बलात्कार केस के बाद राज्यों में क्या बदला?

 शुक्रवार, 4 जनवरी, 2013 को 17:21 IST तक के समाचार
बलात्कार

हाल की घटना के बाद मुल्क भर में भारी विरोध प्रदर्शन हुए जो जारी हैं.

दिल्ली में हुए सामूहिक बलात्कार के बाद भारत के कई राज्यों ने महिला सुरक्षा को लेकर सुझाव दिए हैं. तमिलनाडु ने तो बलात्कार के लिए फांसी और रसायन से नपुंसक बनाए जाने की सलाह दी है.

तमिलनाडु

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता ने महिला सुरक्षा को लेकर एक 13-सूत्री कार्यक्रम की घोषणा की है साथ ही केंद्र को भेजे गए एक सुझाव में कहा है कि बलात्कार के दोषियों को मौत की सज़ा हो.

उन्होंने कहा है कि ऐसे अपराधियों को रसायन से नपुंसक बना दिया जाए ताकि वे दुबारा इस तरह के अपराध न कर पाएं.

एक लिखित आदेश में जयललिता ने महिला उत्पीड़न के केस की सुनवाई के लिए राज्य के हर ज़िले में फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन, जांच प्रक्रिया में तेजी लाने, मामलों की जांच महिला अधिकारी द्वारा ही करवाए जाने और मामलों की रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर आ जाने के हुक्म जारी किए हैं.

राज्य में महिलाओं की सुरक्षा के लिए 24 घंटे की हेल्पलाइन शुरू की जा रही है जिसकी देख-रेख वरिष्ठ पुलिस अधिकारी करेंगे.

हरियाणा

दिल्ली से लगे राज्य हरियाणा ने कहा है कि वो बलात्कार के अपराधियों का नाम सरकारी वेबसाइट पर डालेगा.

समाचार पत्र टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने राज्य अपराध रिकार्ड ब्यूरो के निदेशक लायक़ राम डबास के हवाले से कहा है, "हम पिछले 13 सालों में बलात्कार की सज़ा भुगत चुके 2500 दोषियों के नाम, पते और उनके अपराध का विवरण का ब्यौरा वेबसाइट पर डालने की प्रक्रिया में हैं."

इसी तरह की प्रक्रिया छेड़छाड करने वाले, यौन अपराधों, दहेज के मामले और घरेलू हिंसा के अपराधियों के सिलसिले में भी किए जा रहे हैं.

बिहार

समाचार पत्र इंडियन एक्सप्रेस ने राज्य के पुलिस प्रमुख के हवाले से कहा है कि ऐसे सभी मामले सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट में भेजे जाएंगे.

पुलिस प्रमुख अभयानंद ने कहा है कि गृह मंत्रालय को भेजे गए प्रस्ताव में सुझाव दिया गया है कि राज्य सरकार इस तरह की अदालतों को शुरू करने के लिए अपने पैसे लगाए.

बलात्कार

दिल्ली बलात्कार मामले की सुनवाई साकेत की अदालत में होगी.

उन्होंने कहा है कि केंद्र अब इस तरह की अदालतों की स्थापना के लिए फंड नहीं देता है.

हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि पुलिस को इस बात की कोशिश करनी होगी कि गवाह अदालतों में पेश हो सकें और उन्हें डराया या धमकाया न जा सके.

उत्तर प्रदेश

दिल्ली सामूहिक बलात्कार मामले में कथित तौर पर एक किशोर के शामिल होने के मामले को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ये सुझाव देने जा रही है कि बलात्कार के मामले में उन्हीं दोषियों को 'किशोर' की श्रेणी में रखा जाए जो 16 साल से कम के हों.

हुकूमत का मानना है कि बलात्कार के मामलों में कई मुलज़िम इसीलिए बच निकलने में कामयाब हो जाते हैं क्योंकि वो 16 से 18 साल के दरम्यान के होते हैं.

राज्य सरकार ये मांग भी करने जा रही है कि तेज़ाब फेंकने के मामलों को ग़ैर-ज़मानती बनाया जाए.

दिल्ली

राजधानी दिल्ली जहां हाल में सामूहिक बलात्कार और उसके बाद पीड़ित की हुई मौत ने पूरे मुल्क को झकझोर दिया है, राज्य सरकार ने महिलाओं के लिए विशेष हेल्पलाइन शुरू की है.

मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग से कहा है कि सभी सरकारी स्कूलों में लैंगिक संवेदनशीलता को लेकर कोर्स शुरू किया जाए.

साथ ही केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आदेश दिए हैं कि शहर के सभी पुलिस स्टेशनों पर दो महिला सब-इंस्पेक्टर और सात महिला कांस्टेबलों की बहाली की जाएगी.

दिल्ली सामूहिक बलात्कार मामला साकेत फास्ट ट्रैक कोर्ट में दाखिल हुआ है जो इस तरह के मामलों में शहर का पहला फास्ट ट्रैक कोर्ट है. दिल्ली में महिलाओं से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए पांच फास्ट ट्रैक अदालत बनाए गए हैं.

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