'जज ने सीना छुआ और सलवार उतारने को कहा...'

 गुरुवार, 24 जनवरी, 2013 को 20:59 IST तक के समाचार

यूपी के न्यायाधीश पर दो युवतियों का गंभीर आरोप

गोंडा ज़िले में दो लड़कियों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि एक जज ने अपने चैंबर में उनके साथ छेड़छाड़ की.

पुलिस का कहना है कि मामले की जानकारी जिला जज और हाई कोर्ट को दे दी गई है और अगली कार्यवाही के लिए उनके निर्देश का इंतज़ार किया जा रहा है.

इस बीच गोंडा के वकीलों ने जज के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया है.

पीड़ित लड़कियों में से एक की उम्र तेरह साल है, और दूसरी की इक्कीस साल. दोनों अलग-अलग परिवारों से हैं और दोनों के साथ यह घटना एक ही दिन पर अलग समय पर हुई.

'कपड़े उतारने को कहा'

दोनों लडकियां अपने घर से गायब हो गई थीं और उनके परिवार वालों ने अपहरण का मुकदमा लिखाया था.

इन्हीं मुकदमों में बयान दर्ज कराने के लिए दोनों लड़कियों को अदालत बुलाया गया था.

लड़कियों का आरोप है कि जज उनका कलम बंद बयान दर्ज करने के लिए उन्हें अपने चैंबर में ले गए और कुंडी बंद कर दी.

" जिला जज को तथ्यों की जानकारी दे दी गयी है. अब उनके ऊपर है कि क्या करते हैं."

नवनीत राणा, पुलिस अधीक्षक, गोंडा

एक लड़की का आरोप है कि जज ने उससे शॉल हटाकर कपड़े उतारने को कहा, जिससे वह उसकी उम्र का पता लगा सके.

लड़की ने अपने बयान में कहा है कि इसके बाद जज ने उसका सीना छुआ और सलवार उतारने को कहा. इस पर लड़की रोने लगी और कहा कि यह सब मुझसे नही होगा.

लिखित शिकायत

दूसरी लड़की ने भी इसी तरह का बयान दिया है. उसका कहना है कि जज ने कपड़े न उतारने पर गलत बयान लिखने की धमकी भी दी.

दोनों लड़कियों ने गोंडा में पत्रकारों को आपबीती सुनाई. लड़कियों के परिवार वालों ने पुलिस को भी लिखित शिकायत दे दी है.

पुलिस अधीक्षक नवनीत राणा ने फोन पर बताया कि, "जिला जज को तथ्यों की जानकारी दे दी गई है. अब उनके ऊपर है कि क्या करते हैं.”

जिला जज की ओर से पुलिस को बताया गया है कि मामले की जांच की जा रही है.

कानून के जानकारों का कहना है कि पुलिस को मुकदमा दर्ज करके कानूनी कार्यवाही करनी चाहिए.

लेकिन मामला न्यायपालिका से जुड़ा होने के कारण पुलिस जोखिम नही लेना चाहती.

अतिरिक्त पुलिस महा निदेशक अरुण कुमार का कहना है कि चूँकि यह शिकायत जज के अपनी अदालत के कार्य से सम्बन्धित है. इसलिए पुलिस ने मुकदमा सीधे मुकदमा दर्ज करने के बजाय जिला जज के अलावा हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भी शिकायत भेज दी है.

पता चला है कि गृह विभाग ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के कार्यालय को भी पूरी जानकारी भेज दी है और उनके रुख का इन्तजार किया जा रहा है.

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