क्या पदयात्रा दिलाएगी कुर्सी?

  • 1 दिसंबर 2012

बासठ वर्षीय नारा चंद्रबाबू नायडू अपनी तेलुगु देसम पार्टी को सत्ता में वापस लाने के लिए जीतोड़ कोशिश कर रहे हैं. 2400 किलोमीटर लम्बी पदयात्रा "वस्तुन्ना मी कोसम" (आ रहा हूँ आप के लिए) इसी का एक हिस्सा है.

इस 117 दिन लम्बी पदयात्रा में वो राज्य के 23 में से 13 ज़िलों में पैदल घूम रहे हैं.

नायडू की पदयात्रा को देखते हुए वाई एस आर कांग्रेस ने भी राजशेखर रेड्डी की सुपुत्री शर्मिला को मैदान में उतारा. क्योंकि जगन रेड्डी भ्रष्टाचार के आरोप में पिछले छह महीनों से जेल में हैं.

शर्मिला अपने भाई की जगह तीन हज़ार किलोमीटर की पदयात्रा पर हैं. आइए एक नज़र डालते हैं उन इलाकों पर जहां से इन दो नेताओं का काफ़िला गुबार उड़ाते हुए आगे बढ़ रहा है.

रायलसीमा

Image caption नायडू के समर्थक जोश में

आंध्र प्रदेश के इस हिस्से में आगामी चुनाव में सबसे कड़ा मुकाबला हो सकता है. क्योंकि जगन रेड्डी की पार्टी वाईएसआर कांग्रेस का असल आधार इसी क्षेत्र में है.

राजनीतिक नज़र से इस क्षेत्र की अहमियत इसलिए भी है क्योंकि वर्तमान मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी और तेलुगु देसम के नेता एन चन्द्रबाबू नायडू भी रायलसीमा से ही आते हैं. रायससीमा में विधानसभा की 52 और लोकसभा की आठ सीटें हैं.

इस समय कांग्रेस के पास 22, तेलुगु देसम और वाईएसआर कांग्रेस के पास 15-15 सीटें हैं. लोकसभा की आठ में से 2 सीटें तेलुगु देसम के पास और एक सीट पर वाईएसआर कांग्रेस का कब्ज़ा है. बाकी पांच सीटें कांग्रेस के पास हैं.

ये इलाक़ा आम तौर पर बारिश की कमी के कारण सूखे की चपेट में रहता है. नायडू ने अपनी पदयात्रा दो अक्टूबर को अनंतपुर जिले में हिन्दूपुर से शुरू की. वहीं वाईएसआर कांग्रेस की शर्मिला ने अपनी पदयात्रा 18 अक्टूबर को कडप्पा में अपने पिता की समाधि से शुरू की.

आम विचार यही है की इस क्षेत्र में सबसे शक्तिशाली माने जाने वाला रेड्डी समुदाय कांग्रेस का साथ छोड़ कर वाईएसआर कांग्रेस के साथ जा रहा है. यहां तक कि मुसलमान भी जगन के साथ दिख रहे हैं.

आंध्र

Image caption आंध्र क्षेत्र के किसान अकसर सूखे से जूझते रहते हैं.

नेल्लोर से श्रीकाकुलम तक फैला तटीय आंध्र, राज्य का सबसे संपन्न और शक्तिशाली इलाका है. रायलसीमा की तरह यहाँ भी कांग्रेस को वाईएसआर कांग्रेस से कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ सकता है. क्योंकि कई कांग्रेसी नेता अब जगन के साथ हो लिए हैं.

इस इलाके में लोकसभा की जो 17 सीटें हैं इन में से एक वाईएसआर कांग्रेस ने छीन ली है. लेकिन ये इलाका पारंपरिक रूप से तेलुगु देसम का गढ़ रहा है और साल 2009 के विधान सभा चुनाव में भी उसने कांग्रेस को अच्छी टक्कर दी थी.

119 विधान सभा सीटों में से 30 सीटें तेलुगु देसम को मिलीं थी. इस समय कांग्रेस के पास 87 सीटें हैं जब की वाईएसआर कांग्रेस के पास दो सीटे हैं.

ये तो तय है कि अगली चुनावी लड़ाई त्रिकोणीय ही होगी.

पिछले लोकसभा चुनावों में 17 में से केवल दो ही सीटें तेलुगु देसम को मिली थीं, बाक़ी कांग्रेस की झोली में गई थीं.

और अंत में आंध्र प्रदेश कांग्रेस के लिए बहुत महत्वपूर्ण राज्य है. साल 2009 में यहीं पर उसे सबसे ज्यादा 33 लोक सभा सीटें मिली थीं और उसी के कारण वो केंद्र में सत्ता में लौट सकी थी. अगर वो अबकी बार उसे दोहरा नहीं पाती है तो फिर उसके लिए केंद्र में अपनी सत्ता बनाए रखना नामुमकिन नहीं तो कम से कम मुश्किल ज़रूर होगा.

तेलंगाना

Image caption तेलंगाना दोनों के लिए एक कड़ी चुनौती है.

ये क्षेत्र सियासी लिहाज़ से सबसे अधिक संवेदनशील है. अलग राज्य की मांग को लेकर इसपर सभी पार्टियों की निगाह भी है. हैदराबाद सहित दस जिलों पर आधारित इस क्षेत्र में जो दल अपना कब्ज़ा जमाएगा वही राज्य में सरकार बना पाएगा.

चंद्रबाबू नायडू और शर्मिला दोनों ही की पदयात्राएं इस समय तेलंगाना में हैं. इन दोनों नेताओं और उनकी पार्टियों को एक जैसी चुनौती का सामना है. क्योंकि दोनों ने ही अब तक तेलंगाना राज्य की मांग पर अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है.

यहां तेलंगाना राष्ट्र समिति यानि टीआरएस को सबसे शक्तिशाली पार्टी माना जाता है और अगले चुनाव में उसी की भूमिका निर्णायक होगी.

आम विचार ये भी है कि आखिरी क्षण में कांग्रेस तेलंगाना राज्य की घोषणा कर के या तो टीआरएस का अपने साथ विलय करवा लेगी या उसके साथ चुनावी गठबंधन करेगी.

उस सूरत में चुनाव में कांग्रेस का पलड़ा भारी हो सकता है. वरना यहाँ भी उसकी स्थिति नाज़ुक ही होगी. यहां विधानसभा की 119 और लोकसभा की 17 सीटें हैं.

साल 2009 के लोकसभा चुनाव में इस क्षेत्र में कांग्रेस को 12, तेलुगु देसम को दो, टीआरएस को दो और मजलिस-इ-इत्तेहादुल मुस्लिमीन को एक सीट मिली थी.

विधानसभा की 119 सीटों में से इस समय 17 सीटें टीआरएस के पास, सात मजलिस और तीन बीजेपी के पास हैं जबकि 51 सीटें कांग्रेस और 33 सीटें तेलुगु देसम के पास हैं.

बाक़ी सीटें वामदलों और स्वतंत्र उम्मीदवारों के पास हैं. वाईएसआर कांग्रेस अब तक यहाँ खाता नहीं खोल सकी है.

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