झारखंड में तीसरी बार राष्ट्रपति शासन

  • 19 जनवरी 2013
अर्जुन मुंडा
Image caption झारखंड मुक्ति मोर्चा के समर्थन वापस लेने पर अर्जुन मुंडा को इस्तीफा देना पड़ा था

करीब 10 दिनों तक राजनीतिक संकट से गुजरने के बाद आखिरकार झारखंड में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया. 12 साल पहले बिहार से अलग होकर अस्तित्व में आए झारखंड में तीसरी बार राष्ट्रपति शासन लागू हुआ है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक राष्ट्रपति भवन के सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है कि कोलकाता के दौरे पर गए राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए औपचारिक रूप से हस्ताक्षर कर आदेश दे दिया.

गुरुवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भी राष्ट्रपति शासन की मंजूरी दी थी. मंत्रिमंडल ने झारखंड के राज्यपाल सैयद अहमद की उस रिपोर्ट पर चर्चा की थी जिसमें उन्होंने 81 सदस्यीय विधानसभा को निलंबित कर राष्ट्रपति शासन लगाने का सुझाव दिया था.

झारखंड राजनीतिक अस्थिरता का दंश साल 2000 से ही झेल रहा है और यहां अब तक आठ दफा सरकार बनी है.

राजनैतिक संकट

राज्य में इससे पहले साल 2009 और 2010 में राष्ट्रपति शासन लगाया गया था.

मौजूदा राजनीतिक गतिरोध 8 जनवरी को शुरू हुआ जब भाजपा के नेतृत्व वाली मुंडा सरकार से झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने 28 महीने तक चले अपने समर्थन को वापस लेने का फैसला किया. इसके बाद झारखंड के मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप दिया.

81 सदस्यों वाली विधानसभा में जेएमएम और भारतीय जनता दल (भाजपा) के पास 18-18 विधायक थे जबकि एजेएसयू के छह और जेडीयू के 2 विधायक थे. विपक्षी दल कांग्रेस के राज्य विधानसभा में 13, झारखंड विकास मोर्चा (पी) के 11 और आरजेडी के पांच विधायक थे.

झारखंड में सरकार बनाने के लिए 41 विधायकों का समर्थन जरूरी था.

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार