महिलाओं की बदतर स्थिति का आईना है दिल्ली

Image caption नई दिल्ली में सुरक्षित नहीं है महिलाएं

दिल्ली में एक चलती बस में 23 साल की लड़की के साथ गैंगरेप होता है. वह भी उनके मित्र की आंखों के सामने. इसके बाद लड़की और उनके मित्र को मारा-पीटा जाता है और दिल्ली के एक्सप्रेस वे पर बुरी तरह ज़ख्मी हालत में फेंक दिया जाता है.

एक और दिन..एक और लड़की के साथ बलात्कार..और उस पर मचा कोहराम...इस साल दिल्ली में अब तक 630 से ज़्यादा बलात्कार के मामले सामने आ चुके हैं..महिलाओं की सूरत में कही कोई बदलाव नहीं दिखता..वे असुरक्षित और असहाय दिखती हैं.

पीड़ित लड़की चिकित्सा विज्ञान की छात्रा है..बलात्कार के बाद उसे जीवन रक्षक उपकरणों पर रखा गया है. उसका इलाज कर रहे डॉक्टर हैरत में हैं क्योंकि उन्होंने इससे पहले बलात्कार के किसी पीड़ित को इतनी गंभीर हालत में नहीं देखा.

एक चिकित्सक के मुताबिक, “यह बलात्कार भर नहीं है..लड़की को काफी गंभीर चोट है..हमलावरों ने उस पर रॉड जैसी कुंद हथियार से लगातार हमला किया है..उसके पेट में गंभीर चोटें है..आंते अपनी जगह पर नहीं हैं और उसका हैमरेज भी हुआ है.”

'रेप कैपिटल' बन चुकी नई दिल्ली, जो महिलाओं पर होने वाले अपराध के मामलों पर ज्यादा ध्यान नहीं देता, वहां रविवार रात को हुई ये घटना बेहद क्रूर है.

पुरुषवादी मानसिकता है वजह

दिल्ली में महिलाओं के साथ अभद्रता और अपमान की घटनाएं कोई नई बात नहीं है. पुरुष प्रधान समाज की मानसिकता, राजनीतिक ताकत से बेशर्म होती संस्कृति, कानून को ठेंगे पर रखने की मानसिकता, संवेदनाशून्य पुलिस बल तथा जमीन से उखड़े और कानून से बेखौफ प्रवासी लोगों की बढ़ती आबादी इन घटनाओं की वजहों में शामिल हैं. इससे अलग भी ढेरों कारण हैं.

अगर आप महिला हैं..और आप बहुत अमीर और सुविधा संपन्न नहीं हैं तो तो आपको अपमान और तिरस्कार को झेलते हुए रहना होगा.

दुनिया के जिस कोने में मैं रह रहा हूं, काम कर रहा हूं वहां इस तरह की बलात्कार की घटनाओं के पीछे लोग कई तरह के कारण गिनाते हैं, मसलन पोर्नोग्राफी, मसालेदार नूडल्स और पश्चिमी पोशक पहनने और पुरुष मित्रों के साथ घुमने वाली महिलाएं.

जब कोई हादसा सुर्खियों में आता है, आक्रोश नजर आता है, टीवी पर गर्मागर्म बहस देखने को मिलती है, मोमबत्तियों के साथ जुलूस निकलता है, अधिकारियों और राजनेताओं के वादे मिलकर पारिवारिक माहौल बना देते हैं.

Image caption घर में भी सुरक्षा की गारंटी नहीं

लेकिन दिल्ली की महिलाओं के लिए हालात नहीं बदलते. मेरी एक महिला मित्र का कहना है, “ऐसा लगता है मानो इस शहर में चुपचाप महिलाओं को डराने के लिए उनके ख़िलाफ़ साजिश रची जा रही हो.” महिला मित्रों के मुताबिक वे कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं, ना घरों में ना ही सड़कों पर. ना तो बस में ना तो मेट्रो में, कहीं भी नहीं.

मीडिया में फोटोग्राफर के तौर पर काम करने वाली मेरी एक मित्र ने अपनी कहानी के माध्यम से दिल्ली में महिलाओं की स्थिति को बताया. उनसे कम सुविधा संपन्न महिलाओं की स्थिति तो निश्चित तौर पर और भी बदतर होगी.

वह कुछ साल पहले दक्षिण दिल्ली के एक उच्च वर्गीय इलाके में पेइंग गेस्ट के तौर रहती थी, तब एक रात नशे में धुत रसोइया उनके कमरे में घुस आया और चादर को कसकर खिंचते हुए उन पर हमला करना चाहा. जब वह चिल्लाने लगी तब वह भाग निकला.

