क्या मोदी का 'एनडीए' बनाएगा उन्हें पीएम?

सुषमा स्वराज और जयललिता के साथ नरेन्द्र मोदी
Image caption भाजपा के सामने एनडीए की टीम को मज़बूत करने की चुनौती है

गुजरात में नरेंद्र मोदी ने अपने चौथे शपथ ग्रहण समारोह में बिहार के नितिश कुमार और उड़ीसा के नवीन पटनायक को छोड़ कर देश के कई प्रमुख गैर-कांग्रेसी नेताओं और भाजपा के जाने-माने नेताओं की मौजूदगी के साथ बड़ा शक्ति प्रदर्शन किया है.

राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार उन्होंने एक तरह से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की नई तस्वीर पेश करते हुए अपनी मंशा साफ़ कर दी है.

जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले रहे थे तब उनके पीछा राजनीति और फिल्म जगत की कई बड़ी हस्तियाँ मंच पर बैठीं थीं.

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री और अन्ना द्रमुक सुप्रीमो जे जयललिता, पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, इंडियन नेशनल लोक दल के अध्यक्ष और हरियाणा में विपक्षी नेता ओमप्रकाश चौटाला, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे, आरपीआई के अध्यक्ष रामदास अठावले मौजूद थे.

शक्ति प्रदर्शन

मंच पर भारतीय जनता पार्टी की लगभग पूरी राष्ट्रीय कार्यकारिणी मौजूद थी. भाजपा शासित राज्यों के तमाम मुख्यमंत्री, राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित सभी प्रदेशाध्यक्ष और कई फ़िल्मी सितारे हाज़िर थे.

अहमदाबाद में हिन्दुस्तान टाइम्स के संवाददाता महेश लांगा का कहना है "ऐसी सूचना है कि नरेंद्र मोदी ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में नए एनडीऐ की नई तस्वीर पेश करने की पूरी कोशिश की थी. उन्होंने बीजू जनता दल के अध्यक्ष और उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को भी आमंत्रित किया था. बाद में बताया गया कि वे अपनी पार्टी के स्थापना दिवस से जुड़े कार्यक्रमों के चलते नहीं आ पाए."

महेश लांगा का कहना है कि बिहार के मुख्यमंत्री नितिश कुमार को छोड़ कर सभी एनडीऐ घटक दलों को आमंत्रित किया गया था.

वैसे बिहार के मुख्यमंत्री नितिश कुमार पहले ही कह चुके हैं कि वो नरेंद्र मोदी से कोई लेन-देन नहीं रखना चाहते.

'राह आसान नहीं'

लांगा का यह भी कहना है कि मोदी की तरफ से राष्ट्रवादी कॉंग्रेस पार्टी के साथ भी संपर्क साधा गया था और कोशिश की गई थी कि शरद पवार नहीं तो उनकी पार्टी का कोई और बड़ा नेता तो शामिल हो ही जाए.

ओपन पत्रिका के राजनीतिक संपादक हरतोष सिंह बल का कहना है, "चाहे शिरोमणि अकाली दल के बादल हों या तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता, वहां मौजूद नेताओं में कोइ भी ऐसा नहीं था जिसे जीतने के लिए मुसलमानों के वोटों की ज़रुरत होती हो. लेकिन अकेले इन लोगों के सहारे सरकार बनाना असंभव है."

बल का कहना है कि अगर केवल भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का भीतरी विरोध मोदी के प्रधानमन्त्री पद के दावे के आड़े आ रहा होता तो मोदी उसे आसानी से पार कर लेते लेकिन ऐसा कतई नहीं है.

बल कहते हैं अगर शपथ ग्रहण में नीतिश कुमार या कोई ऐसा नेता शामिल होता जो अल्पसंख्यकों या मुसलमानों के वोट लेता है तो समझ में आता कि मोदी के लिए स्वीकार्यता का दायरा बढ़ा है.