क्यों जाना पड़ा नितिन गडकरी को?

 बुधवार, 23 जनवरी, 2013 को 09:07 IST तक के समाचार
नितिन गडकरी और लालकृष्ण आडवाणी

गडकरी को दोबारा अध्यक्ष बनाने के लिए बीते साल मुंबई में भाजपा का संविधान बदला गया था

भारतीय जनता पार्टी के मौजूदा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने कहा है कि उन्हें पार्टी का अध्यक्ष दोबारा नहीं बनना है.

भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे नितिन गडकरी का कहना है कि उन्होंने खुद अध्यक्ष पद की दौड़ से हट जाने का फैसला किया है.

गडकरी ने इसकी वजह बताते हुए कहा है कि वे नहीं चाहते कि उनकी वजह से भारतीय जनता पर कोई आरोप लगे.

अपने ऊपर लगे आरोपों पर गड़करी ने कहा है, ''राजनीतिक षडयंत्र के तहत मेरे ऊपर कुछ झूठे आरोप लगाए गए हैं. मैं पूरी तरह निर्दोष हूं. पर जानबूझकर मेरी पार्टी को बदनाम करने के लिए मेरा नाम उछालकर ये कोशिश की गई तो मैंने सोचा कि एक बार इस पूरे मामले की जांच पूरी हो जाए.''

गडकरी की गद्दी क्यों फिसली

"नितिन गडकरी की कंपनियों पर मंगलवार सुबह कई जगह आयकर विभाग के छापे पड़ गए. पूर्ति कंपनियों पर फर्जीवाड़े के आरोप लगे हैं जिनमें गडकरी के ड्राइवर तक निदेशक बनाए गए हैं. घपलेबाज़ी की बात सामने आ रही है."

नीना व्यास, राजनीतिक विश्लेषक

इस बीच मीडिया में खबरें हैं कि पूर्व पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह को दोबारा पार्टी की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है.

लेकिन सवाल ये है कि नितिन गडकरी के हाथ से पार्टी अध्यक्ष की गद्दी आखिर कैसे फिसल गई.

वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक नीना व्यास ने बीबीसी से बातचीत में कहा, ''नितिन गडकरी की कंपनियों पर मंगलवार सुबह कई जगह आयकर विभाग के छापे पड़ गए. पूर्ति कंपनियों पर फर्जीवाड़े के आरोप लगे हैं जिनमें गडकरी के ड्राइवर तक निदेशक बनाए गए हैं. घपलेबाज़ी की बात सामने आ रही है.''

वे कहती हैं, ''इसके बाद पार्टी में बहुत उथल-पुथल हुई और पार्टी में ही कई लोग शुरू से ही चाहते थे कि गडकरी को दोबारा अध्यक्ष नहीं बनाया जाए. जबकि मुंबई में बीते साल पार्टी की बैठक में संविधान तक बदला गया था ताकि गडकरी को दोबारा अध्यक्ष बनाया जा सके.''

संघ और खेमेबाजी़

राजनीतिक विश्लेषक नीना व्यास कहती हैं कि भारतीय जनता पार्टी और संघ में खेमेबाजी पहले से ही थी और इस घटनाक्रम से ये पहले से ज्यादा खुलकर सामने आ गई.

"इसे राजनाथ सिंह की किस्मत ही कह लीजिए क्योंकि सुषमा स्वराज, अरुण जेटली और वैंकेया नायडू ये एक दूसरे को अध्यक्ष बनता नहीं देखना चाहते."

नीना व्यास, राजनीतिक विश्लेषक

वे याद दिलाती हैं कि पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने बीते हफ्ते ही कह दिया था कि गडकरी की जगह सुषमा स्वराज को पार्टी अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए.

लेकिन राजनाथ सिंह का नाम कैसे बीच में आ गया, इस सवाल पर वे कहती हैं, ''इसे उनकी किस्मत ही कह लीजिए क्योंकि सुषमा स्वराज, अरुण जेटली और वैंकेया नायडू ये एक दूसरे को अध्यक्ष बनता नहीं देखना चाहते.''

इसके अलावा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी चाहता है कि ऐसा व्यक्ति की पार्टी अध्यक्ष बने जिसे उसका आशीर्वाद प्राप्त हो और इस लिहाज से राजनाथ सिंह का रिकॉर्ड अच्छा रहा है.

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