पॉन्टी चड्ढा: एक रहस्यमयी कारोबारी

 बुधवार, 21 नवंबर, 2012 को 08:04 IST तक के समाचार

बीते पांच साल में तेजी से फैला पॉन्टी चड्ढा का कारोबार.

बीते शनिवार को दिल्ली में एक बड़े कारोबारी गुरदीप सिंह चड्ढा उर्फ़ पॉन्टी चड्ढा की हत्या छतरपुर में उनके अपने ही फ़ार्म हाउस में हो गई. हत्या के कारणों का अब तक पता नहीं चला है.

इस गोलीबारी में उनके छोटे भाई हरदीप सिंह की भी मौत हो गई. बताया जा रहा है कि दोनों भाईयों में इसी फॉर्म हाउस को लेकर विवाद था, जिसके चलते वाद-विवाद गोलीबारी की स्थिति तक पहुंची और दोनों भाई एक दूसरे का निशाना बन गए.

महज़ एक पखवाड़े पहले पॉन्टी चड्ढा दिल्ली पुलिस के मुखिया नीरज कुमार से मिले थे. हमेशा 36 सुरक्षा गार्डों से घिरे रहने वाले पॉन्टी ने अपनी जान का ख़तरा बताते हुए नीरज कुमार से अपनी सुरक्षा बढ़ाने की बात कही थी.

धन दौलत का साम्राज्य

लेकिन अजीब ये था कि उन्होंने इस बाबत पुलिस को लिखित तौर पर कोई शिकायत नहीं की थी. वहीं दूसरी ओर छोटे भाई हरदीप के वकील गौरंग कंठ ने बताया कि उनके मुवक्किल अपने बड़े भाई के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराना चाहते थे.

कारोबार की दुनिया में चड्ढा भाईयों की हैसियत लगातार मज़बूत हो रही थी. रियल एस्टेट, शॉपिंग कॉम्पलेक्स, चीनी मिल और फ़िल्म निर्माण से जुड़े इनके कारोबार देश के चार राज्यों में फैले हुए हैं. ऐसा अनुमान है कि दोनों भाईयों का साम्राज्य 10 अरब डॉलर (500 अरब रुपये) तक पहुंच चुका था.

पॉन्टी की हत्या पर भारत के पूर्व गृह सचिव जीके पिल्लई ने कहा, “एक रहस्यमयी कारोबारी की हत्या भी रहस्य का विषय है.” गोलीबारी का शिकार हुए पॉन्टी खुद गोली नहीं चला सकते थे, क्योंकि बचपन में पतंग उड़ाते हुए उनकी माझा लगी डोर हाई वोल्टेज तार से जा टकराई थी, जिसके चलते उनका बायां हाथ काटना पड़ा था और दाएं हाथ में भी महज दो अंगुलियां बची थीं.

"एक रहस्यमयी कारोबारी की हत्या भी रहस्य का विषय है."

जीके पिल्लई, पूर्व गृह सचिव

अरबों के साम्राज्य के मालिक पॉन्टी स्कूली पढ़ाई भी पूरी नहीं कर पाए और एक शराब की दुकान के बाहर अपने पिता के ठेले पर सामान बेचने लगे. बाद में जोड़तोड़ कर उनके पिता ने एक शराब की दुकान का ठेका हासिल कर लिया था.

यहां से शुरुआत कर पॉन्टी चड्ढा उत्तर प्रदेश में शराब के सबसे बड़े कारोबारी बन गए. बीते पांच साल से देश की सबसे बड़ी आबादी वाले सूबे की 80 फ़ीसदी शराब दुकानों का ठेका उनके पास था. पॉन्टी की इस कामयाबी की वजह थी कि उन्होंने शक्तिशाली नेताओं से अच्छे संबंध बना लिए थे. ख़ासकर उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती से उनके बेहद घनिष्ठ संबंध थे.

पैसा भी, पहुंच भी

पॉन्टी अपने कारोबार को आक्रामक तरीक़े से फैलाने में जुटे हुए थे. 2009 में भारत सरकार को पॉन्टी के ख़िलाफ़ एक शिकायत मिली जिसके मुताबिक़ वे रूसी कारोबारी बोरिस बेरोजोवेस्की के साथ मिलकर इथोपिया में खेती के लिए सात लाख हेक्टेयर ज़मीन की लीज़ हासिल करना चाहते थे.

तब वे लीज़ हासिल नहीं कर पाए लेकिन अभी कुछ समय पहले उन्होंने इथोपिया में क़रीब आठ लाख हेक्टेयर जमीन की लीज़ हासिल की.

मायावती से नज़दीकी के चलते उन्होंने सस्ती दरों पर राज्य की कई चीनी मिलों को ख़रीद लिया था. उनके बेव-समूह ने राज्य के स्कूलों में बच्चों को मिड-डे मील के तहत भोजन देने का ठेका भी हासिल कर लिया था.

देश के जाने माने राजनीतिक-सामाजिक विश्लेषक आशीष नंदी कहते हैं, “पॉन्टी स्कूली बच्चों को दूध मुहैया कराते थे और उनके माता-पिता के लिए शराब. उनके पास ताक़त थी और पहुंच भी. इन दोनों का उन्होंने ख़ूब इस्तेमाल किया.”

"पॉन्टी स्कूली बच्चों को दूध मुहैया कराते थे और उनके माता-पिता के लिए शराब.उनके पास ताकत थी और पहुंच भी. इन दोनों का उन्होंने खूब इस्तेमाल किया."

