पूर्व प्रधानमंत्री इंदर कुमार गुजराल नहीं रहे

 शुक्रवार, 30 नवंबर, 2012 को 16:56 IST तक के समाचार
इंदर कुमार गुजराल

गुजराल वर्ष 1997 में जनता दल के नेतृत्व वाली संयुक्त मोर्चा सरकार में प्रधानमंत्री बने थे.

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री इंदर कुमार गुजराल का निधन हो गया है. वे 92 वर्ष के थे.

गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने लोकसभा में बताया कि गुजराल ने शुक्रवार दोपहर 3.31 बजे गुड़गांव के मेदांता हॉस्पिटल में अंतिम सांसें लीं. उनका अंतिम संस्कार शनिवार को दिल्ली में किया जाएगा.

फेफड़ों में संक्रमण की शिकायत के बाद उन्हें 19 नवम्बर को मेदांता हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था. उन्हें जीवन-रक्षक प्रणाली (वेंटिलेटर) पर रखा गया था जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी.

वे जनता दल के नेतृत्व वाली संयुक्त मोर्चा सरकार में अप्रैल 1997 से मार्च 1998 के दौरान प्रधानमंत्री थे. उन्होंने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय तथा अन्य मंत्रालयों का भी कार्यभार संभाला था.

'गुजराल-डॉक्ट्रिन'

विदेश मंत्री के तौर पर गुजराल को उनकी विदेश नीतियों की वजह से खासतौर पर जाना जाता है. 'गुजराल-डॉक्ट्रिन' के नाम से प्रसिद्ध उनकी विदेश नीति भारत के पड़ोसी मुल्कों के साथ संबंधों को लेकर विदेशों में भी खासी चर्चा में रही.

गुजराल का जन्म अविभाजित भारत के झेलम कस्बे में चार दिसम्बर 1919 को हुआ था. उन्होंने भारत के स्वतंत्रता-संग्राम में हिस्सा लिया था और वर्ष 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जेल की सज़ा भी काटी थी. विभाजन के बाद वे पाकिस्तान से भारत आ गए थे.

अस्सी के दशक में उन्होंने कांग्रेस पार्टी छोड़ दी और साल 1989 में वीपी सिंह के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय मोर्चा सरकार में वे पहली बार विदेश मंत्री बने थे.

वे एचडी देवेगौड़ा के नेतृत्व वाली संयुक्त मोर्चा सरकार में दूसरी बार विदेश मंत्री बने और जब कांग्रेस के समर्थन वापस लेने के बाद साल 1997 में उन्होंने प्रधानमंत्री का पद संभाला था.

राजनीति

मौजूदा पाकिस्तान के लाहौर स्थित डीएवी कॉलेज से स्नातक गुजराल छात्र-राजनीति में भी सक्रिय रहे थे.

अप्रैल 1964 में वे राज्य सभा के सदस्य बने थे. गुजराल के बारे में कहा जाता है कि वे उस गुट में शामिल थे जिसने इंदिरा गांधी को वर्ष 1966 में प्रधानमंत्री बनने में मदद की थी.

देश में 25 जून 1975 को आपातकाल लगाया गया था और प्रेस पर पाबंदी लगाई गई थी. तब गुजराल ही सूचना एवं प्रसारण मंत्री थे.

वे वर्ष 1989-1991 के दौरान लोक सभा के भी सदस्य रहे और लालू प्रसाद की मदद से वर्ष 1992 में एक फिर राज्य सभा के लिए चुने गए.

अकाली दल की मदद से गुजराल पंजाब की जालंधर लोक सभा सीट से वर्ष 1998 में फिर लोकसभा पहुंच गए थे.

गुजराल सरकार ने उत्तरप्रदेश में वर्ष 1997 में राष्ट्रपति शासन लगाने की अनुशंसा की थी. तब केआर नारायणन भारत के राष्ट्रपति थे जिन्होंने इस अनुशंसा पर दस्तखत करने से इनकार कर दिया था.

उनकी पत्नी शीला गुजराल का पिछले ही वर्ष निधन हुआ था जो साहित्य जगत से जुड़ी हुई थीं. उनके भाई सतीश गुजराल एक जानेमाने चित्रकार हैं. वे अपने पीछे दो बेटे छोड़ गए हैं जिनमें से एक नरेश गुजराल राज्य सभा सांसद हैं.

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