नाम रामपुरी लेकिन हैं अमरीकी

रामपुरी बाबा
Image caption रामपुरी बाबा 1971 से ही कुंभ में आ रहे हैं और महसूस करते हैं कि बहुत बदलाव हुआ है.

कुंभ में भांति भांति के साधु संत आते हैं लेकिन इनमें अगर कोई विदेशी साधु मिल जाए और वो भी हिप्पी नहीं बल्कि विशुद्ध जूना अखाड़े का साधु तो क्या कहेंगे.

उस पर तुर्रा ये कि ये बाबा हैं अमरीकी. नाम है रामपुरी. जूना अखाड़ा में संन्यास लिए बरसों बीत गए. वो बताते हैं कि उनका पहला कुंभ 1971 में था यानी पिछले 42 सालों से कुंभ में आ रहे हैं.

रामपुरी बाबा अच्छी हिंदी बोलते हैं और स्पष्टवादी हैं. पढ़ने में बेहद रुचि है बाबा को और दो किताबें भी लिख चुके हैं अंग्रेज़ी में.

कुंभ को लेकर बात चली तो मैंने पूछा कि कितना बदला है कुंभ जो उन्होंने देखा है पिछले 42 सालों में.

बाबा ने पूरी भावना से सच्चाई बयान की और कहा कि अब वैसे गुरु नहीं मिलते हैं वैसे साधक नहीं दिखते हैं.

वो कहते हैं, ‘‘ हमारे गुरु जैसे लोग अब नहीं मिलते कुंभ में. बदलाव हुआ है वो बता नहीं सकते. महसूस किया जा सकता है. ये पूरी संस्था (कुंभ,अखाड़ा, साधु समाज) ही बहुत नाजुक हो गई है. भारत के लोगों को समझना होगा कि अगर वो इन पर यकीन नहीं करेंगे, विश्वास नहीं करेंगे और समर्थन नहीं देंगे तो आपके पोते पोतियों को न तो कुंभ देखने को मिलेगा और न ही साधु संन्यासी और अखाड़े.’’

तो क्या विश्वास में कमी आई है लोगों के? बाबा कहते हैं कि साधुओं पर अभी भी गांव के लोग ही भरोसा करते हैं और भक्त बनते हैं लेकिन पिछले दो कुंभ से जवान लोगों की संख्या बढ़ी है.

वो कहते हैं, ‘‘ जो अधिकतर भगत हैं हमारे वो गांवों के हैं. लेकिन पिछले कुंभ में देखा है कि जवान लोग आते हैं. उनमें जानने की इच्छा है.’’

लेकिन भक्त अब उतने नहीं बनते जितना लोग पहले संन्यास लेकर बनते थे.

Image caption रामपुरी बाबा का आश्रम हरिद्वार में हैं और वो जूना अखाड़े से जुड़े हुए हैं.

रामपुरी कहते हैं कि इसके कारणों पर बात करने पर घंटों लग जाएंगे. वैसे बात तो सही है क्योंकि इसके कई कारण हो सकते हैं.

रामपुरी अध्यात्म के साथ साथ लेखन पठन से जुड़े हैं और ईमेल पर उनसे संपर्क किया जा सकता है.

मुझे उन्होंने जब अपने वेबसाइट के बारे में बताया तो मुझे आश्चर्य भी हुआ. रामपुरी डॉट कॉम. बेहतरीन वेबसाइट लगी.

सबसे अचरज की बात वो पुस्तकों की सूची है जो बाबा ने दी है- उनके लिए जो पढ़ना चाहते हैं.

बोर्जेस से लेकर सलमान रुश्दी, ओरहान पामुक, जॉर्ज ऑरवेल, एल्डस हक्सले, हरमन हेस, रोनाल्ड इंडेन के अलावा मिशेल फूको, देरिदा और एडवर्ड सेड जैसे दार्शनिकों की किताबें बाबा ने पढ़ी हैं और फिर उनकी वकालत की है.

मैं अब तक कई साधु संतों से मिला हूं और ये जानता हूं कि साधुओं के पास आध्यात्मिक ज्ञान होता है. लेकिन रामपुरी बाबा पहले साधु मिले जिनकी किताबों की सूची देखकर ही लगा कि उनके पास आध्यात्मिक ज्ञान के साथ साथ किताबों का ज्ञान भी है..

कहते हैं कि किसी की पहचान उन किताबों से हो सकती है जो वो पढ़ता है और इस आधार पर रामपुरी बाबा पहुंचे हुए साधु लगे.

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