पिच क्यूरेटर प्रसन्ना का इंग्लैंड टीम से है खास रिश्ता

 गुरुवार, 15 नवंबर, 2012 को 08:10 IST तक के समाचार
BBC

सरदार पटेल स्टेडियम, मोटेरा के पिच क्यूरेटर धीरज प्रसन्ना.

सरदार पटेल क्रिकेट स्टेडियम, अहमदाबाद के पिच क्यूरेटर धीरज प्रसन्ना के लिए इंग्लैंड और भारत के बीच गुरूवार से शुरू पहला टेस्ट मैच समय का एक चक्र पूरा करने जैसा है. असल में आज़ादी के चार महीने बाद राजकोट में पैदा हुए प्रसन्ना के लिए इंग्लैंड की टीम एक ख़ास मेहमान की तरह है.

भारत के बांए हाथ के पूर्व टेस्ट पेसर प्रसन्ना ने बीबीसी से कहा, “बेशक मैंने 30-35 साल पहले क्रिकेट छोड़ दिया. लेकिन इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड का मोनोग्राम और इंग्लैंड का क्रिकेट आज भी मेरे आसपास है.”

क्यूरेटर प्रसन्ना करीब डेढ़ दशक से भारतीय क्रिकेट बोर्ड के पिच विशेषज्ञों की टीम में शामिल हैं लेकिन उनके मोटेरा क्रिकेट ग्राउंड के पिच क्यूरेटर रहते इंग्लैंड की टीम पहली बार कोई टेस्ट मैच खेलेगी.

"मैंने सारी टीमें देखी हैं लेकिन इंग्लैंड मेरी नजर में सबसे अनुशासित है. इंग्लैंड की टीम पिछले कई दिनों से इस ग्राउंड पर है लेकिन कोई भी खिलाड़ी टेस्ट मैच के लिए तैयार पिच के पास नहीं गया है."

धीरज प्रसन्ना, पिच क्यूरेटर

प्रसन्ना ने भारत के लिए 1979 में वेस्टइंडीज के खिलाफ सिर्फ दो टेस्ट मैच खेले हैं जिनमें उन्होंने एक ही रन बनाया और एक ही विकेट उनके नाम है.

प्रसन्ना ने इंग्लैंड में बोर्डन क्लब व डरहम काउंटी के लिए करीब 11 साल पेशेवर क्रिकेट खेलने के अलावा ग्राउंड्समैन का काम भी किया. डरहम की टीम के अपने कप्तान ब्रायन लंडर के लिए प्रसन्ना के पास आज भी शब्दों की कम नहीं.

गेंदबाज से पिच विशेषज्ञ

प्रसन्ना की गेंदबाज से पिच विशेषज्ञ बनने की कहानी काफी रोचक है.

घरेलू क्रिकेट में 22.08 की औसत से 196 विकेट ले चुके प्रसन्ना बताते हैं, “1982 में गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन नया स्टेडियम बना रही थी. लेकिन उस समय कोई क्यूरेटर नहीं था. बिशन सिंह बेदी, पॉली उमरिगर और राज सिंह डूंगरपुर एसोसिएशन के सलाहाकर थे. पॉली को पता था कि मैं इंग्लैंड में ग्राउंड में भी काम करता था. उन्होंने मुझसे पूछा कि तू करेगा. मैंने कहा हां.”

ग्राउंड पर काम करना और पिच तैयार करने की चुनौती बिलकुल अलग थी. लेकिन प्रसन्ना ने शिक्षा की कमी के बावजूद इसे एक पेशेवर की तरह पूरा किया.

प्रसन्ना ने गुजरात, सौराष्ट्र और रेलवे के लिए घरेलू क्रिकेट में खेलते हुए 28.56 की औसत से 2285 रन बनाए हैं.

वे 1982-83 से गुजरात एसोसिएशन के क्यूरेटर है.

'अंग्रेज़ी नहीं आती थी'

"डरहम के दिनों के दौरान इंग्लिश आती नहीं थी. कमिंग, गोईंग, वेलडन और बॉय के सिवा कुछ बोलना नहीं आता था. स्थानीय क्लब बोर्डन में मुझे ग्राउंड्समैंन के साथ काम करने का अलग पैसा दिया. "

पूर्व टेस्ट मीडियम पेसर प्रसन्ना

प्रसन्ना ने बीबीसी को बताया, "मुझे मिट्टी, इसकी क्वालिटी के बारे में जानकारी पुख्ता करने में यहां के इंजीनियरिंग कॉलेज के वैज्ञानिक एआर गांधी ने मदद की. मैंने पूछा कि मुझे मिट्टी, मौसम, घास आदि के बारे में जानना है क्या आप मेरी मदद करेंगे. वह मुझे बताते और मैं नोट तैयार करता. उन नोट्स पर आधारित बुकलेट आज न सिर्फ मेरे बल्कि देश के कई क्यूरेटर्स के काम आ रही है.”

प्रसन्ना बताते हैं कि उन दिनों उन्हें अंग्रेज़ी आती नहीं थी. वे सिर्फ़ कमिंग, गोईंग, वेलडन और बॉय के सिवा कुछ बोल पाते थे.

इसी वजह से उन्हें काम मिलना मुश्किल था.

प्रसन्ना कहते हैं, "स्थानीय क्लब बोर्डन में मुझे ग्राउंड्समैन के साथ काम करने का अलग पैसा दिया गया. क्योंकि मैंने स्कॉटलैंड में ये काम किया था. मैं घास काटने के अलावा मार्किंग भी करता. मैं मैच भी खेलता और हाफ टाइम में पिच की रोलिंग भी करता. आज ख़ुश हूं कि जो कुछ मैंने इंग्लैंड में सीखा वह मेरे देश और गुजरात के काम आ रहा है.”

प्रसन्ना के लिए यह टेस्ट मैच इसलिए भी अहम हो गया है क्योंकि इंग्लैंड के मीडियम पेसर ग्राहम ओनियन ने उनसे मिलने की इच्छा जाहिर की है. ओनियन भी डरहम के लिए खेलते हैं.

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