कैसा होगा अखिलेश 'भैया' का कुंभ?

  • 12 जनवरी 2013
Image caption अखिलेश यादव ने कुंभ के लिए पूरी मशीनरी झोंक दी है.

कुंभ 2013 का आयोजन उत्तर प्रदेश की सरकार ने बड़े पैमाने पर किया है, लेकिन सवाल है कि क्या इलाहाबाद इस महाकुंभ के लिए पूरी तरह तैयार हो चुका है.

पूरा शहर मुलायम सिंह यादव, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, छुटभैये नेताओं और चुनाव निशान साइकिल की छाप वाले पोस्टरों से पटा पड़ा है.

कुंभ में आने वाले लोगों के स्वागत के लिए बड़े-बड़े तोरण द्वार सजे है.जो सड़कें इलाहाबाद में प्रवेश करती हैं, चाहे वो बनारस से आ रही हो, या फिर लखनऊ से, हर जगह पुलिस की नाकेबंदी है.

शहर में प्रवेश करने वाली हर गाड़ी को पुलिस की पैनी निगाहों और सुरक्षा जाँच से गुज़रना पड़ रहा है.

फिर चाहे वो नीली बत्ती की गाड़ी हो या फिर समाजवादी पार्टी के नेता ही की क्यों न हो- आने वाली हर गाड़ी का नंबर और हर ड्राइवर का नाम पता नोट होने के बाद ही वो प्रयाग में प्रवेश कर सकता है.

कितनी दुरुस्त है तैयारी?

Image caption महाकुंभ में हर हर ख़ास और आम को सुरक्षा व्यवस्था से गुजरना है.

14 तारीख को मकर संक्राति का महास्नान है. इसी दिन संगम में स्नान करने वाले करोड़ों लोगों की भीड़ प्रयाग में उमड़ पडेगी.

12 साल बाद आने वाले महाकुंभ की तैयारी के लिए सरकार ने सारी मशीनरी झोंक तो दी है, लेकिन काम अभी भी अधूरे है.

कुंभ परिसर के तमाम पंडाल जमींन में अपनी जड़ें जमा चुके हैं, लेकिन अगर कुछ अखाड़ों को छोड़ दें तो अभी तमाम पंडालों का काफी काम किया जाना बाकी है.

गंगा और यमुना के मिलन स्थल पर बसी कई किलोमीटर में फैली इस कुंभ नगरी का असली रूप रात के वक्त में ही सामने आता है, जब झिलमिलाते तारों और बिजली के खंबों से आती रोशनी से नगरी सराबोर हो जाती है.

कुंभ नगरी में 13 अखाड़े हैं, बड़े- बड़े पंडाल और रात की रोशनी में तो इनकी भव्यता देखते ही बनती है. यहाँ आम आदमी हैं, साधू हैं और नागा भी.

हालांकि ठंड काफी है लेकिन संगम में स्नान करने वालों के जज्बे में कोई कमी नही. इसलिए कड़कड़ाती ठंड में भी बोरिया बिस्तर समेटे यहाँ पहुंचने वाले परिवारों की भी कोई कमी नही.

न बिस्तर, न गर्म रजाई लेकिन डटने लगे है..

Image caption मकर संक्राति पर महास्नान होगा.

खाना बनाने के लिए आम लोगों को मिट्टी के खास किस्म के चूल्हों का इस्तेमाल करना है. हज़ारों की तादाद में इन चूल्हों को इलाहाबाद के रहने वाले स्थानीय लोग ही इन चूल्हों को बना रहे है.

देखने में चूल्हे छोटे हैं और इनमें लकड़ी या फिर गोबर का कंडा जला कर खाना पकाया जाता है.

पर संगम का एक बहुत बड़ा इलाका ऐसा है जो खाली है, पंडाल के लिए जगह तो सुरक्षित है, लेकिन तंबू नदारद.

कुंभ नगरी में फायर स्टेशन हैं, थाने हैं, पुलिस चौकी है, आपात सेवा के लिए अस्पताल हैं, रेलवे आरक्षण केंद्र हैं, स्नान के सीधे प्रसारण के लिए टीवी चैनलों और पत्रकारों के लिए सुख सुविधा संपन्न मीडिया केंद्र भी हैं.

अब तो बस इंतज़ार इस बात का है कि करोडों का भीड़ आए स्नान करे और ये कुंभ नगरी पूरे शहर में नज़र आ रहे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को संगम में डुबकी लगाता देखे.

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