वॉलमार्ट मामले की जांच कराएगी सरकार

 मंगलवार, 11 दिसंबर, 2012 को 17:54 IST तक के समाचार
सोनिया गांधी

संसद में विपक्षी सांसदों की मांग पर केंद्र सरकार ने जांच का भरोसा दिया है

सरकार ने विपक्ष की मांग के आगे झुकते हुए वॉलमार्ट द्वारा लॉबिंग मामले पर 125 करोड़ रुपये खर्च करने की जांच कराने का वादा किया है.

इससे पहले आज दूसरे दिन भी संसद में वॉलमार्ट द्वारा लॉबिंग पर पैसे खर्च करने का मामला छाया रहा.

राज्यसभा में इस मुद्दे पर बोलते हुए बीजेपी के नेता यशवंत सिन्हा ने सरकार से पूछा कि आख़िर, 'वॉलमार्ट का पैसा किसने खाया और कितना खाया'.

विपक्ष मीडिया में छपी उन खबरों पर सरकार से सफाई मांग रहा था जिनके अनुसार वॉलमार्ट ने भारतीय बाज़ार में प्रवेश पाने के लिए मोटी रकम लॉबी करने पर ख़र्च की है.

सरकार ने विपक्ष की बात मानी और कहा कि इसकी जांच होगी. कांग्रेस के कमलनाथ ने कहा, "हमें इस पर जांच बिठाने में कोई हिचकिचाहट नहीं है".

डिस्कलोज़र रिपोर्ट

वॉलमार्ट ने अमरीकी सीनेट में 'लॉबिंग डिसक्लोज़र रिपोर्ट' दाख़िल की है.

इस रिपोर्ट में कंपनी ने कहा है कि उसने साल 2008 से लेकर अब तक लॉबिंग के लिए 125 करोड़ रुपए ख़र्च किए हैं.

कंपनी की रिपोर्ट के मुताबिक इनमे भारतीय बाज़ार में प्रवेश करने के लिए, लॉबिंग पर खर्च की गई राशि भी शामिल है.

"देखिए भारत में रिलायंस जैसी खुदरा सामान की बड़ी कम्पनियां हैं जिनका वॉलमार्ट के आने से नुकसान हो सकता है. विपक्ष के कुछ नेता उनके कहने पर भी संसद में हंगामा कर सकते हैं, यह राजनीति है."

विदेशों में लॉबिंग करने वाले भारतीय कंपनी के अध्यक्ष

अमरीकी प्रशासन की एक प्रवक्ता विक्टोरिया नूलैंड ने एक बयान में कहा है कि वॉलमार्ट ने 'ज़ाहिरी तौर पर अमरीकी कानून का उलंघन नहीं किया है. लेकिन कंपनी भारत समेत चीन और मेक्सिको में रिश्वत के आरोपों की अंदरूनी जांच कर रही है.

विपक्ष के सवाल

भारत में विपक्ष यह जानना चाहता है कि वालमार्ट ने 125 करोड़ रूपये किस काम पर खर्च किए और किन लोगों को पैसे खिलाये गए?

अफ्रीकी देशों में सरकार से लॉबिंग करने वाली एक भारतीय कंपनी के अध्यक्ष ने अपने और अपनी कंपनी का नाम न ज़ाहिर करने की शर्त पर लॉबिंग पर पैसे किस तरह और क्यों खर्च होते हैं इस बारे में जानकारी दी.

उन्होंने बताया, "अगर कोई कंपनी किसी देश में एक बड़ा प्रोजेक्ट लेकर प्रवेश करती है तो इसकी तैयारी काफी पहले से की जाती है. इसमें उस देश की सरकार से लॉबी करनी पड़ती है, जिसमें सरकार के लोगों को पैसे भी खिलाने पड़ते हैं. ये बिलकुल आम बात है हम ये अफ्रीका में भी करते हैं."

कंपनी के अध्यक्ष के अनुसार उन्हें यह नहीं पता कि वॉलमार्ट ने भारत में कितने पैसे कहां और कैसे खर्च किए लेकिन अगर कंपनी ने ये पैसे रिश्वत देने में खर्च किए तो इसमें हैरानी की बात नहीं है.

उनका यह मानना था कि विपक्ष को आमतौर पर पैसे नहीं खिलाए जाते. हमारा फोकस सरकार में असर रखने वालों पर होता है.

केंद्र सरकार

वॉलमार्ट मुद्दे पर सभी विपक्षी दल सरकार को घेरने की कोशिश में लगे हैं

इस व्यक्ति के अनुसार संसद में विपक्ष का विरोध भी कई कारणों से हो सकता है, "देखिए भारत में रिलायंस जैसी खुदरा सामान की बड़ी कम्पनियां हैं जिनका वॉलमार्ट के आने से नुकसान हो सकता है. विपक्ष के कुछ नेता उनके कहने पर भी संसद में हंगामा कर सकते हैं, यह राजनीति है."

भारतीय संसद ने अभी पिछले हफ्ते ही काफी गरमा-गरम बहस के बाद खुदरा व्यापर में विदेशी निवेश के प्रवेश पर एक बिल पास किया है.

वालमार्ट भारत में प्रवेश के लिए कई सालों से लॉबी कर रहा है और विशेषज्ञ को लगता है कि वॉलमार्ट को साल 2014 तक भारत में प्रवेश करने में सफलता मिल सकती है.

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