राहुल गांधी बने कांग्रेस के उपाध्यक्ष

  • 19 जनवरी 2013

नेताओ की पुरजोर मांग और कार्यकर्ताओ के इसरार के बाद कांग्रेस ने आखिर अपने युवराज राहुल गाँधी को पार्टी का उपाध्यक्ष बनाने का ऐलान कर दिया. उनके नाम का प्रस्ताव रक्षा मंत्री ए के एंटनी ने रखा और पार्टी प्रमुख सोनिया गाँधी ने इसे मंजूरी दी.

पार्टी ने ये फैसला जयपुर में शनिवार को कांग्रेस कार्यसिमिति की बैठक में किया.

समाचार एजेंसी पीटीआई ने कांग्रेस नेता विलास मुत्तमवार के हवाले से ख़बर दी है कि राहुल गांधी ने कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्यों के प्रति अपना आभार व्यक्त किया है.

इससे पहले, बैठक के बीच ही पार्टी प्रवक्ता जनार्दन द्विवेदी बाहर आए और मीडिया से मुखातिब हुए.

उन्होंने कहा, ''ए के एंटनी ने जैसे ही राहुल का नाम प्रस्तावित किया, सभी सदस्यों ने इसकी हिमायत की."

जनार्दन द्विवेदी ने कहा कि पहले पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने इसे मंजूरी दी और फिर राहुल ने उसपर अपनी सहमति दे दी.

उन्होंने एलान किया कि "राहुल गांधी पार्टी में नंबर दो के नेता होंगे. अभी चुनावों के बारे में और अन्य जिम्मेदारियों के बारे में उनकी भूमिका की जानकारी दी जाएगी."

खुशी की लहर

इस एलान के बाद कांग्रेस बैठक स्थल के बाहर पहले से जमा भीड़ ने करतल ध्वनि से खुशी का इजहार किया, आतिशबाजी की और ढोल नागाड़ों से स्वागत किया.

पार्टी में राहुल ब्रिगेड के सदस्य केंद्रीय राज्य मंत्री भंवर जीतेन्द्र सिंह और सांसद दीपेन्द्र हुडा ने इसे भारतीय राजनीति के लिए एक अहम् फैसला बताया.

जीतेंद्र सिंह ने इसे भारत के अवाम और युवा पीढ़ी के लिए हर्षित होने का लम्हा बताया तो दीपेंद्र हुडा ने कहा कि राहुल में अपार क्षमताएं हैं, युवा पीढ़ी उनमें अपना भविष्य देखती है. इससे पार्टी संगठन को मजबूती मिलेगी.

कांग्रेस चिन्तन शिविर में दो दिन से पार्टी नेता राहुल को नेतृत्व सौंपने की मांग कर रहे थे.

Image caption राहुल गांधी को पार्टी का उपाध्यक्ष बनाने की घोषणा होते ही समर्थकों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया

फिजा ऐसी बनी कि जयपुर में बैठक स्थल बिरला सभागार के बाहर युवक कांग्रेस और छात्र संगठन के सदस्यों ने सवेरे से ही इस ताजपोशी को पुख्ता मानते हुए अपनी तैयारियां शुरू कर दी थी. अन्दर नेता बैठक कर रहे थे, बाहर आतिशबाजी और ढोल नागाड़ों की गूंज सुनाई देने लगी.

कार्यकर्ता इतने उत्साहित थे कि वे एक रथ तैयार कर लाए और उनकी मुराद थी कि राहुल अपनी ताजपोशी के बाद उस रथ की सवारी करें.

इस घोषणा के बाद रविवार को अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी की बड़ी सभा होगी जिसमें प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, सोनिया गाँधी और कांग्रेस के युवराज राहुल गाँधी अपना भाषण देंगे.

इसमें कोई डेढ़ हजार से ज्यादा कांग्रेस प्रतिनिधि अपने इस रहनुमा को सुनेंगे.

कांग्रेस के इस चिन्तन शिविर में दो दिन तक जो कुछ हुआ है, उसे एक दस्तावेज़ में समेटा जायेगा और फिर जयपुर घोषणापत्र के नाम से जारी किया जाएगा.

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री आर पी एन सिंह ने कहा कि दो दिन में कांग्रेस प्रतिनिधियों ने लगभग हर मुद्दे पर चर्चा की है.

कांग्रेस सांसद राज बब्बर का कहना था कि जो चर्चा हुई है उसमें समाजवादी सोच की ध्वनि सुनी जा सकती है क्योंकि इसमें गांव, गरीब, दबे कुचले और अभिशप्त लोगों के कल्याण और उन्हें बराबरी पर लाने पर जोर दिया गया है.

जिम्मेदारी से बचना मुश्किल

कांग्रेस के इस फैसले के साथ ही ये स्पष्ट हो गया है कि आनेवाले समय में राहुल गांधी पार्टी मामलों में अब और महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.

एक और महत्वपूर्ण बात ये है कि इससे पहले कांग्रेस में उपाध्यक्ष का पद नहीं होता था. लेकिन पार्टी में उनका महत्व बढ़ाने और उन्हें सोनिया गांधी का सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी बनाने के लिए कांग्रेस ने ये फैसला लिया है.

जानकारों का मानना है कि राहुल गांधी अभी भी पार्टी में नंबर दो की भूमिका संभाल रहे थे लेकिन कोई पद नहीं होने से पार्टी की कामयाबियों और नाकामियों के प्रति उनकी सीधी जिम्मेदारी नहीं थी लेकिन अब उपाध्यक्ष बनाए जाने के बाद पार्टी के हर फैसले के लिए वो सीधे तौर पर जिम्मेदार होंगे और उनके लिए आनेवाले चुनावों में पार्टी के अच्छे-बुरे प्रदर्शन से खुद को दूर रखना संभव नहीं हो सकेगा.

विपक्ष की प्रतिक्रिया

राहुल गांधी को पार्टी में नंबर दो का नेता बनाए जाने पर विपक्ष ने बहुत ठंडी प्रतिक्रिया दी है. प्रमुख विपक्षी पार्टी बीजेपी के प्रवक्ता शहनवाज़ हुसैन ने कहा है कि, "राहुल गांधी पहले भी कांग्रेस में नंबर दो थे, ये कोई नई बात नहीं है. उनके उपाध्यक्ष बनने से न तो देश को कोई लाभ होनेवाला है और ना ही कांग्रेस पार्टी को कोई लाभ होनेवाला है. "

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