मोदी मॉडल के विकास के दो चेहरे

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी
Image caption नरेंद्र मोदी का दावा है कि उनके विकास के रास्ते पर हर गुजराती बराबर रफ़्तार से चल रहा है.

गुजरात में गुरुवार को पहले चरण में 87 सीटों पर मत डाले जा रहे हैं. राज्य के 1.81 करोड़ मतदाता 846 उम्मीदवारों के भाग्य का फ़ैसला करेंगे. इस चरण में सौराष्ट्र के सात ज़िलों के 48 विधानसभा क्षेत्रों, दक्षिणी गुजरात के पाँच ज़िलों की 35 सीटों और अहमदाबाद ज़िले के चार विधानसभा क्षेत्रों में मत डाले जाएँगे.

वैसे गुजरात में जहाँ भी, जब भी गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी का ज़िक्र आता है तो दंगों की चर्चा साथ में छिड़ जाती है.

नरेन्द्र मोदी का दावा है गुजरात बदल गया है, यहाँ दस सालों से कोई दंगा नहीं हुआ. उनके बनाए विकास के रास्ते पर हर गुजराती बराबर रफ़्तार से चल रहा है.

लेकिन क्या वाकई ऐसा है? कैसे देखते हैं इस राह पर चल रहे दो गुजराती-- एक हिंदू और एक मुसलमान.

'बच के चलो, बच के चलो'

Image caption एक गुजराती मुसलमान का कहना था कि आम मुसलमान सरकार से डरता है, वो ज़्यादा मांग-वांग करके लाईट में नहीं आना चाहता.

खान अहमदाबाद में टैक्सी चलते हैं. वैसे इन्हें टैक्सी से या सड़कों से कोई मोहब्बत हो ऐसा नहीं है. लेकिन वो कहते हैं कि कितना भी पैसा लेकर दुकान लेने अच्छी जगह जाऊंगा तो यह कह कर मना कर देंगे कि "भाई तुम एम क्लास हो".

एम क्लास यानी मुस्लिम क्लास. ख़ान की उम्र 30 साल है. वो अपना नाम हमें नहीं बताना चाहते, इसलिए उन्हें बेनाम खान ही कह कर बुलाएंगे. आर्थिक रूप से वो और उनका परिवार ठीक-ठाक कर रहे हैं.

बेनाम कहते हैं कि ऐसा नहीं कि मुसलमानों को “एम क्लास” 2002 के दंगों के बाद बोला जाना शुरू हुआ हो. लेकिन वो कहते हैं कि “कौमवाद का लफड़ा वर्ष 2002 से बहुत बढ़ गया”.

नरेन्द्र मोदी का नाम लेते ही बेनाम खान भड़क नहीं उठते. वो एक समझदार आदमी की तरह बात करते हैं कि “सरकार से दूर रहो बस”. उन्हें भाजपा से नफ़रत नहीं है और कॉंग्रेस से कोई बड़ी उम्मीद नहीं है.

शहर में “एच-एम (हिंदू-मुस्लिम) के चक्कर” का उदाहरण देते हुए वे कहते हैं कि वो शहर की एक मुस्लिम बहुल बस्ती में रहते हैं जो शहर के बीचो-बीच है. इस बस्ती के बीच से घरों को रसोई गैस सप्लाई करने की पाइप लाइन गई है. सालों से उनकी बस्ती के लोग मांग कर रहे हैं, पैसे देने के लिए तैयार हैं, लेकिन उनके यहाँ कोई कनेक्शन नहीं दिया जाता.

मोहल्ले के बीच से एक बड़ी चौड़ी सड़क गुजरती है जिस पर तेज़ चलती गाड़ियों के कारण कई एक्सीडेंट हो चुके हैं लेकिन सालों से कोई स्पीड ब्रेकर नहीं बना है.

इलाके का स्थानीय पार्षद जो कि खुद एक मुसलमान है वो खान के अनुसार “पैसे के चक्कर में रहता है”. वे कहते हैं, "आम मुसलमान सरकार से डरता है, वो ज़्यादा मांग-वांग करके लाइट में नहीं आना चाहता.”

वो अपने एक दोस्त का किस्सा सुनाते हैं जो कि किसी बड़ी दुकान में काम करता था. दुकान मालिक हिंदू था और उसके किसी घोटाले के चलते दुकान बंद हो गई.

कंपनी में काम करने वाले सभी हिन्दू लड़कों की नौकरी लग गई. रह गया तो बस बेनाम खान का मुसलमान दोस्त. दुकान के पुराने मैनेजर ने सबकी नई नौकरी दिलाने में मदद की लेकिन जब उनके दोस्त ने मदद मांगी तो उसने लाचारी जता दी और मुँह पर कहा “भाई अब तुमने मुसलमान के घर में जनम लिया है तो इसमें किसी की क्या गलती है?”

'मोदी के सिवा है कौन?'

Image caption गुजरात के तथाकथित विकास में भागीदारी न होने के बावजूद वहां के कई हिंदूओं को नरेंद्र मोदी के अलावा कोई विकल्प नहीं दिखता.

जयू भाई पटेल 64 साल के हैं और सुरेन्द्र नगर ज़िले के चोटिला तल्लुक्का में ऑटो रिक्शा चलाते हैं. इस पकी उम्र में सड़क पर सुबह से शाम तक ऑटो चलाने वाले जयू भाई की ज़िन्दगी कोई फूलों का झूला झूलते सपनों की सड़क से नहीं चलती आई है.

जयू भाई अपने ऑटो के पीछे लदे, सुस्ताते सवारियों का इंतज़ार करते हुए बताते हैं कि उन्होंने पहले 15 साल खेती की. परिवार बड़ा था, खेती से गुज़ारा होता नहीं था तो ट्रक चलाने लगे. पूरे 22 साल ट्रक चलाया.

जयू भाई कहते हैं कि इस बीच “बच्चा ना होने की वजह से पत्नी का दिमागी संतुलन चला गया और उन्हें घर वापस आना पड़ा.” रोज़ी- रोटी के सवाल से जूझ रहे जयू भाई ने साइकिल सुधारने की दुकान खोल ली जो छह साल चलाई.

ज़िन्दगी की गाड़ी पटरी पर आई ही थी कि फिर किस्मत ने नया पत्ता फेंका और जयू भाई के पांच छोटे भाइयों से एक बेरोज़गार हो गया. जयू भाई उसे दुकान सौंप कर अलग हो गए क्योंकि ना गांव में दो दुकानों के लायक काम था ना दुकान से आमदनी इतनी थी कि दो परिवार चलें.

जयू भी हिम्तती आदमी हैं इसलिए बुढ़ापे में ऑटो रिक्शा थाम लिया. अब बस वही उनकी रोज़ी रोटी का सहारा है.

जयू भाई की गुजरात की दौलत में भागीदारी भले ज़्यादा ना हो लेकिन गुजरात की राजनीति में उनकी पूरी हिस्सेदारी है.

राजनीति की बात करो तो पलट के एक बात कहते हैं, “मोदी के सिवाय है कौन?”

नरेंद्र मोदी के प्रति दीवानगी ऐसी कि दक्षिण भारत के रजनीकांत के फैन भी उनसे सबक लें. मोदी के अलावा वह किसी और की बात सुनने के लिए भी तैयार नहीं.

क्यों? मोदी ने क्या दिया? क्या ऐसा किया?

जयू भाई उत्तर देते हैं, “जिस रोड पर आप चल रहे हो, वह मोदी भाई की देन है. यहां बिजली 24 घंटे आती है. आप बताइए मोदी के अलावा भाजपा या कॉंग्रेस में दुनिया किसका नाम जानती है? मोदी एक ऐसा इंसान है, जिसे गुजरात का बच्चा-बच्चा जानता है. यहाँ तक की मेरी बीबी भी, जिसका दिमागी संतुलन ठीक नहीं."

राज्य में पटेलों के कद्दावर नेता केशुभाई पटेल, जयू भाई को अच्छे लगते हैं लेकिन वोट वो मोदी को ही देंगे.

जयू भाई और उनके पूरे परिवार को लगता है की मोदी मुख्यमंत्री नहीं होते तो वे लोग अपना-अपना काम करने की सोच भी नहीं सकते थे.

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