पदोन्नति में आरक्षण बिल राज्य सभा में पारित

Image caption राज्यसभा में अल्पमत में है यूपीए सरकार

सरकारी नौकरियों में पदोन्नति में आरक्षण संबंधी संविधान संशोधन विधेयक आज राज्य सभा में भारी बहुमत से पारित हो गया. अब इसे मंजूरी के लिए लोक सभा में भेजा जाएगा.

सोमवार को विधेयक पर हुए मतदान में इसके पक्ष में 184 मत पड़े जबकि इसके विरोध में सिर्फ 8 सदस्यों ने मतदान किया.

समाजवादी पार्टी और शिवसेना पहले ही घोषणा कर चुकी थीं कि वे इस विधेयक का विरोध करेंगी. लेकिन बीजेपी और कांग्रेस दोनों पार्टियों ने इसके समर्थन में ह्विप जारी कर रखा था.

वहीं बसपा नेता मायावती भी इस विधेयक को पारित करवाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए थीं. ऐसे में सरकारी नौकरियों में पदोन्नति में आरक्षण सुनिश्चित कराने वाले इस 117वें सविंधान संशोधन विधेयक का राज्य सभा से पारित होना पहले से ही तय माना जा रहा था.

विरोध

इससे पहले यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन दे रही बहुजन समाज पार्टी तो इस बिल के समर्थन में थी लेकिन समाजवादी पार्टी इसके विरोध का झंडा बुलंद किए हुए थी.

सरकार और सपा के बीच बढ़ता तनाव उस वक्त नज़र आया था जब पार्टी की ओर से आरोप लगाया गया कि सीबीआई के माध्यम से सरकार, मुलायम सिंह यादव पर इस बिल के समर्थन के लिए दबाव बना रही है.

वहीं कांग्रेस ने इस आरोप को नकारते हुए कहा है कि सीबीआई एक स्वतंत्र संस्था है और सरकार इसके कामकाज में दखल नहीं देती.

इससे पहले समाजवादी प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने धमकी दी थी कि अगर ये बिल पास होता है तो वो सरकार से समर्थन वापस ले लेंगे.

वहीं भारतीय जनता पार्टी का कहना है कि समाजवादी पार्टी इस बिल का विरोध केवल एक राजनैतिक दिखावे की तरह कर रही है.

भाजपा प्रवक्ता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, “सपा और बसपा दोनों कांग्रेस के साथ हैं. कई मौकों पर बसपा और सपा ने कांग्रेस सरकार को बचाया है. मुलायम सिंह की धमकी सिर्फ राजनीतिक दिखावा है.”

वहीं कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी ने कहा कि सरकार इस बिल के पास होने पर आश्वस्त है, “काफी सोच विचार के साथ हम इस बिल के लिए प्रतिबद्ध हैं. इस बिल को हम संसद में लाए हैं और उम्मीद है कि ये बिल पास हो जाएगा.”

समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी जैसे दो प्रमुख सहयोगियों द्वारा परसपर विरोधी रुख अपनाए जाने के बाद संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की परेशानियां बढ़ गई हैं.

गौरतलब है कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के पास राज्यसभा में बहुमत नहीं है और इस बिल को पास करवाने के लिए दो तिहाई बहुमत की ज़रुरत है.

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