क्या संसद में चलेगा कसाब का दांव?

 गुरुवार, 22 नवंबर, 2012 को 08:26 IST तक के समाचार

संसद के पिछले कई सत्र हंगामे की भेट चढ़ चुके हैं

आज से शुरू होने वाले संसद के शीतकालीन सत्र में फिर से जोरदार हंगामे के आसार दिखाई दे रहे हैं.

यूपीए सरकार के क्लिक करें खुदरा क्षेत्र में विदेशी निवेश की अनुमति देने के फैसले पर विपक्ष के अधिकतर दल ऐसी संसदीय बहस चाह रहे हैं जिसमें वोटिंग का प्रावधान हो, जब कि सरकार की पूरी कोशिश है कि इस मुद्दे पर मतदान न हो पाए.

दूसरी तरफ ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के सरकार के खिलाफ क्लिक करें अविश्वास प्रस्ताव को फिलहाल व्यापक समर्थन नहीं मिल पाया है. इस बात पर भी सवाल उठ रहे हैं कि 19 सदस्यों वाली तृणमूल कांग्रेस प्रस्ताव के लिए ज़रूरी 50 सांसदों का समर्थन भी हासिल कर पाएगी या नहीं.

यूपीए सरकार ने शीतकालीन सत्र से ठीक एक दिन पहले क्लिक करें कसाब को फांसी पर लटकाने का फैसला कर जनमत को अपने पक्ष में करने का दांव चला है. देखना यह है कि वह संसद में इसे राजनीतिक रूप से भुना पाने में सफल रहती है या नही.

बैठक असफल

विपक्ष की नाराजगी इस बात पर है कि सरकार तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी द्वारा दिए गए उस आश्वासन से फिर गई है जिसमें यह कहा गया था कि खुदरा क्षेत्र में विदेशी निवेश के बारे में सभी संबंधित पक्षों से सलाह मशविरा करने के बाद ही अंतिम फैसला किया जाएगा.

लोकसभाध्यक्ष द्वारा बुलाई गई बैठक के असफल होने के बाद अब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बीजेपी के चोटी के नेताओं से मंत्रणा करने के लिए उन्हें रात के खाने पर बुलाया है.

मनमोहन सिंह की कोशिश होगी कि सरकार और बीजेपी के बीच मतभेदों को कुछ हद तक कम किया जा सके ताकि इस संसद सत्र को भी वही हश्र न हो जो इससे पहले कई संसद सत्रों का हो चुका है.

मतदान पर ज़ोर

"हम चाहते हैं कि सदन चले. कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होनी है लेकिन हमारी शर्त यही है कि सबसे पहले वह मुद्दा उठाया जाए जिसके बारे में सरकार ने सदन को आश्वासन दिया था और वह भी उस नियम के तहत जिस पर मतदान हो सके"

सुषमा स्वराज

लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने ज़ोर देकर कहा है,"हम चाहते हैं कि सदन चले. कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होनी है लेकिन हमारी शर्त यही है कि सबसे पहले वह मुद्दा उठाया जाए जिसके बारे में सरकार ने सदन को आश्वासन दिया था और वह भी उस नियम के तहत जिस पर मतदान हो सके"

भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी के गुरुदास गुप्ता का भी कहना था कि वह सुषमा स्वराज की खुदरा क्षेत्र में निवेश पर नियम 184 के तहत बहस कराए जाने की माँग का समर्थन करते हैं.

कांग्रेस के प्रवक्ता पीसी चाको ने पार्टी और सरकार के उस तर्क का समर्थन करते हुए कहा कि खुदरा क्षेत्र में निवेश का फैसला पूरी तरह से कार्यपालिका द्वारा लिया गया फैसला है जिस पर संसद में मतदान नहीं कराया जा सकता.

उन्होंने यह भी कहा कि अगर विपक्ष सही समझता है तो उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकता है. उनके अनुसार सरकार को संसद में बहुमत हासिल है और वह इसे संसद में सिद्ध भी कर सकती है.

विपक्ष में इस बात पर चिंता है कि अगर सरकार अविश्वास प्रस्ताव बचाने में सफल हो जाती है तो अगले छह महीनों तक उसके खिलाफ कोई भी अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकेगा.

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