मायावती के खिलाफ जनहित याचिकाएँ खारिज

Image caption ये फैसला मायवती के लिए राहत माना जा रहा है

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने पूर्व मुख्यमंत्री मायावती पर बहुचर्चित ताज कॉरिडोर निर्माण घोटाले में भ्रष्टाचार का मुकदमा दोबारा शुरू करने की जनहित याचिकाएं खारिज कर दी हैं.

इसे मायावती के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है. सीबीआई ने मायावती समेत उनकी सरकार के कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों पर मुकदमा चालने के लिए चार्जशीट दाखिल की थी.

लेकिन जून 2007 में तत्कालीन राज्यपाल टीवी राजेश्वर राव ने मायावती पर मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं दी थी, जिसके बाद ट्रायल कोर्ट ने मामला खारिज कर दिया था.

हाई कोर्ट में जनहित याचिकाओं के जरिए राज्यपाल के निर्णय को चुनौती दी गई थी.

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि सरकारी लोकसेवकों को उनके वैधानिक दायित्वों का निर्वाह करने के लिए आपराधिक मुकदमा चालने से संरक्षण दिया जाता है. न कि भ्रष्टाचार के लिए. इसलिए मायावती पर मुकदमा चलाने के लिए राज्यपाल की अनुमति की आवश्यकता ही नहीं थी.

लेकिन हाई कोर्ट ने इस तर्क को नहीं माना और जनहित याचिकाएं खारिज कर कर दी.

क्या है मामला

यह मालमा वर्ष 2002 में शुरू हुआ था, जब माया सरकार ने आगरा में ताजमहल से सटे इलाके में एक नई सड़क और बाज़ार बनाने की 175 करोड की परियोजना शुरू की थी.

आरोप था कि इस काम का ठेका देने में भ्रष्टाचार हुआ.

इस तरह अदालत ने मायावती को तकनीकी आधार पर राहत दी है और उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों को खारिज नही किया गया है.

यह फैसला ऐसे समय आया है जबकि देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी मुहिम चल रही है.

लेकिन मायावती ने साबित कर दिया कि उनके पास वकीलों की ऎसी टीम है जो उन्हें किसी भी आरोप से बचा सकती है.

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