आशीष नंदी, राजनीतिक-सामाजिक विश्लेषक

पॉन्टी पर अपनी पहुंच के इस्तेमाल करने के आरोप भी ख़ूब लगे लेकिन वे कभी साबित नहीं हो पाए. वहीं दूसरी ओर दिल्ली और उत्तर प्रदेश में उनके 25 ठिकानों पर छापा मारने का आदेश देने वाले वरिष्ठ आयकर अधिकारी एसएस राणा को उनके पद से हटा दिया गया था.

उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक रहे प्रकाश सिंह कहते हैं,“पॉन्टी के पास ढेर सारा पैसा था और इसमें से ज़्यादातर उन्होंने शराब के कारोबार से बनाया था. इससे वे राजनीतिक दलों का समर्थन हासिल कर लेते थे. जब मायावती की बहुजन समाज पार्टी उत्तर प्रदेश में सत्ता से बाहर हुई तो उन्होंने अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी का रुख़ कर लिया.”

पॉन्टी को ये मालूम था कि शराब के कारोबार से वह पैसा तो बना सकते हैं लेकिन रसूख़ वाली हैसियत के लिए उन्हें कुछ और भी करना होगा. वह अपनी छवि 'लार्जर दैन लाइफ़' बनाना चाहते थे.

उनका बेव समूह फ़िल्म के निर्माण और वितरण में भी उतर पड़ा था. रियल एस्टेट के कारोबार को भी उन्होंने काफ़ी फैला लिया था. इंडियन प्रीमियर लीग की तर्ज़ पर शुरू होने वाली हॉकी लीग के लिए उन्होंने दो टीमों की फ़्रैंचाइज़ी भी हासिल कर ली.

पॉन्टी में थी लार्जर देन लाइफ़ वाली छवि की चाहत.

दिल्ली के पास चार एकड़ में मुर्ग़ी पालन प्लांट भी शुरू करने की योजना थी. पॉन्टी दिल्ली में विकलांग बच्चों के लिए एक स्कूल भी चलाते थे और सिख गुरुद्वारों के निर्माण में भी रूचि लेते थे.

लार्जर देन लाइफ़

अपने महंगे फॉर्म हाउस में वे अपने मेहमानों से शाही अंदाज़ में मिला करते. जैसमीन की चाय के साथ आयातित हंटले और पाल्मर के बिस्कुट पेश करने के बाद वे बताते कि किस तरह देश की राजनीतिक व्यवस्था और मीडिया उन्हें शिकार बना रही है.

मई, 2012 को इस संवाददाता को दिए बेहद ख़ास इंटरव्यू में उन्होंने बताया था, “देश में कई शराब के कारोबारी हैं जो अपने कारोबार में लगातार नाकाम हो रहे हैं, उनकी संपत्तियां बिक रही हैं लेकिन उनकी छवि मुझसे कहीं ज़्यादा बेहतर है.” इसी इंटरव्यू में उन्होंने साफ़ शब्दों में कहा था कि उन्हें 'लीकर किंग' कहलाना पसंद नहीं है.

इंटरव्यू के दौरान पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब को रुक-रुक कर पढ़ते हुए पॉन्टी ने बताया था, “मेरे परिवार में कोई शराब का कारोबार नहीं संभालना चाहता. मेरे पास दूसरे कारोबार में जाने के सिवा दूसरा विकल्प नहीं है. यह मेरे जीवन का बेहद चुनौतीपूर्ण समय है.”

नहीं आए काम हनुमान

"देश में कई शराब के कारोबारी हैं जो अपने कारोबार में लगातार नाकाम हो रहे हैं, उनकी संपत्तियां बिक रही हैं लेकिन उनकी छवि मुझसे कहीं ज़्यादा बेहतर है."

पॉन्टी चड्ढा, मृतक शराब कारोबारी

इस साल की शुरुआत में पॉन्टी ने पारिवारिक कारोबार में अपने बेटे मनप्रीत को बढ़ाना शुरू कर दिया था. मनप्रीत दुनिया भर में होने वाली कारोबारी बैठकों में समूह का प्रतिनिधित्व करने लगे थे. पॉन्टी ने अपने इस क़दम के बारे में बताया था, “मनप्रीत ही समूह का भविष्य है. वह सबकुछ कर सकता है. मैं तो कभी-कभार ही फॉर्म हाउस से बाहर निकलता हूं.”

इंटरव्यू के बाद अरमानी सूट पहने पॉन्टी अपने लिविंग रूम से बाहर निकले और उन्होंने मुझे अपने बेहद ख़ास तोतों के समूह से मिलवाया जिसमें मकाऊ के तोते भी शामिल थे. बग़ल में महंगी गाड़ियां खड़ीं थीं जिनमें बेंटले और फ़रारी जैसी लग्ज़री कारों का काफ़िला था.

इन सबके पास थी आदमक़द हनुमान की मूर्ति. इसे पॉन्टी ने कुछ साल पहले ही स्थापित कराया था. सभी हिंदू परिवारों की तरह ही पॉन्टी मानते थे कि शारीरिक ताक़त, दृढ़ता और प्रतिबद्धता की मिसाल वानर देवता की आराधना उन्हें और उनके परिवार को हर मुसीबत से बचाएगी.

लेकिन बीते शनिवार ना तो यह आराधना काम आई और ना ही छत्तीस सुरक्षा गार्डों का घेरा ही उन्हें मौत से बचा पाया.

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