'उसने कहा सॉरी, और फिर आँखें मूँद लीं'

Image caption पीड़िता ने सफदरजंग अस्पताल में होश में आने के बाद कुछ खाने को मांगा था.

दिल्ली सामूहिक बलात्कार मामले की पीड़िता के लिए हादसे के बाद जिंदगी दर्दनाक थी.

अस्पताल में उनकी हालत क्या थी, वो कब होश में आईं और होश में आने के बाद उन्होंने क्या कहा? हमने पीड़िता के पिता से यही जानने की कोशिश की.

उनके पिता का कहना था, "पापा मैंने आप लोगों को बहुत कष्ट दिया है, मुझे माफ़ करना."

ये बताते हुए पीड़िता के पिता काफी भावुक हो जाते हैं और कहते हैं कि इसके बाद वो कुछ नहीं बोली, यही उसके आखिरी शब्द थे.

अस्पताल में जब वो भर्ती थी, उन दिनों के बारे में उनके पिता कहते हैं, “उसने अपनी मां को पकड़कर कई बार सॉरी, सॉरी कहा. इसके बाद उसकी आंख बंद हो गईं.”

उन्होंने कहा, “पहले दो दिनों तक तो बेटी को होश ही नहीं आया. तीसरे दिन उसे होश आया.”

सफदरजंग अस्पताल में तब तक उसके पेट का आपरेशन हो चुका था. इसके बाद उसके लिए खाना संभव नहीं था. लेकिन पीड़िता ने कुछ खाने को मांगा. उसे ज़ोरों की भूख लगी हुई थी.

फिर लड़की ने डॉक्टरों से कुछ खाने को मांगा. पीड़िता के पिता ने बताया, “बेटी ने डॉक्टर से टॉफी मांगा. डॉक्टर ने कहा कि लालीपॉप है ला दूँ तो वो बोली- हाँ.”

मां का आंचल बना सहारा

वह अपनी मां से बातें करती थीं. पल-पल पास आती मौत के बीच वह अपने परिवार का हौसला बढ़ाने की कोशिश करती.

सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों की दिन रात की मेहनत रंग लाने लगी थी. पीड़िता के पिता ने बताया, “काफ़ी कमज़ोर हो गई थी, धीमे-धीमे बात करती थी.”

एक ऐसे ही दिन पीड़िता ने अपनी मां को कसकर पकड़ लिया. अपनी मां के आंचल में वह शायद अपने सारे गम भूल जाना चाहती थी.

वैसे पिता बताते हैं कि बचपन से वह उनके काफ़ी करीब थीं.

पीड़िता के पिता कहते हैं, “जब वो छोटी थी तब जब मैं सोया रहता तो वह आकर मेरी छाती से लिपटकर सो जाती थी.”

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