तीन पुलिसवालों पर आपराधिक मामला दर्ज

  • 29 दिसंबर 2012
Rape victim
Image caption पुलिस की बेरुखी से आत्महत्या को मजबूर हुई लड़की

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने पटियाला में एक नाबालिग लड़की के साथ हुए सामूहिक बलात्कार के मामले में शुक्रवार को पंजाब पुलिस को फटकार लगाते हुए आठ जनवरी तक स्थिति रिपोर्ट पेश करने को कहा है.

न्यायालय ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए पटियाला संभाग के पुलिस महानिरीक्षक को नोटिस जारी कर मामले की स्थिति रिपार्ट सौंपने देने को कहा है. न्यायालय ने आईजीपी को आदेश दिया कि पुलिस कार्रवाई में देरी के कारणों और जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ की गई कार्रवाई के बारे में आठ जनवरी को अपनी रिपोर्ट पेश करें.

गौरतलब है कि 17 वर्षीय लड़की को गत 13 नवंबर को दीवाली के दिन पटियाला के करीब एक गांव से उठाया गया था और उसके साथ दो लोगों ने सामूहिक बलात्कार किया था. आरोपियों ने लड़की को बेहोशी की हालत में उसके गांव के पास छोड़ा. पुलिस ने घटना के 14 दिन बाद जाकर प्राथमिकी दर्ज की.

लेकिन लगभग डेढ़ महीना बीत जाने के बावजूद पुलिस ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की और आरोपी बेखौफ आजाद घूमते रहे. पुलिस उत्पीडन और आरोपियों द्वारा लगातार मिल रही धमकियों से तंग आकर पीड़िता ने बुधवार को पटियाला के करीब सामना गांव में जहर पीकर आत्महत्या कर ली थी. अपने सूसाइड नोट में उसने तीन लोगों और एक महिला पर आरोप लगाया है कि उन्होंने उसकी जिंदगी बर्बाद की.

लड़की के आत्महत्या के बाद जागी पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक एसएचओ और दो अन्य को बर्खास्त कर दिया. पटियाला के आईजीपी पी एस गिल ने स्वीकार किया कि एसएचओ ने न केवल मामला दर्ज करने में देर की बल्कि अपने वरिष्ठ अधिकारियों को भी इसकी जानकारी भी नहीं दी. गुरुवार को आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया गया.

इस बीच पंजाब के पुलिस महानिदेशक सुमेध सिंह सैनी ने शुक्रवार को एक संवाददाता सम्मेलन में इस मामले में पुलिस की लापरवाही स्वीकार करते हुए कहा कि दोषियों को किसी भी सूरत में नहीं बख्शा जाएगा. उन्होंने साथ ही बताया कि इस मामले में सच्चाई का पता लगाने के लिए विभागीय जांच के भी आदेश दिए गए हैं.

लड़की के आत्महत्या के बाद जागी पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक एसएचओ को बर्खास्त कर दिया. पटियाला के आईजीपी पी एस गिल ने स्वीकार किया कि एसएचओ ने न केवल मामला दर्ज करने में देर की बल्कि अपने वरिष्ठ अधिकारियों को भी इसकी जानकारी भी नहीं दी.

पंजाब सरकार ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है. अतिरिक्त पुलीस महानेदेशक (अपराध) को समिति का प्रमुख बनाया गया है.

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