अजमेर: देग़ में कूदीं माँ-बेटी, हालत नाज़ुक़

  • 18 जनवरी 2013
छोटी देग़
Image caption ये देग़ मुग़ल बादशाह ने दरगाह में भेंट की थी.

राजस्थान में अजमेर स्थित महान सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में रखी दो देग़ वैसे तो प्रसाद बनाने के लिए इस्तेमाल होती हैं लेकिन बृहस्पतिवार को यहां एक अनोखा मामला सामने आया.

यहां इन दोनों में से जिस समय छोटी देग़ में खाना बन रहा था उसी समय 23 साल की सरीना ने इसमें छलांग लगा दी. इस घटना के बाद इस लड़की की 58 साल की मां सुल्फज़ा भी उसमें कूद गई है.

थाना प्रभारी अनिल सिंह ने इस घटना की पुष्टि करते हुए कहा है कि सरीना गलती से देग़ में गिर गई और उसकी मां को उसे बचाने के लिए देग़ में कूदना पड़ा.

बताया जा रहा है कि दोनों ही महिलाओं का शरीर 85 फीसदी जल गया है और उनकी हालत गंभीर है.

अनिल सिंह के मुताबिक दोनों ही महिलाएं नहीं बोल पा रही है.

ये महिलाएं दक्षिणी राज्य केरल की रहने वाली हैं और पिछले कुछ दिनों से इसी दरगाह में पनाह लिए हुई थीं.

पुलिस केरल में इन महिलाओं के रिश्तेदारों से संपर्क साधने की कोशिश कर रही है.

घटना

इस दरगाह में एक देग़ मुग़ल बादशाह अकबर ने ख़्वाजा की शान में भेंट की थी जबकि दूसरी देग़ बादशाह जहांगीर ने अकीदत में भेंट की थी. तब से ही इन विशाल मर्तबानों में श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद बनता आ रहा है.

पुलिस के सूत्रों के मुताबिक दोनों ही पीड़ित मां-बेटी हैं. एक प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक जब छोटी देग़ में प्रसाद बन रहा था उसी समय बेटी ने छलांग लगा दी. पुलिस सूत्रों के अनुसार इस घटना के बाद बेटी की जान बचाने के लिए मां भी देग़ में कूद गई.

दोनों ही महिलाओं के शरीर झुलस गए हैं और उन्हें इलाज के लिए तुरंत अस्पताल ले जाया गया.

बताया जाता है कि छोटी देग़ में 2500 लोगों का खाना पक सकता है. इसमें 2, 240 किलो चावल पक सकते है और ये 22 फ़ुट चौड़ी है.

इन एतिहासिक देग़ में खाना बनाने का ठेका खादिमों को दिया जाता है.

देग़ में पकते खाने की निगरानी करने के लिए तीन से चार लोग काम करते है.

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