यूपी: प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी निलंबित

कानपूर में गंगा नदी
Image caption कानपूर में सिद्धिनाथ मंदिर घाट के पास भारी प्रदूषण

उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मुख्य सचिव जावेद उस्मानी ने कानपूर ज़िला मजिस्ट्रेट की एक रिपोर्ट के आधार पर क्षेत्रीय अधिकारी राधेश्याम को निलंबित करने का आदेश दिया है.

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कई महीने पहले गंगा को प्रदूषित करने वाले कानपुर के 80 चमड़ा कारख़ानों को बंद करने के आदेश दिए थे. क्षेत्रीय अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में इनके बंद होने की बात कही थी.

लेकिन ज़िला मजिस्ट्रेट कानपुर ने मौक़े पर जाँच कराई तो पता चला कि इनमे से 33 चमड़ा कारख़ाने चल रहे थे और प्रदूषण बोर्ड के अधिकारियों की रिपोर्ट ग़लत थी.

इन सभी चमड़ा कारख़ानों की बिजली भी काट दी गई थी, लेकिन मौक़े पर बिजली चलती पाई गई.

कारख़ानों की जाँच पड़ताल

आरोप है कि ये कारख़ाने प्रदूषण बोर्ड और बिजली विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहे थे.

इसलिए बिजली विभाग के दोषी अधिकारियों के ख़िलाफ़ भी कार्यवाई के लिए कहा गया है.

एक सरकारी बयान में कहा गया है कि मुख्य सचिव ने सोमवार को संबंधित अधिकारियों की बैठक बुलाकर वास्तविक स्थिति की जानकारी प्राप्त की.

मुख्य सचिव ने गंगा किनारे के सभी ज़िलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे गंगा में प्रदूषण करने वाले सभी कारख़ानों की जाँच पड़ताल तीन-चार दिनों में कर लें और जिन उद्योगों को बंद करने के आदेश दिए गए हैं उनका पालन कराएं.

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अब तक आठ शराब कारख़ानों, 14 कागज़ कारख़ानों और 148 चमड़ा कारख़ानों को बंद करने के आदेश दिए हैं.

उत्तर प्रदेश सरकार ने उत्तराखंड सरकार से भी कहा है कि कोसी और राम गंगा नदी के माध्यम से कारख़ानों की गंदगी गंगा में न आने दें.

उत्तर प्रदेश सरकार ने कुम्भ के दौरान गंगा की अविरल और निर्मल धारा बनाए रखने का वादा किया है.

इसके लिए गंगा में नरोरा और टेहरी से अतिरिक्त पानी भी छोड़ा जा रहा है.

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