भर्ती घोटाले में चौटाला को 10 साल की सज़ा

 मंगलवार, 22 जनवरी, 2013 को 14:43 IST तक के समाचार
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चौटाला

दिल्ली की एक अदालत ने शिक्षकों की भर्ती में हुए घोटाले के मामले में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला और उनके बेटे अजय चौटाला को 10-10 साल कैद की सजा सुनाई.

सीबीआई के विशेष न्यायाधीश विनोद कुमार ने इसके अलावा तीन अन्य मुख्य अभियुक्तों तत्कालीन प्राथमिक शिक्षा निदेशक संजीव कुमार. चौटाला के पूर्व ओएसडी विद्याधर और राजनीतिक सलाहकार शेर सिंह बादशामी को भी 10-10 साल की सज़ा सुनाई.

हरियाणा में वर्ष 2000 में जेबीटी शिक्षकों की भर्ती में हुए घोटाले में इंडियन नेशनल लोकदल के अध्यक्ष चौटाला, अजय चौटाला और 53 अन्य को दोषी ठहराया गया था.

सजा सुनाए जाने के तुरंत बाद चौटाला समर्थकों ने कोर्ट परिसर में पथराव किया और देसी बम फेंके.

इससे पहले हजारों चौटाला समर्थकों ने रोहिणी स्थित अदालत के बाहर जमकर हंगामा किया और पुलिस की ओर से लगाए गए अवरोधकों को हटाने की कोशिश की. इससे पुलिस और चौटाला समर्थकों में झड़पें भी हुई.

आंसू गैस के गोले

चौटाला समर्थकों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा, आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और कोर्ट परिसर को सील करना पड़ा.

सुबह से ही कई समर्थक अदालत के बाहर जमे हुए थे. अदालत परिसर की तरफ जा रही सभी सड़कें चौटाला समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं की कारों और अन्य वाहनों से अटी पड़ी थीं.

जज ने 55 अभियुक्तों, उनके वकीलों, अभियोजनकर्ताओं और स्टाफ कर्मचारियों के अलावा को भी परिसर में घुसने की अनुमति नहीं दी. सजा सुनाए जाते समय चौटाला अदालत में मौजूद नहीं थे क्योंकि वो अस्पताल में भर्ती हैं.

सीबीआई के विशेष जज विनोद कुमार ने सोमवार को ही सुनवाई पूरी कर ली थी.

अदालत ने 16 जनवरी को ओम प्रकाश चौटाला, अजय चौटाला और 53 अन्य अभियुक्तों को वर्ष 2000 में 3206 जेबीटी शिक्षकों को अवैध तरीके से भर्ती करने का दोषी करार दिया था.

चुनाव नहीं लड़ सकेंगे

चौटाला और अन्य अभियुक्तों को आईपीसी के तहत धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करने और साजिश रचने का दोषी पाया गया था. साथ ही उन्हें भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत अपने पद के दुरुपयोग का भी दोषी करार दिया गया था.

जन प्रतिनिधि कानून के मुताबिक दो वर्ष या उससे अधिक सजा पाने वाला व्यक्ति सजा शुरु होने की तिथि से अयोग्य घोषित हो जाएगा और वो जेल से रिहा होने के बाद अगले छह साल तक चुनाव नहीं लड़ सकता.

लेकिन ओम प्रकाश चौटाला और अजय चौटाला अगर तीन महीने के भीतर निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हैं तो उनकी अपील पर फैसला आने तक वे विधायक बने रह सकते हैं. ओम प्रकाश चौटाला हरियाणा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं जबकि अजय चौटाला डबवाली से विधायक हैं.

हाल के दिनों में भ्रष्टाचार के मामले में सज़ा पाने वाले चौटाला तीसरे राजनेता हैं. इससे पहले भाजपा के पूर्व अध्यक्ष बंगारु लक्ष्मण और हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सुखराम को भ्रष्टाचार के मामले में जेल की सजा हो चुकी है.

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