खुले में पेशाब की तो बजेगा ढोल

Image caption भारत में ऐसे दृश्य आम हैं.

भारत के पश्चिमी राज्य राजस्थान में लोगों को खुले में पेशाब या शौच करने से रोकने के लिए एक नया तरीका आज़माया जा रहा है जिसके तहत ऐसे लोगों को देखते ही कुछ लोग ढोल बजाने लगते हैं.

अधिकारियों का कहना है कि इस योजना की शुरूआत झुंझनू जिले के 34 गांवों में पांच नवंबर से की गई है.

स्थानीय अधिकारी ने बीबीसी को बताया, ''जैसे ही कोई व्यक्ति खुले में शौच या पेशाब करता नज़र आता है, चार-पांच लोग जोर से आवाज़ लगाते हैं, ढोल या सीटी बजाते हैं.''

फिर भी न मानने वालों पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है.

भारत की लगभग 1.2 अरब आबादी शौचालयों से वंचित है और उन्हें खुले में ही शौच करना पड़ता है.

बड़ी समस्या

संवाददाताओं का कहना है कि भारत में सार्वजनिक स्थानों पर थूकना, पेशाब या शौच करना आम बात है. यहां तक कि ग्रामीण इलाकों में जहां शौचालय हैं, वहां भी लोग खुले में शौच करना पसंद करते हैं.

लेकिन झुंझनू के प्रशासन ने इसे रोकने की ठान ली है. ज़िला परिषद के प्रमुख रामनिवास जाट ने बीबीसी को बताया, ''ज़िले में लगभग 80 प्रतिशत ग्रामीणों के घरों में शौचालय हैं और बाकी 20 प्रतिशत घरों में शौचालय बनवाने के लिए प्रोत्साहन दिया जा रहा है. इसके लिए जरूरतमंदों को आर्थिक मदद भी दी जा रही है.''

अधिकारियों का कहना है कि भारत में करोड़ों लोग खुले में शौच करते हैं जिसकी मुख्य वजह शिक्षा और शौचालयों की कमी है. खुले में शौच की वजह से कई तरह की बीमारियां भी फैलती हैं.

भारत के ही एक अन्य राज्य मध्यप्रदेश में बीते साल एक नव-विवाहिता ने अपने पति का घर शादी के दो दिन बाद ही इसलिए छोड़ दिया था क्योंकि उस घर में शौचालय नहीं था.

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