पाकिस्तानी कलाकारों ने कहा, हमें भारत में ख़ौफ़ नहीं

 मंगलवार, 15 जनवरी, 2013 को 09:09 IST तक के समाचार

अजोका थिएटर इस शनिवार दिल्ली में आयोजित भारत रंग महोत्सव में अपने नाटक का मंचन करेगा.

कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर हुई घटना के बाद पाकिस्तान के ख़िलाफ़ बयानों का सिलसिला चल रहा है. हॉकी लीग में खेल रहे पाकिस्तानी खिलाड़ियों का शिवसेना ने विरोध किया है. ख़बरें आईं कि गुजरात से व्यापारियों के एक प्रतिनिधि मंडल को वापस भेज दिया गया.

दोनों देशों के रिश्तों पर एक बार फिर सवाल खड़े किए जा रहे हैं लेकिन इन सबके बीच पाकिस्तान का एक थिएटर ग्रुप या नाट्य दल भारत रंग महोत्सव में अपने नाटक का मंचन करने पहुँचा है.

इस दल के सदस्यों का कहना है कि उन्हें इस माहौल के बावजूद भारत में कोई ख़ौफ़ नहीं है.

उनका कहना है कि जब माहौल ख़राब हो तभी कला और संस्कृति की भूमिका बढ़ जाती है.

भरोसा

अजोका थिएटर ग्रुप लाहौर की निर्देशक मदीहा गौहर ने कहा, “हमें कोई शंका नहीं है. हमें भरोसा है कि ऐसे मौकों पर ही आर्ट और कल्चर की भूमिका बढ़ जाती है. 26/11 हमले के बाद हमने केरल में अपने नाटक का मंचन किया था, तब तो बहुत ज्यादा माहौल खराब था. तब तीन हज़ार लोगों ने खड़े होकर तालियों के साथ हमारे नाटक को सराहा था.”

"डर जैसी कोई चीज़ हमारे ज़हन में नहीं हैं. सब हमारे जैसे लोग हैं, जुबान भी वही हैं और अमृतसर में तो हमारे बहुत से दोस्त हैं. उनसे मिले बगैर तो हमारा गुज़ारा भी नहीं होता. रैलियों से हमें कोई डर नहीं था"

मदीहा गौहर

मदीहा गौहर बडे़ भरोसे से कहती हैं, “हमें तो कोई खौफ नहीं है और जो घटनाक्रम हो रहा है वो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. मुझे लगता है कि दोनों ओर ऐसे लोग हैं जो शांति प्रक्रिया को पटरी से उतारना चाहते हैं.”

मदीहा गौहर का दल अमृतसर होते हुए सोमवार को ही दिल्ली पहुंचा है,“मैं तो तीन दिन पहले भारत आ गई थी, लेकिन मेरा दल कल अमृतसर से होते हुए आया है. जहां कुछ रैलियां भी हो रही थीं लेकिन मुझे नहीं लगता कि इसके बावजूद हमारे मन में कोई भी शंका आई हो. हमें पूरा भरोसा है कि ये कुछ वक्त की बात है और ये वक्त बीत जाएगा.”

मदीहा गौहर के दल में शामिल नदीम अहमद मीर भी अमृतसर के रास्ते ही दिल्ली पहुंचे हैं, “डर जैसी कोई चीज़ हमारे ज़हन में नहीं हैं. सब हमारे जैसे लोग हैं, जुबान भी वही हैं और अमृतसर में तो हमारे बहुत से दोस्त हैं. उनसे मिले बगैर तो हमारा गुज़ारा भी नहीं होता. रैलियों से हमें कोई डर नहीं था.”

हालांकि नदीम स्वीकार करते हैं कि इस तरह के माहौल में थोड़ा असहज ज़रूर हैं लेकिन डर जैसी कोई चीज़ नहीं है.

अपने नाटक के बारे में मदीहा गौहर बताती हैं, “हम जो नाटक लेकर आए वो है, 'कौन है ये गुस्ताख़'. ये नाटक मंटो की जिंदगी पर आधारित है. दिसंबर में हमने इस नाटक का पहली बार लाहौर में मंचन किया और अब हम इसे दिल्ली लेकर आए हैं.दिल्ली के अलावा हम जयपुर में भी इस नाटक का मंचन करने वाले हैं.”

ये नाटक मंटों के आखिरी दिनों पर आधारित है और ये उन दिनों की दास्तान है जब उन पर मुकदमें हुए और सरकार द्वारा उन्हें प्रताड़ित किया.

मदीहा गौहर के इस दल में 23 लोग पाकिस्तान से आए हैं जिनमें पांच महिलाएं भी शामिल हैं.

पाकिस्तान में है खौफ

मदीहा गौहर की ये सातवीं भारत यात्रा है.

मदीहा गौहर कहती हैं कि पाकिस्तान में नाटकों का दायरा सीमित होता जा रहा है.

वे कहती हैं, “पाकिस्तान में हमें लोग आज भी देखना चाहते हैं हालांकि जो कल्चर के लिए समाज में स्थान होना चाहिए वो लगातार कम होता जा रहा है. अब बंदिशे हो गई है कि कहां नाटकों का प्रदर्शन कर सकते हैं या कहां नहीं कर सकते. ये बंदिशे सरकार की ओर से नहीं है बल्कि जो सुरक्षा की कमी का माहौल बन गया है उसकी वजह से हैं.”

ये मदीहा गौहर की सांतवी भारत यात्रा है.

मदीहा गौहर को दुख है कि भारत पाक के थिएटर रिश्तों पर भी पाकिस्तान में मौजूद असुरक्षा का असर हुआ है, “हमारे भारतीय थियेटर के लोगों के साथ अच्छे खासे संबंध रहे हैं. हमने लाहौर में चार-पांच साल भारत-पाक थिएटर फेस्टिवल भी करवाया. लेकिन अब हम वो भी नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि अब लाहौर असुरक्षित हो गया है.”

गौहर कहती हैं कि जहां भी हम गए हैं हमें लोगों का खूब प्यार मिला है. नफ़रतों की जबां हुक्मरानों की है. दोनों ओर के लोगों की ख्वाइश है कि अमन कायम रहे.

‘कौन है ये गुस्ताख़’ नाटक का मंचन पहले जयपुर में होगा और फिर 19 जनवरी को इसे नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के भारत रंग महोत्सव में प्रदर्शित किया जाएगा.

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