पीड़ित परिवार चाहता है बलात्कारियों को फांसी

  • 31 दिसंबर 2012
अंतिम संस्कार से पहले पीड़ित का शव

दिल्ली मे सामूहिक दुष्कर्म की शिकार लड़की के पिता का कहना है कि लड़की की मौत से पूरा परिवार बुरी तरह से सदमें मे हैं और उनके लिए ये क्षण बेहद दर्दनाक है.

समाचार पत्र इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक रविवार तड़के जैसे ही सिंगापुर से इस लड़की का शव विमान से दिल्ली और इसके बाद द्वारका शवदाह गृह पहुंचा, लड़की की माँ कई बार अचेत हो गई.

जैसे ही पीड़िता के शव को उठाया गया कुछ रिश्तेदारों को दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल भागना पड़ा.

अख़बार का कहना है कि डॉक्टरों को सुबह लगभग छह बजे पीड़िता की माँ को सघन चिकित्सा केंद्र (आईसीयू) में भर्ती करना पड़ा.

गहरा सदमा

इसके बाद दिन भर उनकी डॉक्टरी जाँच होती रही. डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें गहरा मनोवैज्ञानिक सदमा लगा है.

Image caption प्रदर्शनों में महिलाएं भी काफ़ी तादाद में शामिल हो रही हैं.

पीड़िता के अंतिम संस्कार के बाद इंडियन ऐक्सप्रेस से लड़की के पिता ने कहा, "पिछले दो हफ्तों से उनकी पत्नी ने खाना पीना छोड़ दिया है. डॉक्टरों के बार बार ये बताने के बावजूद कि उनकी बेटी की हालत बेहद गंभीर है, वो इस सदमे को बर्दाश्त नही कर पा रही है. हम सब सदमे में है."

अपने दर्द को बयान करते हुए उन्होंने आगे कहा, “मैं उसके कमरे के भीतर कभी नही गया, मुझे इस बात पर अब भी भरोसा नही हो रहा है कि अब हम उसकी आवाज़ कभी नही सुन सकेंगे. अब वो मेरे सामने कभी अंग्रेज़ी मे किताब नही पढ़ेगी.”

पूरा परिवार इस कदर सदमें में है कि वो अपनी बेटी की एक फोटो भी नहीं चुन सका.

पिता ये कहते हुए फफक पड़ते हैं कि उसकी तस्वीरों को देखना और ज्यादा दर्दनाक है.

परिवार का कहना है कि अब सारे पड़ोसी बलात्कार के अभियुक्तों की तस्वीरे देख चुके हैं और ये उनके लिए एक और मुसीबत की बात है.

मृतक लड़की के भाई का कहना है कि वो घर से बाहर कदम भी नहीं रख सकते क्योंकि पड़ोसियों के हज़ारों सवालों का जवाब कौन देगा?

नहीं चाहिए वीआईपी

भाई के हवाले से अख़बार ने लिखा है कि वीआईपी लोग लगातार संवेदना जताने के लिए आ रहे हैं और इससे वो थक चुके हैं.

इस परिवार की इच्छा है कि वो कम से कम दस दिनों के लिए पैतृक शहर बलिया चले जाएं ताकि उन्हें इस सब से निजात मिल सके.

लेकिन, उनके पास जाने के लिए कन्फर्म टिकट नही है. पीड़ित का भाई कहता है कि घर के पास पुलिस का जमावड़ा है, वीआईपी आ रहे है. शायद कोई मदद कर दे.

सदमे के बीच परिवार मे आक्रोश है और उसका कहना है कि अभी तो लड़ाई की महज़ शुरुआत भर है. परिवार की मांग है कि सभी अभियुक्तों को फांसी दी जाए और वो न्याय के लिए अंतिम क्षण तक लड़ते रहेंगे.

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