पसीना बहाना ही जिनका पेशा है !

 रविवार, 6 जनवरी, 2013 को 21:07 IST तक के समाचार
नवीन मान

नवीन मान पिछले दस साल से फ़िटनेस ट्रेनर के तौर पर सफलतापूर्वक काम कर रहे हैं

सेहतमंद ज़िंदगी के लिए कसरत करना ज़रूरी है, ये समझना रॉकेट-विज्ञान जैसा कठिन काम तो नहीं है लेकिन ये कितना ज़्यादा ज़रूरी है इसका अहसास फ़िटनेस ट्रेनर नवीन मान से मिलकर कुछ ज़्यादा ही हुआ.

नवीन का पेशा है लोगों को सेहतमंद बनाना. ऐथलेटिक्स में दिलचस्पी उन्हें इस काम में ले आई और अब वो पिछले 10 साल से कसरत कर रहे हैं और दूसरों को भी करवा रहे हैं.

नवीन बताते हैं, ''शुरू से ही खेलने-कूदने में लगा रहता था, ऐथलेटिक्स में ज़्यादा रूचि थी तो जिम का रूख़ करना ही पड़ता था. फिर धीरे-धीरे मैने इसे ही अपना काम बना लिया.''

आम तौर पर कहा जाता है कि अगर आपकी रूचि आपका पेशा बन जाए तो इसे ख़ुशनसीबी समझिए.

लेकिन एक पेशेवर फ़िटनेस ट्रेनर बनने के लिए भी पढ़ाई और ट्रेनिंग होना ज़रूरी है. नवीन बताते हैं कि उन्होंने भी प्रोफ़ेशनल ट्रेनर बनने के लिए दो महीने तक चलने वाला 60 घंटे का गहन प्रशिक्षण लिया है.

ज़रूरी है दीवानगी

फ़िटनेस में कैसे बने करियर

  • सेहत को लेकर जागरूकता बढ़ने से इस क्षेत्र में काम के बेहतर अवसर हैं.
  • बड़े फ़िटनेस संस्थानों से प्रोफ़ेशनल ट्रेनर का कोर्स किया जा सकता है.
  • जिम या निजी ट्रेनर के तौर पर काम की संभावनाएं हैं.
  • प्रशिक्षण के साथ अनुभव होना बेहद ज़रूरी है.
  • किसी बड़ी डिग्री की ज़रूरत नहीं लेकिन लगन और दिलचस्पी बेहद ज़रूरी है.

फ़िटनेस के प्रति दीवानगी जिन लोगों में है, वो अगर चाहें तो इसी में अपना करियर बना सकते हैं.

लेकिन एक बार आपने फ़ैसला किया तो ज़रूरत है उस पर डटे रहने की क्योंकि यह वह क्षेत्र है जिसमें लगातार अपने आपको इस लायक बनाए रखना पड़ता है कि आप दूसरों को सिखा सकें.

नवीन कहते हैं, ''केवल बेहिसाब दिलचस्पी आपको उस स्तर पर ले जा सकती है जहां 10 साल बाद भी आप रोज़ सुबह उठ खड़े हों. ये सिर्फ़ शारीरिक नहीं, मानसिक मज़बूती की भी परीक्षा होती है.''

पढ़ाई और प्रशिक्षण भी ज़रूरी

"सुबह या शाम का वक्त निकालकर अगर 20 मिनट भी दौड़ें तो धीरे-धीरे असर दिखाई देगा. बजाय इतनी देर करने के कि ज़रूरत मजबूरी बन जाए बेहतर है कि अपना ख़्याल रखें वरना सेहत बिगड़ते देर नहीं लगेगी."

नवीन मान, फ़िटनेस ट्रेनर

अब सवाल ये उठता है कि मामला अगर सिर्फ़ कसरत करने का ही है तो क्या किसी तरह की पढ़ाई या प्रशिक्षण लिए बिना भी काम चल सकता है.

इस सवाल के जवाब में नवीन इंकार करते हुए कहते हैं, ''मैं ऐसा नहीं सोचता. आप ज़िंदगी में कुछ भी करें, पढ़ाई तो ज़रूरी है ही. बहुत सारे लोग ऐसा सोचते हैं कि इसके लिए क्या ज़रूरत है कुछ पढ़ने की, लेकिन मेरी समझ से पढ़ाई तो करनी ही होती है. क्या खाना चाहिए? क्यों खाना चाहिए? किस वज़न पर कितने वर्क-आउट की गुंजाइश है और क्यों? इस तरह की सभी बातें तो ट्रेनिंग के दौरान ही सीखी जा सकती हैं.''

भागम-भाग ज़िंदगी के इस दौर में अक्सर लोग कसरत के बारे मे सिर्फ़ सोचते रह जाते हैं मगर कर नहीं पाते. इस समस्या का उपाय सुझाते हुए नवीन कहते हैं कि ज़रूरी नहीं आप रोज़ जिम जाएं.

वे कहते हैं, ''सुबह या शाम का वक्त निकालकर अगर 20 मिनट भी दौड़ें तो धीरे-धीरे असर दिखाई देगा. बजाय इतनी देर करने के कि ज़रूरत मजबूरी बन जाए बेहतर है कि अपना ख़्याल रखें वरना सेहत बिगड़ते देर नहीं लगेगी.''

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