दुनिया में छाएगा भारतीय केला

  • 7 जनवरी 2013
तमिलनाडु, केला
Image caption तमिलनाडु केला उत्पादन में अव्वल है

भारत दुनिया का सबसे बड़ा केला उत्पादक देश है जो अब दुनिया भर के बाजारों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए लालायित है.

भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने चीन, पूर्व एशिया, मध्य पूर्व और यूरोप में भारतीय केले का निर्यात करने की एक महत्वाकांक्षी योजना बनाई है.

ऐसा अनुमान है कि इन केलों के निर्यात से सालाना कुल कारोबार 1.2 अरब डॉलर तक हो सकता है.

दरअसल फ्लोरिडा के संतरे और कैलिफोर्निया के सेब की तर्ज पर ही तमिलनाडु के केले को एक 'ग्लोबल-ब्रांड' बनाने की योजना है.

वैसे स्थानीय उत्पादन को देखते हुए घरेलू मांग को पूरा करना ही मुश्किल दिख रहा है, ऐसे में पूरी परियोजना पर ही सवाल खड़े किए जा रहे हैं.

फसल का नुकसान

सीआईआई को भरोसा है कि इस परियोजना को अमलीजामा पहनाने में 18 महीने का वक्त है, ऐसे में इस परियोजना के सफल होने की राह में कोई बाधा नहीं होनी चाहिए.

सीआईआई में 'नैशनल कोल्ड चेन टास्क फोर्स' के अध्यक्ष बी त्यागराजन का कहना है, ''अगर फसल कटने के बाद होने वाले नुकसान को दूर कर दिया जाए तो 2.8 करोड़ टन केले का निर्यात कोई बड़ी समस्या नहीं हो सकती है.''

ख़राब होने वाले फलों और सब्ज़ियों का फसल कटने के बाद सालाना नुकसान तकरीबन 80,000 करोड़ रूपये है.

भरोसे की कमी

सीआईआई भले ही इस योजना को लेकर ज्यादा उत्साही हो, लेकिन देश में सबसे अधिक केले का उत्पादन करने वाले भारत के दक्षिणी राज्य तमिलनाडु के किसानों में आशंका है और उनमें इस बात का भरोसा नहीं दिखता है कि यह योजना सफल होगी.

उन्हें यह भी डर है कि इस योजना का फायदा किसानों को नहीं मिलेगा.

तमिलनाडु किसान संगठन के सचिव राम गौंडर का कहना है, ''कई देशों में आम के गूदे का निर्यात करते वक्त हमारा अनुभव बेहद ख़राब रहा था और सीआईआई वैसे संकट में हमारा बचाव करने भी नहीं आया.''

उत्पादन में सुधार

सीआईआई का कहना है कि कोल्ड-चेन का बुनियादी ढांचा तैयार करने से फसल कटने के बाद होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है और इसी उपाय से केले का निर्यात एक फायदेमंद कारोबार साबित हो सकता है.

Image caption तमिलनाडु के किसान इस से आशंकित है कि उन्हें इस निर्यात की योजना से फायदा मिलेगा या नहीं

सीआईआई और राष्ट्रीय केला शोध केंद्र (एनबीआरसी) ने तिरुचिरापल्ली में एक शोध किया. शोध में यह बात सामने आई है कि तमिलनाडु में फसल कटने के बाद केले का नुकसान करीब 30 फीसदी है.

एनबीआरसी के एमएम मुस्तफा ने बीबीसी को बताया कि नुकसान को 10 फीसद के स्तर पर लाने की कोशिश की जा रही है जिससे किसानों को फायदा हो सकता है.

उनका कहना है, ''तमिलनाडु के कई हिस्सों में किसानों ने पहले से ही बेहतर गुणवत्ता वाले केले का उत्पादन शुरू कर दिया है और यह एनबीआरसी के शोधकार्य की वजह से ही मुमकिन हुआ है.''

वे कहते हैं, ''तमिलनाडु के किसानों ने इसराइल की यात्रा की है और उत्पादन तथा खेती के बेहतर तरीके सीखे हैं. हम अच्छे केले का उत्पादन कर लेते हैं, लेकिन उन्हें ठीक तरीके से पका नहीं पा रहे हैं. इस परियोजना के जरिए इसी दिक्कत को दूर करना है.''

उनका कहना है, ''एथेलीन गैस के जरिए किसानों को संतुलित तरीके से फलों को पकाने की प्रक्रिया भी सिखाई जा रही है.''

सीआईआई के मुताबिक, भारत का आठ फीसद सकल घरेलू उत्पाद तब तक संभव नहीं हो सकता है जब तक कृषि क्षेत्र की वृद्धि तीन से चार फीसद नहीं होती. अध्ययनों के मुताबिक, बिना आधुनिकीकरण के कृषि क्षेत्र में ऐसी वृद्धि नहीं हो सकती है.

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