बड़ा कुंभ बड़ा धंधा

कुंभ मेला
Image caption बारह साल बाद आने वाले महाकुंभ के दौरान सब कुछ बदल जाता है

यूं तो संगम तट पर साल भर स्नान करने वालों की कमी नहीं होती, पर साल में जनवरी का महीना ऐसा होता है, जब यहाँ लोगों के जत्थे के जत्थे उमड़ पड़ते है.

ख़ास तौर पर मकर संक्राति के दिन लोग स्नान करने के लिए उमड़ते हैं. यहाँ आने वालों में आपको अधिकतर गाँव देहात के लोग मिलेंगे.

शहर का उच्च वर्ग इससे दूर ही रहता है. लेकिन शहरी मध्यम वर्ग भी संगम पर खिंचा चला आता है.

लेकिन अगर महाकुंभ या फिर अर्धकुंभ का मौक़ा हो तो चीज़ें बदल जाती हैं.

साल भर तक छोटी कमाई पर गुज़र-बसर करने वाले लोगों के लिए ये एक मौक़ा होता है बड़ी कमाई करने का.

धंधे भांति-भांति के

अगर आप स्नान के बाद संगम के जल को अपने साथ ले जाना चाहें तो उसकी व्यवस्था भी यहाँ है. बोतल बेचने वाली न जाने कितनी दुकानें यहां हैं.

ठंड में स्नान के बाद सिर्फ़ एक ही रास्ता बचता है और वो है चाय. यहां आपको चाय की दुकान खोजने की ज़रूरत नही है. चाय वाला आपके पास ख़ुद आ जाएगा, पर स्नान कीजिए तो सही.

राम निवास आम दिन भर में पचास कुल्हड़ चाय बेचते है. वो कहते है, "सुबह से सौ कप चाय बेच चुका हूँ, अब आप ही बताइए आमदनी बढ़ेगी या नही."

अगर आप रुद्राक्ष की माला या फिर कोई और माला पहनना या दान करना चाहते हैं तो पहनने के लिए मंहगी और दान के लिए सस्ती माला मिल जाएगी.

इसी तरह, बाल उतारने वाले नाई का भी अच्छा ख़ासा काम चलता है.

कर्मकांडी पंडितों की चांदी

Image caption कई पंडित यहां पीढ़ियों से काम कर रहे हैं

संगम पर ऐसे कर्मकांडी पंडितों की कोई कमी नहीं जो पीढ़ियों से यही काम करते आ रहे हैं. बदले में लोग इन्हें दक्षिणा देते हैं.

संगम तट पर बैठे एक पंडित पहते है कि वो पीढ़ियों से इसी काम को करते आ रहे हैं, इसी से घर चलता है. अब भीड़ बढ़ेगी तो काम भी बढ़ेगा ही. 55 दिन का ये कुंभ कमाई के लिए ठीक है.

संगम तट पर भिक्षा पर गुज़र-बसर करने वालों की भी कोई कमी नहीं है. लेकिन ये दो तरह के होते है. एक तो आम और दूसरे वो हैं जो गीत या भजन गाकर अकेले या फिर एक समूह के रूप में कमाते हैं.

पर 12 साल बाद आने वाले महाकुंभ और छह साल बाद आने वाले अर्धकुंभ के दौरान सब कुछ बदल जाता है.

इन सब की कमाई कई गुना तक बढ़ जाती है. मेले में चाट और कचौड़ी की दुकान पर भीड़ बढ़ जाती है.

तभी तो ये सभी चाहते हैं कि ऐसे कुंभ 12 साल बाद नहीं, हर साल बार-बार आएं, क्योंकि कुंभ बड़ा नही होगा तो छोटी कमाई वाला छोटा धंधा कहाँ से बड़ा होगा.

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