बलात्कार और हत्या के दोषी को मौत की सज़ा

दिल्ली बलात्कार के बाद विरोध प्रदर्शन
Image caption दिल्ली सामूहिक बलात्कार के बाद दोषियों को मौत की सज़ा की मांग हो रही है

राजस्थान के श्रीगंगानगर ज़िले की एक विशेष अदालत ने एक 15 साल की लड़की का पहले बलात्कार और फिर उसकी हत्या करने के दोषी पाए गए सोहनलाल उर्फ़ सोनु को मौत की सज़ा सुनाई है.

अदालत के अनुसार सोनु ने मई, 2010 में ये घिनौना काम किया था.

श्रीगंगानगर की अदालत का ये फ़ैसला ऐसे समय में आया है जब सारे देश में दिसंबर 2012 में दिल्ली में हुए सामूहिक बलात्कार के कारण लोगों में गुस्सा है और लोगों का एक बड़ा हिस्सा बलात्कार के लिए दोषी को मौत की सज़ा दिए जाने की मांग कर रहा है.

भारत के मौजूदा क़ानून के तहत बलात्कार के दोषी को सात साल क़ैद से लेकर अधिकतम उम्र क़ैद की सज़ा दी सकती है.

आंसुओं को मिला इंसाफ़

गुरूवार को अदालत के फ़ैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए पीड़ित की मां ने इसे इंसाफ़ की जीत क़रार दते हुए कहा, ''भगवान ने मेरी प्रार्थना स्वीकार कर ली है. आख़िर मेरे आंसुओं को इंसाफ़ मिल गया. मुझे बहुत राहत मिली है.''

लेकिन दोषी क़रार दिए गए सोनु के वकील ने कहा कि वो निचली अदालत के फ़ैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील करेंगे.

सरकारी वकील ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए कहा कि मुजरिम ने पहले पीड़ित के परिवार से दोस्ती करने की कोशिश की और ख़ुद को पीड़ित का भाई बताने लगा.

पीड़ित और उसके परिवार का विश्वास जीत लेने के बाद एक दिन मुजरिम उस लड़की को अपने घर ले गया और फिर उसका बलात्कार किया और फिर उसकी हत्या कर दी.

इस मामले की विशेष अभियोजक परमजीत कौर गुजराल ने कहा कि सरकार ने इसे असामान्य अपराध मानते हुए अदालत से दोषी को मौत की सज़ा दिए जाने की अपील की थी जिसे अदालत ने स्वीकार कर ली.

श्रीगंगानगर के स्थानीय पत्रकारों के अनुसार सोनु जब गुरूवार को अदालत में पेश हुआ तो उसके चेहरे और हाओ-भाओ से एक पल के लिए भी ऐसा नहीं लग रहा था कि उसे अपने गुनाहों पर कोई पछतावा था.

एक वकील ने कहा कि अदालत के फ़ैसले के बाद भी उसके चेहरे पर एक शिकन तक नहीं थी.

भारतीय क़ानून के मुताबिक दोषी को मौत की सज़ा दिए जाने के निचली अदालत के इस फ़ैसले को राजस्थान हाई कोर्ट से मंज़ूरी लेनी होगी.

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