लाशों की चीरफाड़ से है लगाव....

Image caption डॉक्टर भूते बताते हैं कि फोरेंसिक मेडिसिन, मेडिकल के दूसरे क्षेत्रों से बहुत अलग और चुनौतीपूर्ण है

डॉक्टर का ज़िक्र आते ही ज़ेहन में आती हैं दवाईयां, इंजेक्शन, मरहम पट्टी वगैरह लेकिन कुछ डॉक्टर ऐसे भी हैं जिनकी ज़िंदगी में इन चीज़ों के अलावा बहुत कुछ ऐसा है जिसे देख-सुनकर कोई भी हैरान रह जाएगा.

ऐसा ही है फोरेंसिक मेडिसिन का क्षेत्र. फोरेंसिक एक्सपर्ट का नाम तो अक्सर सुनने में आता है, लेकिन मूल रूप से ये क्या होता है इसके बारे में सटीक जानकारी नहीं मिल पाती.

दिल्ली के एक नामचीन मेडिकल कॉलेज में जूनियर रेज़िडेंट डॉक्टर आशीष भूते से मिलकर बीबीसी ने जाना कि ये क्षेत्र है क्या और फोरेंसिक एक्सपर्ट आख़िर काम कैसे करते हैं.

क्या है फोरेंसिक पैथोलॉजी

तकनीकी शब्दों में 'फोरेंसिक पैथोलॉजिस्ट' कहलाने वाले डॉक्टर आशीष बताते हैं कि उनका काम बाक़ी डॉक्टरों से बहुत अलग है. वे कहते हैं कि हम अपनी मेडिकल की जानकारी का इस्तेमाल क़ानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और केस सुलझाने में करते हैं.

अपने काम को जुनून की हद तक पसंद करने वाले आशीष कहते हैं कि फोरेंसिक मेडिसिन का मतलब है चिकित्सीय जानकारी के ज़रिए इंसाफ़ को मुमकिन बनाना. इसमें मुख्य कार्य हैं पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट देना, पहचान बताना, मृत्यु का कारण जानना वगैरह.

वे कहते हैं कि फोरेंसिक साइंस की अपनी एक अलग ही जगह और सम्मान है. फोरेंसिक में मुख्य रूप से गहन अवलोकन पर आधारित कार्य होता हैं जो बहुत ज़्यादा चुनौतीपूर्ण है क्योंकि उसी की बुनियाद पर हम कोई राय बनाते हैं और उससे एक नहीं कई ज़िंदगियां जुड़ी होती हैं.

आशीष बताते हैं कि ये दिमाग को थकाने वाला अनुभव हो सकता है क्योंकि आप मृत शरीरों को घंटों तक देखकर मृत्यु के कारण का पता लगाते हैं ताकि पुलिस अपनी कार्रवाई कर सके और न्यायिक कार्यवाही को आगे बढ़ाई जा सके.

वे कहते हैं कि एक फोरेंसिक पैथोलॉजिस्ट की राय सारा केस बदल कर रख सकती है.

चुनौतियां

डॉक्टर आशीष कहते हैं कि इस काम के लिए मानसिक बल और संतुलन की बहुत ज़्यादा ज़रूरत होती है क्योंकि हमारी एक राय पर कई बार बहुत सारी ज़िंदगियां निर्भर करती हैं.

वे कहते हैं कि कौन दोषी है और कौन नहीं, हम इससे अलग रहकर सिर्फ़ चिकित्सीय जानकारी ही देते हैं. इसके लिए हर समय सतर्क रहना पड़ता है.

एक फोरेंसिक एक्सपर्ट को लगातार क़ानून और पुलिस के साथ दो-चार होना पड़ता है. इसलिए ये एक आम डॉक्टर के पेशे से बहुत अलग और उससे कुछ ज्यादा की मांग करता है.

डॉक्टर आशीष कहते हैं कि पढ़ाई करके डॉक्टर तो बना जा सकता है, लेकिन किसी क्षेत्र में सफल रहने के लिए ज़रूरी है कि आपको उससे इतना लगाव हो कि आप जमकर काम कर सकें वरना ये ऐसा क्षेत्र है जहां क़मज़ोर इरादे वाले लोग टिक नहीं पाते.

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