वह याद करते हुए बताती है, “मेरे मकान मालिक निश्चित तौर पर शरीफ़ थे, उन्होंने ऊपर आकर बताया कि मैं निश्चित तौर पर सपना देख रहूंगी क्योंकि कोई हमला नहीं हुआ. लेकिन उनकी मां ने मेरी चीखें सुनीं थीं लिहाजा उन्हें यकीन हुआ. मैंने वह जगह छोड़ दी और उन्होंने मुझसे कहा कि वे रसोइए को निकाल देंगे. मैंने बाद में पता लगाया तो वह रसोइया फिर से वहां काम कर रहा था.”

पुलिस का लापरवाही भरा रवैया

कुछ साल बाद उसने साल्सा डांस सीखने के लिए क्लासेज ज्वाइन किया. एक दिन किसी प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए उनका पुरुष दोस्त उन्हें लेने आया. उस दिन उन्होंने खूबसूरत स्कर्ट पहना था.

वे टैक्सी का इंतज़ार कर रहे थे, तभी एक पुलिस वाला आकर उन्हें परेशान करने लगा. पुलिस वाला ने उनके पुरुष मित्र से कहा, “तुम एक चरित्रहीन महिला के साथ हो. तुम अपने माता-पिता का नंबर दो मैं उन्हें इसकी जानकारी दूंगा.”

जब पुरुष मित्र ने इसका विरोध किया तो पुलिस वाला महिला फोटोग्राफर के मकान मालकिन के पास पहुंच गया और उनसे रिश्वत की मांग करने लगा. पुलिस वाले ने मकान मालकिन को डराते हुए कहा कि आपने संदिग्ध महिला को किराए पर मकान दे रखा वो भी बिना रेंट एग्रीमेंट के.

कुछ साल पहले एक शाम वो काम से अपने घर लौट रही थी तो एक युवा ने उस पर छींटाकशी की. उसने उसे चुप रहने को कहा तब वह लड़का उसका रास्ता रोकते हुए कहा, “अगर तुमने दोबारा ऐसा कुछ कहा तो मैं तुम्हारे चेहरे पर तेज़ाब फेंक दूंगा.” इसके बाद वह गायब हो गया.

Image caption हादसे के बाद धरना प्रदर्शन तो होते हैं, लेकिन हालात नहीं बदलते.

यह भी देखा गया है कि महिला के साथ किसी पुरुष मित्र या पति के होने से भी कोई फर्क नहीं पड़ता.

मेरी एक और महिला मित्र अपने पुरुष साथी के साथ ऑटो रिक्शा से कहीं जा रही थीं, तो पॉश समझने जाने वाले इलाके में कुछ युवाओं ने ऑटो रिक्शा रुकवा दिया और उसके पुरुष मित्र पर पिस्तौल तान दी.

मेरी मित्र ने बताया, “वे लोग मेरे दोस्त को कह रहे थे तुम एक वेश्या के साथ कहीं जा रहे हो. मेरा मित्र ने चुपचाप माफ़ी मांगी तब वे हमारा सबकुछ लूटकर चलते बने.”

मेरी महिला फोटोग्राफर मित्र जब भी दिल्ली में ऑटो रिक्शा से सफ़र कर रही होती तब वह अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ फोन पर बात करते रहने का नाटक भी करती है. वह कभी उस ऑटो रिक्शा पर नहीं बैठती जिसका ड्राइवर कुछ ज्यादा नजदीकी दिखाना चाहता है.

अगर वह टैक्सी करती है तो टैक्सी का नंबर अपने दोस्त को एसएमएस करना नहीं भूलती. उसने कुछ भरोसेमंद टैक्सी वालों के नंबर अपने पास रखे हुए हैं और उनका ही इस्तेमाल करती है.

दिल्ली में लंबे समय से रहने वाला मेरा एक सनकी दोस्त की राय में दिल्ली में महिलाओं की बदतर स्थिति ऐसा आईना है जिसमें आप पूरे शहर को देख सकते हैं.

वह कहता है, “जड़ से उखड़े हुए प्रवासी लोगों की बढ़ती संख्या और अपनी अपनी दुनिया में मगन अमीर और गरीब लोगों के बीच किसी तरह का प्रभावी कार्रवाई का होना मुश्किल है. अप्रभावी पुलिस व्यवस्था और अधूरी न्याय व्यवस्था से स्थिति और बदतर हुई है.”

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