चौटाला घोटाले के टीचर को प्रोमोशन का इंतज़ार

 बुधवार, 23 जनवरी, 2013 को 11:31 IST तक के समाचार
टीचर

छात्र नहीं जानते कि वो शिक्षक जिन्हें चौटाला पिता-पुत्र को घूस दे कर नौकरी पर रखने का दोषी पाया गया है वो दरअसल उन्हीं के बीच मौजूद हैं. (बाएं सोनू शर्मा और दाएं अनूप सिंह)

हरियाणा के झज्जर ज़िले के लोहार हेड़ी गावं के स्कूल में सोनू शर्मा एक टीचर हैं.

31,000 रुपए की तनख्वाह पाने वाले शर्मा का जिक्र उन 3,206 शिक्षकों की फेहरिस्त में है, जिनकी भर्ती में घोटाले को लेकर हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला और उनके बेटे अजय 10 साल के लिए जेल भेज दिए गए हैं.

सोनू शर्मा का कहना है कि उन्होंने भर्ती के वक़्त कुछ भी गलत नहीं किया. उन्होंने कहा, ''मैं तो अपने प्रोमोशन का इंतजार कर रहा हूं, जो जांच के कारण फंस गया है.''

सोनू शर्मा ये भी बताते हैं कि वे दिल्ली पुलिस की नौकरी छोड़ कर हरियाणा सरकार में शिक्षक बने थे.

सोनू कहते हैं, ''मेरी तो दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल की भर्ती भी हो गई थी. लेकिन मुझे बच्चों को पढ़ाने का शौक था इसलिए यह चुना और उसे मना कर दिया.''

शर्मा ने कहा, ''12 साल और कुछ महीनों से जो ज़िम्मेदारी मुझे दी गई है उसे मैं बखूबी निभा रहा हूँ. मुझे तो हमारे खिलाफ मामले के बारे में कुछ साल पहले ही पता चला जब मेरे प्रोमोशन का मामला इस लिए रोका गया कि यह सीबीआई की जांच के बाद इस पर फैसला लिया जाएगा.''

वे कहते हैं, ''अब बताइए हमसे जूनियर टीचरों को प्रोमोशन हो गया है. हम वहीं के वहीं हैं जबकि मैंने एमए बीएड कर के योग्यता हासिल की है.''

'कोई भूमिका नहीं'

शर्मा के साथ इस स्कूल में पढ़ाने वाले अनूप सिंह भी इस सूची में शामिल हैं.

अनूप का दावा है, ''मैंने किसी को न तो पैसे दिए और न ही किसी ने मुझसे पैसे मांगे.''

लोहार हेड़ी के इस स्कूल के हेड टीचर धर्मवीर ने बताया, ''यहां छह कक्षाओं के लिए कुल चार शिक्षक हैं. लेकिन अगर दो ही रह गए तो समस्या और बढ़ जाएगी.''

"मेरी तो दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल की भर्ती भी हो गई थी. लेकिन मुझे बच्चों को पढ़ाने का शौक था इसलिए यह चुना और उसे मना कर दिया."

सोनू शर्मा

धर्मवीर बताते हैं कि यहां रोज़ की तरह पढ़ाई जारी है. लेकिन वो मानते हैं कि अध्यापकों में आपस में इस मामले पर चर्चा होती रहती है.

बच्चे नहीं जानते

ओम प्रकाश चौटाला और अजय चौटाला को सजा सुनाए जाने की खबर से राज्य का बच्चा-बच्चा वाकिफ है.

आठ-नौ साल के बच्चे भी जानते हैं कि टीचरों की भर्ती के मामले में इन दोनों को सजा सुनाई गई है.

लेकिन न तो यह बच्चे और न ही अधिकतर लोगों के मां बाप जानते हैं कि वो शिक्षक जिन्हें चौटाला पिता-पुत्र को घूस दे कर नौकरी पर रखने का दोषी पाया गया है वो दरअसल उन्हीं के बीच मौजूद हैं और आज भी अपने पदों पर कार्यरत रहते हुए इन बच्चों को शिक्षा देने का कार्य कर रहे हैं.

राज्य में लगभग 35,000 जेबीटी अध्यापक हैं जो प्राथिमक स्कूलों में कार्यरत हैं. इसका मतलब कि हर 10 से 11 शिक्षक में से एक अध्यापक इस फैसले से प्रभावित हो सकता है.

स्कूल के बच्चों से बात की तो यह देख कर हैरानी हुई कि लगभग सभी बच्चों ने चौटाला के मामले के बारे में सुन रखा था.

अभिभावक नहीं खुश

स्कूल

वो स्कूल जहां छह कक्षाओं के लिए कुल चार शिक्षक हैं. इनमें से दो इस सूची में हैं

आसपास के कई घरों में कोई भी स्कूल से स्तर से खुश नहीं दिखा.

अपने चार बच्चों को यहां पढ़ाने वाले एक व्यक्ति ने बताया, ''मेरी मजबूरी है कि यहां बच्चों को पढ़ाता हूँ. यहां कोई फीस नहीं लगती जबकि प्राइवेट स्कूल बहुत महंगे हैं. लेकिन यहां पढ़ाई नाम की कोई चीज़ नहीं है.''

इन्हें भी भर्ती के मामले की जानकारी है लेकिन इन शिक्षकों के कथित तौर पर संलिप्त होने की नहीं. लेकिन उनका कहना है, ''जो भी गलत तरीके से आया है उसे तो बाहर जाना ही चाहिए.''

कुछ ऐसा ही कहना है पास में रहने वाली एक महिला का जिनकी बेटी इस स्कूल में पढ़ती रही है. ''जो लोग नौकरी के लायक हैं उन्हें तो नौकरी मिलती नहीं. शायद इसलिए शिक्षा का स्तर इतना खराब है.''

मंगलवार को राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री चौटाला और उनके बेटे तथा तत्कालीन सांसद अजय चौटाला को इन जेबीटी टीचरों के चयन के घपले में दोषी पाते हुए दस साल की सज़ा सुनाई गई थी.

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