गैगरेप मामला: पांच अभियुक्तों की होगी पेशी

 शनिवार, 5 जनवरी, 2013 को 15:41 IST तक के समाचार

दिल्ली की एक अदालत ने उन पांच अभियुक्तों को सोमवार को अदालत में पेश करने को कहा है जो पिछले महीने दिल्ली में एक लड़की के साथ हुए गैंगरेप में शामिल थे.

दिल्ली की साकेत ज़िला अदालत में शनिवार को इस मामले में मुकदमा शुरू होने से पहले की सुनवाई हुई.

मामले का छठा अभियुक्त नाबालिग है इसलिए हो सकता है कि उसके मामले की सुनवाई बाल न्यायालय में हो.

पीड़ित लड़की की पिछले हफ्ते सिंगापुर के एक अस्पताल में मौत हो गई थी.

इस बीच, दिल्ली में हुई एक प्रेस कांफ्रेस में दिल्ली पुलिस इस सवाल का जवाब नहीं दे पाई कि 16 दिसंबर की रात सामूहिक बलात्कार की घटना की बलात्कार पीड़ित को सड़क से उठाकर पुलिस वैन में पुलिसकर्मियों ने रखा था या पीड़ित के दोस्त ने.

सामूहिक बलात्कार का शिकार हुई युवती के मित्र ने टीवी चैनल ज़ी न्यूज से एक इंटरव्यू में शनिवार को कहा था कि पुलिस ख़ून से लथपथ युवती को सड़क से खुद उठाने में हिचकिचा रही थी.

लेकिन जब पत्रकारों ने अतिरिक्त कमिश्नर विवेक गोगिया ने इस बारे में सवाल पूछा तो उन्होंने कहा कि ये बयान लड़के ने किन हालात में दिए इससे मैं वाक़िफ़ नहीं हूं. उनका ये भी कहना था कि इस बात पर चर्चा करने का ये सही फोरम नहीं है.

पीड़िता के दोस्त ने ये भी कहा है कि पुलिस वैन घटनास्थल पर पहुंचने के बाद अधिकार क्षेत्र को लेकर बहस करती रही जिसमें समय बर्बाद हुआ. उन्होंने ये भी कहा था कि पुलिस को उन्हें पास के अस्पताल ले जाना चाहिए था न कि सफदरजंग जो वहां से दूर था.

अस्पतालों की लिस्ट

पुलिस पर निर्वस्त्र लड़की और लड़के को कपड़े न दिए जाने और पीड़ित के मित्र को कई दिनों तक अस्पताल में बिठाए रखने का भी आरोप साक्षात्कार में लगाया गया है.

विवेक गोगिया ने मीडिया से कहा कि पीसीआर वैन का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं होता, साथ ही पुलिस को कुछ अस्पतालों के नाम दिए गए हैं जहां इस तरह के पीड़ितों को ले जाया जा सकता है, और उसने वही किया.

विवेक गोगिया का कहना था कि सफदरजंग में पीड़त के इलाज के लिए दूसरे सरकारी अस्पातलों के चिकित्सक भी आ पाए जो सुविधा मरीज़ को प्राइवेट अस्पताल में भरती किए जाने पर नहीं मिलती.

उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि शरीर को ढकने के लिए पुलिस के पास जो कुछ भी उस समय था उसने दोनों व्यक्तियों को दिया.

दिल्ली पुलिस ने कहा है कि घटना की रात को 10.21 मिनट पर पुलिस के पास कॉल आया था, 10.39 पर उन्हें सफदरगंज की ओर ले जाया और 10.55 पर उन्हें अस्पताल पहुँचा दिया गया.

पुलिस का सिलसिलेवार जवाब

1.आरोप- पुलिस पीसीआर वैनों ने पीड़ित को ले जाने में देरी की और थाने के अधिकारक्षेत्र पर झगड़ा किया

पुलिस का जवाब- पीसीआर वैन को थाने के अधिकारक्षेत्र से कोई मतलब नहीं है. वैन स्थानीय थाने के अधीन काम नहीं करती हैं. पुलिस के पास 10.21 पर कॉल आया, 10.55 पर पीड़ितों को सफरदरजंग पहुँचा दिया गया. उन्हें ढकने के लिए जो कुछ था, पीड़ितों को दिया गया.

2.आरोप-पीड़ित को निजी अस्पताल के बजाए सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया

पुलिस का जवाब- सफदरजंग नामांकित मल्टी स्पेशलिस्ट अस्पताल है, इसलिए पुलिस पीड़ितों को वहाँ ले गई.

3.आरोप- पीड़ित को थाने में चार दिन रखा गया, चिकित्सा नहीं दी गई

पुलिस का जवाब- सफदरजंग में फर्स्ट एड के बाद पुरुष पीड़ित को अस्पताल से छुट्टी मिल गई थी.छानबीन में मदद और बयान दर्ज कराने के लिए पीड़ित को पुलिस थाने बुलाया गया था. पुलिस ने पीड़ित को निजी जगह पर अपने खर्चे पर रखा.

4. आरोप- पुलिस ने वाहवाही लूटने की कोशिश की

पुलिस का जवाब-पुलिस ने वाहवाही हासिल करने की कोशिश नहीं कर रही थी. हमारी नीति कि हम पीड़ित को नियमित रूप से बताया जाता है कि केस में क्या प्रगति हुई है. हम यही कर रहे थे.

इसे भी पढ़ें

टॉपिक

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.