद बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने कर्नाड का समर्थन करते हुए ट्वीट किया है, "अगर नायपॉल अपनी किताबें किसी भारतीय भाषा में लिखते तो उन्हें कभी कोई जान भी नहीं पाता." उन्होंने भी नायपॉल को मुस्लिम विरोधी करार दिया है.

'बहुत लिख लिया भारत पर'

Image caption नायपॉल भारत पर कई किताबें लिख चुके हैं

कर्नाड ने मुंबई के इस साहित्य उत्सव में नायपॉल को सम्मानित किए जाने के फैसले पर ही सवाल उठाए. उन्होंने सम-सामयिक मुद्दों पर नायपॉल को 'गैर भरोसेमंद' लेखक कहा.

धारकर ने कहा, “मैं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिमायती हूं लेकिन इसका इस्तेमाल संवाद के लिए होना चाहिए, एक दूसरे की निंदा या आक्षेप लगाने के लिए नहीं.”

उधर नायपॉल का कहना है कि भारत पर उन्होंने पर्याप्त लिखा, अब और नहीं लिखेंगे. उन्होंने कहा, “मुझे अब ऐसा नहीं लगता, मैंने भारत के बारे में काफी लिखा है. मैंने भारत के बारे में चार किताबें, दो उपन्यास और बहुत से निबंध लिखे हैं.”

नायपॉल को 2001 में साहित्य के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.

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