मेरी माँ रो पड़ी, कहा सत्ता ज़हर की तरह है: राहुल

Image caption राहुल गांधी कांग्रेस के पहले उपाध्यक्ष बनाए गए हैं

कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष पद की कमान संभालने के बाद राहुल गांधी ने रविवार को कहा कि अब कांग्रेस ही उनकी ज़िंदगी है और वो पूरी ताक़त से पार्टी और देश की सेवा करेंगे.

जयपुर में पार्टी के चिंतन शिविर के समापन सत्र में राहुल गांधी ने कहा कि पिछले आठ साल के राजनीतिक जीवन में उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के अनुभवों से बहुत कुछ सीखा है. राहुल का कहना था कि वे इन अनुभवों का प्रयोग अपने आनेवाले राजनीतिक जीवन में करना चाहते हैं.

उन्होंने कहा, "कांग्रेस पार्टी दुनिया का सबसे बड़ा परिवार है लेकिन इसमें बदलाव की ज़रूरत है. मगर सोच-समझ कर. सबको एक साथ लेकर बदलाव की बात करनी है और बदलाव लाना है. प्यार से, सोचसमझ के साथ, सबकी आवाज़ को सुनकर आगे बढ़ना है."

राहुल गांधी ने कहा कि वो सबको एक ही आंख से एक ही तरीके से देखेंगे चाहे वो युवा हो, कांग्रेस कार्यकर्ता हो, बुजुर्ग हो या फिर महिला हो.

'पार्टी में नियम-क़ानून नहीं'

राहुल ने कांग्रेस की कार्यप्रणाली पर भी टिप्पणी की और कहा कि पार्टी में शायद किसी को नहीं मालूम कि कांग्रेस का नियम क्या है और ये चलती कैसे है, चुनाव कैसे जीत लेती है.

उनका कहना था, "कांग्रेस गांधी जी का संगठन है और इसमें हिंदुस्तान का डीएनए भरा हुआ है. हमारे विपक्ष के लोग इसे समझ नहीं पाते. कोई कहता है मैं इस जाति की पार्टी हूं, मैं इस धर्म की पार्टी हूं. लेकिन कांग्रेस कहती है कि हम हिंदुस्तान की पार्टी हैं."

राहुल ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं की नेतृत्व क्षमता पर भी अपनी राय रखी.राहुल गांधी ने कहा, "आज नेतृत्व के विकास पर फोकस नहीं किया जाता. आज से पांच-छह साल बाद ऐसी बात होनी चाहिए कि हमारे सामने 40-50 नेता तैयार हों जो देश को चला सकें. हमें ऐसे नेता विकसित करने हैं जो धर्मनिरपेक्ष हों और हिंदुस्तान को समझते हों. ऐसे नेता जिन्हें देख कर लोग कहें कि हम उनके पीछे खड़े होना चाहते हैं."

उन्होंने ये भी कहा कि नेता अगर काम नहीं कर रहा तो उसे आगे नहीं बढ़ाना चाहिए. जिस दिन जनता की आवाज़ कांग्रेस के अंदर गुंजने लगेगी, उस दिन कांग्रेस को कोई नहीं हरा पाएगा.

राहुल गांधी ने कहा, "मैं सबकुछ नहीं जानता. दुनिया में कोई ऐसा व्यक्ति नहीं जो सब कुछ जानता हो. लेकिन कांग्रेस पार्टी में कहीं न कहीं जानकारी ज़रूर है. पार्टी के वरिष्ठ नेताओ से सीखूंगा. आपकी आवाज़ को आगे बढ़ाऊंगा."

भावुक पल

Image caption राहुल गांधी को शनिवार को जयपुर में पार्टी उपाध्यक्ष बनाया गया था

भाषण में कई बार राहुल गांधी ने अपनी ज़िंदगी के भावुक पलों को भी सबके साथ बाँटा. नई ज़िम्मेदारी को लेकर मन में चली उधेड़ बुन पर बात करते हुए राहल ने कहा, " आज सुबह मैं चार बजे ही उठ गया और बालकनी में गया. सोचा कि मेरे कंधे पर अब बड़ी जिम्मेदारी है. अंधेरा था, ठंड थी. मैंने सोचा कि आज मैं वो नहीं कहूंगा जो लोग सुनना चाहते हैं. आज मैं वो कहूंगा जो मैं महसूस करता हूं"

उसके बाद उन्होंने अपनी दादी इंदिरा गांधी के निधन के समय को याद करते हुए अपने पिता राजीव गांधी और उनके राजनीतिक संघर्ष को याद किया.

इंदिरा गांधी और राजीव गांधी दोनों ही चरमपंथियों के हाथों मारे गए थे.राहुल गांधी ने कहा कि अगर उम्मीद न हो तो आप बदलाव नहीं ला सकते.

जब माँ रोते हुए आई

पार्टी उपाध्यक्ष का पद मिलने के बाद माँ सोनिया गांधी की क्या प्रतिक्रिया रही. राहुल अपनी ज़िंदगी के इस पल को साझा करने से भी नहीं हिचकिचाए.

इस मौके पर उन्होंने कहा, "पिछली रात मेरी मां मेरे पास आई और रो पड़ी क्योंकि वो जानती हैं कि सत्ता ज़हर की तरह होती है. सत्ता क्या करती है. हमें शक्ति का इस्तेमाल लोगों को सबल बनाने के लिए करना है."

राहुल गांधी जब ये बातें कह रहे थे तो मंच पर बैठे कांग्रेसी नेता खड़े होकर उनका अभिवादन कर रहे थे.

अपने उपाध्यक्षीय भाषण की समाप्ति राहुल ने ये कह कर की कि "कांग्रेस पार्टी अब मेरी ज़िंदगी है. भारत के लोग मेरी जिंदगी हैं और मैं देश के लोगों और पार्टी के लिए लड़ूंगा. मैं अपनी पूरी ताकत से लड़ूंगा और आप सबों का आह्वान करता हूं कि इस लड़ाई में मेरा साथ दें."

संबंधित समाचार