कारों पर टैक्स बढ़ाकर रुकेगा प्रदूषण?

 बुधवार, 28 नवंबर, 2012 को 08:50 IST तक के समाचार
दिल्ली

दिल्ली में कुछ हफ्तों पहले धुंध की ऐसी चादर छाई थी जिसके लिए प्रदूषण को जिम्मेदार माना गया.

सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका के बाद प्रदूषण का मुद्दा नए सिरे से चर्चा में आ गया है.

इस याचिका में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए राजधानी दिल्ली में सभी निजी कारों पर सालाना अतिरिक्त कर लगाने की मांग की गई है.

सुप्रीम कोर्ट ने भी इस बारे में केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर उसका जवाब मांगा है.

दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण को नियंत्रित करने के मुद्दे पर दाखिल जनहित याचिका पर जस्टिस आफताब आलम की नेतृत्व वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि लोगों को सांस लेने की अनुमति होनी चाहिए और ये बहुत अहम मुद्दा है, इस पर गौर किया जाएगा.

इस याचिका में डीजल की सभी गाड़ियों पर उनके मूल्य का चार प्रतिशत और पेट्रोल की गाड़ियों पर उनके मूल्यों का दो प्रतिशत सालाना अतिरिक्त कर लगाने की मांग की गई है.

लेकिन कार उद्योग के जानकार टुटु धवन का कहना है कि कारों के ज्यादा प्रदूषण तो उद्योग कर रहे हैं. वो कहते हैं कि कार कंपनियां प्रदूषण को कम करने के लिए बहुत कदम उठा चुकी हैं.

नफा-नुकसान

"अगर आप किसी को ये कहेंगे कि गाड़ी मत खरीदो तो वो समझेगा कि आप उसकी जिंदगी में दखल दे रहे हैं. लेकिन अगर आप कहें कि आप सार्वजनिक यातायात की सुविधा दे रहे हैं और उसके लिए निजी वाहनों को जगह छोड़नी होगी, तो उसमें कोई कुछ कह नहीं सकता. इसके लिए एक तरह की समझ चाहिए जो हमारी राजनीति में अभी नहीं है."

सोपान जोशी, पर्यावरण मामलों के जानकार

याचिका में कहा गया है कि अतिरिक्त कर बीमा कंपनियां उस वक्त वसूलें जब लोग गाड़ी के बीमा का नवीनीकरण कराने उनके पास जाएं. याचिका में ये भी मांग की गई है कि डीजल की प्रत्येक कार की खरीद के वक्त उसकी कीमत का 25 प्रतिशत हिस्सा भी वसूला जाना चाहिए.

इस जनहित याचिका की पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे का कहना है कि इससे अंधाधुंध गाड़ियां खरीदने वाले कुछ तो हतोत्साहित होंगे.

पर्यावरणविद् वीरभद्र मिश्रा कहते हैं, ''गाड़ियों पर इस तरह टैक्स लगाने से पर्यावरण को कोई फायदा नहीं होगा. प्रदूषण को रोकना है तो उसके उपाय वैज्ञानिक होने चाहिए और वे जनता के बीच से उठकर आएं, उनमें जनता की भागीदारी हो.''

सार्वजनिक परिवहन

इस जनहित याचिका में कहा गया है कि हर रोज दिल्ली में 1400 वाहन नए आ रहे हैं. नई गाड़ियों में स्वच्छ ईंधन के नियमों का पालन किया जा रहा है लेकिन उनकी संख्या इतनी ज्यादा है कि दिल्ली की हवा को प्रदूषित होने से नहीं बचाया जा सकता.

पर्यावरणविद् और प्रदूषण से जुड़े मुद्दों पर शोध कर रहे सोपान जोशी कहते हैं कि प्रदूषण से कारगर तरीके से निपटने का कारगर तरीका सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाना है.

वो कहते हैं, ''अगर आप किसी को ये कहेंगे कि गाड़ी मत खरीदो तो वो समझेगा कि आप उसकी जिंदगी में दखल दे रहे हैं. लेकिन अगर आप कहें कि आप सार्वजनिक यातायात की सुविधा दे रहे हैं और उसके लिए निजी वाहनों को जगह छोड़नी होगी, तो उसमें कोई कुछ कह नहीं सकता. इसके लिए एक तरह की समझ चाहिए जो हमारी राजनीति में अभी नहीं है.''

याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भी सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाने की जरूरत पर जोर दिया है. इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा है.

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