गैंगरेप मामला:पुलिस ने हाई कोर्ट से माफी मांगी

 गुरुवार, 10 जनवरी, 2013 को 12:43 IST तक के समाचार

अदालत

गैंगरेप मामले में दिल्ली पुलिस के रवैये को लेकर चौतरफा आलोचना हो रही है

गैंगरेप मामले में कोताही बरतने को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय से मिली फटकार के एक दिन बाद दिल्ली पुलिस ने स्टेटस रिपोर्ट को लेकर अदालत से बिना शर्त के माफी मांगी है.

दिल्ली पुलिस ने अब इस संबंध में ताज़ा रिपोर्ट भी पेश की है और उन पुलिसकर्मियों के नाम भी दिए हैं, जो उस समय घटनास्थल पर ड्यूटी पर थे जब पीड़ित लड़की और उसके दोस्त मदद के लिए गुहार लगा रहे थे.

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि पीसीआर वैन की भूमिका की जांच की जा रही है.

इस बीच गैंगरेप मामले में दिल्ली की साकेत अदालत में गुरुवार को सुनवाई होगी. ये उम्मीद की जा रही है कि इस मामले की सुनवाई को मजिस्ट्रेट अदालत से फास्ट ट्रैक कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया जाएगा.

ये सुनवाई दिल्ली हाई कोर्ट की उस टिप्पणी के एक दिन बाद हो रही है जिसमें अदालत ने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों पर इस मामले में कार्रवाई न करने को लेकर सवाल उठाया था.

सोमवार को अदालत के आदेश के बाद अब इस मामले की सुनवाई कैमरे के सामने होगी और मीडिया पर बिना अनुमति के इससे संबंधित खबर छापने से मना किया गया है.

स्टेटस रिपोर्ट

इससे पहले हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की ओर से सौंपी गई स्टेटस रिपोर्ट पर नराज़गी जाहिर करते हुए कहा था कि इस मामले में पुलिस के बड़े अधिकारियों को नहीं बचाया जाना चाहिए. साथ ही हाई कोर्ट ने कहा था कि दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के आयुक्त, सह आयुक्त और डीसीपी पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई.

बुधवार को अदालत ने कहा था कि इस मामले में केवल एक पुलिस अधिकारी को निलंबित किया गया है और सवाल पूछा कि ''क्यों गलत पुलिसकर्मियों को बचाया जा रहा है.''

23 साल की छात्रा के साथ चलती बस में सामूहिक बलात्कार किया गया था और बाद में अभियु्क्तों ने पीड़ित और उसके दोस्त को चलती बस से नग्न अवस्था में फेंक दिया था.

पीड़ित लड़की के दोस्त ने एक निजी समाचार चैनल को दिए गए साक्षात्कार में पुलिस पर आरोप लगाया था कि घटनास्थल पर पहुंची पीसीआर वैन थाना क्षेत्र को लेकर बहस करती रही और किसी ने उन्हें कपड़े तक नहीं दिए.

वकील

माना जा रहा है इस मामले में सोमवार को मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के समक्ष वकील एमएल शर्मा पेश हुए थे और उन्होंने साकेत बार एसोसिएशन के विरोध के बावजूद प्रमुख अभियुक्त राम सिंह, उसके भाई मुकेश सिंह और अक्षय कुमार सिंह उर्फ ठाकुर का वकील बनना तय किया है.

वकील का कहना है कि ये तीनों अभियुक्त दोषी न होने का दावा पेश करेंगे.

इस बीच छठे अभियुक्त के नाबालिग साबित होने के बाद उसकी सुनवाई बाल न्याय क़ानून के तहत होगी.

इसके अलावा दो अभियुक्तों पवन गुप्ता और विनय कुमार का वकील कौन होगा इस पर अभी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है.

हाई कोर्ट ने 16 दिंसबर को हुए सामूहिक बलात्कार के मामले पर पुलिस के रवैये की भी आलोचना की थी.

इस पीड़ित लड़की की सिंगापुर के अस्पताल में 29 दिसंबर को मौत हो गई थी.

इस घटना के बाद लोगों ने इस लड़की को न्याय दिलाने के विरोध प्रदर्शन किए जो अभी भी जारी हैं वहीं प्रदर्शनकारियों की मांग है कि बलात्कार क़ानून को और सख्त बनाया जाए और पुलिस में सुधार किए जाए.

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