नामधारी ने हरदीप पर गोली चलाई, मुख्य अभियुक्त: पुलिस

 शनिवार, 24 नवंबर, 2012 को 21:55 IST तक के समाचार
पोंटी

नामधारी पोंटी चडढ़ा और उसके भाई हरदीप की हत्या के समय घटनास्थल पर मौजूद थे

बहुचर्चित शराब व्यापारी पोंटी चड्ढा और उसके भाई हरदीप की हत्या के मामले में घटनास्थल पर मौजूद उत्तराखंड के राजनीतिक नेता सुखदेव सिंह नामधारी पर पुलिस ने हरदीप पर गोली चलाने और वारदात के मुख्य अभियुक्त होने का आरोप लगाया है.

समाचार एजेंसियों के अनुसार दिल्ली की एक अदालत में शनिवार को सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस न्यायालय को बताया कि नामधारी ने अपने बयान में माना है कि जब हरदीप ने उसकी ओर बंदूक घुमाई तो उसने अपनी पिस्तौल से हरदीप पर फायर किया.

दिल्ली के मेट्रोपॉलिटन मेजिस्ट्रेट संदीप गर्ग ने उत्तराखंड के अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष नामधारी को पाँच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है ताकि वारदात में इस्तेमाल हुआ हथियार बरामद किया जा सके.

लेकिन अदालत के बाहर पत्रकारों से नामधारी ने इसे उनके खिलाफ रची गई राजनीतिक साजिश करार दिया.

"इस मामले में कई अन्य लोग भी शामिल हैं और इस अपराध को अंजाम देने में एक सोची-समझी साजिश हुई है. संभव है कि इस साजिश में कुछ ऐसे लोग शामिल थे जिनकी 1000 करोड़ से अधिक की संपत्ति है. पूरी साजिश का पर्दाफाश करने के लिए हिरासत में व्यापक पूछताछ की जरूरत है"

दिल्ली पुलिस

हाल में छतरपुर के एक फार्महाऊस में हुई फायरिंग में कारोबारी पोंटी चड्ढ़ा और उनके भाई हरदीप की मौत हो गई थी. उस समय कयास लगाए जा रहे थे कि दोनों के बीच एक फार्महाऊस की मिलकियत के बारे में मतभेद थे जिन्होंने एक दिन सुबह हिंसक शक्ल ले ली थी.

'1000 करोड़ की संपत्ति वाले शामिल'

जाँच एजेंसी ने कहा है कि नामधारी पूरे मामले में मुख्य अभियुक्त हैं क्योंकि उन्होंने अपने एफआईआर में इस फायरिंग की बात नहीं कही थी और उन्होंने कथित तौर पर अपनी पिस्तौल भी छिपा दी थी.

पुलिस ने अदालत में आरोप लगाया कि नामधारी पोंटी चड्ढा के सहयोगी थे और जिस दिन वारदात हुई उस दिन उन्होंने पोंटी के साथ फार्महाऊस में लूटपाट, तोड़फोड़ की थी और हत्या करने का प्रयास किया था.

सरकारी वकील मनोज चौधरी का कहना था, "इस मामले में कई अन्य लोग भी शामिल हैं और इस अपराध को अंजाम देने में एक सोची-समझी साजिश हुई है. संभव है कि इस साजिश में कुछ ऐसे लोग शामिल थे जिनकी 1000 करोड़ से अधिक की संपत्ति है. पूरी साजिश का पर्दाफाश करने के लिए हिरासत में व्यापक पूछताछ की जरूरत है."

पुलिस ने ये भी कहा कि नामधारी के कुछ अन्य सहयोगी जो उत्तराखंड या उत्तर प्रदेश में हैं, उनकी गिरफ्तारी की जानी है. पुलिस के अनुसाल ये वो लोग थे जो घटनास्थल पर नामधारी के साथ मौजूद थे लेकिन बाद में गायब हो गए.

उधर नामधारी ने अदालत ने बाहर निकलने के बाद पत्रकारों से कहा, "मैं इस मामले पर और कुछ नहीं कहना चाहता हूँ. मैं केवल इतना कहना चाहता हूँ कि ये एक दुर्घटना थी और इस मामले में एफआईआर मैंने ही दर्ज कराई थी. मैंने पुलिस को बुलाया था. ये कहना गलत है कि मैंने गोली चलाई, ये जाँच का विषय है."

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