क्यों नहीं चाहते कुछ लोग फाँसी की सज़ा?

 मंगलवार, 25 दिसंबर, 2012 को 04:33 IST तक के समाचार

एक ओर जहां देश भर में दिल्ली में बलात्कार की शिकार लड़की के समर्थन में प्रदर्शन हो रहे हैं और दोषियों को फांसी की सज़ा देने की मांग हो रही है, वहीं बहुत से ऐसे लोग भी हैं जो दोषियों को फांसी की सज़ा दिए जाने के खिलाफ हैं.

दिल्ली के कई महिला अधिकार संगठनों और प्रगतिशील संगठनों ने एक बयान जारी कर बलात्कार के दोषियों को फांसी की सज़ा न देने की अपील की है.

इन संगठनों का कहना है कि फांसी की सज़ा अपराध रोकने का कोई तरीका नहीं है और यदि इस अपराध के लिए फांसी की सज़ा दी जाती है तो इसके दुरुपयोग की भी आशंका है.

कई तर्क

फांसी की सज़ा क्यों न दी जाए, इस बारे में इन संगठनों ने कई तर्क दिए हैं.

इनके मुताबिक हर व्यक्ति को जीने का अधिकार है. कानून के तहत सज़ा पाए व्यक्ति को फाँसी पर लटका देने से महिलाओं के खिलाफ होने वाले अत्याचार संबंधी सामाजिक-राजनीतिक वजहों को नहीं बदल सकता है. इसे रोकने के लिए व्यवस्था में बड़े बदलाव की जरूरत है.

संगठनों के मुताबिक ऐसा कोई प्रमाण नहीं है जिससे ये पता चले कि मौत की सज़ा दे देने से बलात्कार पर रोक लग जाती है या फिर बलात्कार करने वालों में खौफ पैदा हो जाता है.

इनका कहना है कि जहां तक भारत का सवाल है उन अपराधों की समीक्षा बेहद जरूरी है जिनमें मृत्यु दंड दिया जाता है.

बदतर जीवन

बलात्कारियों को मौत की सज़ा पर एक तर्क और दिया जाता है कि बलात्कार से पीड़ित महिला को मौत से भी ज्यादा बुरा जीवन गुजारना पड़ता है. दरअसल बलात्कार किसी महिला को ऐसी सज़ा होती है, जिससे कड़ी सज़ा उसके लिए हो ही नहीं सकती.

इनके मुताबिक अक्सर राज्य किसी के मारने के अधिकार को अपने पास रखता है, चाहे ये सैनिक सरकारें हों, संसदीय हों या फिर पुलिस.

बलात्कार की घटनाओं के खिलाफ गुस्सा सड़क पर उतर रहा है

संगठनों के अनुसार, पुलिस कस्टडी या फिर सैनिकों द्वारा तमाम स्थानीय महिलाओं के साथ समय-समय पर होने वाले यौन उत्पीड़न को भुलाया नहीं जा सकता, चाहे ये घटनाएं कश्मीर की हों या फिर उत्तर-पूर्व के राज्यों की.

यौन उत्पीड़न और बलात्कार की निंदा करते हुए इन संगठनों ने कहा है कि राज्य को ज्यादा शक्ति देने का मतलब ये नहीं है कि इससे अपराध नियंत्रित हो जाएगा. बल्कि यौन उत्पीड़न के मामलों में अदालती प्रक्रिया जितनी कठिन है, उस स्थिति में यदि किसी को मृत्यु दंड दे दिया जाता है तो फिर उसकी अगली अपील बेहद मुश्किल होगी.

हर हाल में सुरक्षा

इन संगठनों की मांग है कि महिलाओं के सम्मान और उनकी सुरक्षा की हर हाल में रक्षा होनी चाहिए.

किसी भी तरह के उत्पीड़न के मामलों में उन्हें तत्काल कानूनी, चिकित्सकीय और मनोवैज्ञानिक मदद मिलनी चाहिए.

इनका कहना है कि शहरों में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शहरों की आधारभूत संरचना में और ज्यादा विकास की जरूरत है.

यौन उत्पीड़न से जुड़े मुकदमों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक अदालतें होनी चाहिएं जहां जल्द से जल्द सुनवाई हो और अपराधी को सज़ा मिले.

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