मैं अपने बयान पर कायम हूं: आशीष नंदी

 सोमवार, 28 जनवरी, 2013 को 15:34 IST तक के समाचार

आशीष नंदी अपने जटिल तर्कों के लिए जाने जाते हैं.

जाने माने समाजशास्त्री आशीष नंदी के पिछड़ों और दलितों के बारे में दिए गए बयान के बाद उनके ख़िलाफ मामला दर्ज हुआ है और अब जयपुर से लौट गए हैं लेकिन यह विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है.

हालांकि आशीष नंदी ने अपने बयान पर बात साफ की है लेकिन अभी भी कई हलकों में उनके विरोध के स्वर साफ सुनाई पड़ रहे हैं.

अनुसूचित जाति और जनजाति आयोग के प्रमुख पीएल पुनिया ने कहा है कि आशीष नंदी को गिरफ्तार किया जाना चाहिए.

टीवी चैनल सीएनएन आईबीएन से बातचीत में पुनिया ने कहा, '' आशीष नंदी के बयान को समझा गया है. उन्होंने गलत बात कही है वो अपराधी हैं. मुझे आश्चर्य है कि राजस्थान सरकार ने क्यों कार्रवाई नहीं की. उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए.''

इस बीच आशीष नंदी ने इसी चैनल के साथ बातचीत में कहा कि उन्होंने दलितों और आदिवासियों के हित की बात की है और आजीवन उनके लिए काम किया है.

अपने कथित विवादास्पद बयान के बारे में भी उन्होंने एक बार फिर स्पष्ट किया कि ''भ्रष्टाचार के मामले में अधिक अनुसूचित जाति और जनजाति के लोग अधिक लोग लिप्त मिल रहे हैं उससे ये ही समझ में आता है कि वो भ्रष्टाचार में भी बाकी लोगों से बराबरी कर रहे हैं. और इसके साथ ही ये भी ध्यान रखना चाहिए कि ऊंची जाति के लोगों के पास अपने भ्रष्टाचार को छुपाने के रास्ते बढ़ गए हैं.''

आशीष नंदी

"मैं 75 का हूं और अपने तरीके नहीं बदल सकता इसलिए मैं उन लोगों से माफी चाहूंगा जिन्हें मेरे विचारों के बारे में टीवी से पता चला जिसमें एक बयान दिखाया गया होगा पूरा परिप्रेक्ष्य नहीं था. मैं आगे से शायद असहिष्णु समाज पर नहीं बोल सकूंगा"

यह पूछे जाने पर कि उनके बयान को अलग से देखे जाने पर क्या ये विवादास्पद नहीं लगता तो नंदी का कहना था, '' मैं किसी संसद में नहीं बोल रहा था. मैं किसी अदालत में नहीं बोल रहा था. मैं एक पब्लिक फोरम पर बोल रहा था. पूरी बात को देखना चाहिए. मैंने जो बात कही है वो पहले भी और लोग कह चुके हैं. शेखर गुप्ता यही बात कह चुके हैं..कई लोग ये बात कह चुके हैं.''

आशीष नंदी ने कहा कि उन्होंने जो बात कही है उस पर कायम हैं लेकिन उन लोगों से माफी चाहेंगे जिन्हें इस बात से दुख हुआ है.

यह पूछे जाने पर कि क्या आने वाले दिनों में वो अपनी राय बदलेंगे या कुछ कहते समय ध्यान रखेंगे तो उन्होंने कहा, ''मैं यही कह सकता हूं कि मैं अब शायद उन लोगों के सामने अपनी बात नहीं रख सकूंगा जो असहिष्णु समाज है. मैंने चीन में भी इसी तरह की बातें कही हैं ये जानते हुए कि लोग इसका बुरा मान लेंगे. मैं 75 का हूं और अपने तरीके नहीं बदल सकता इसलिए मैं उन लोगों से माफी चाहूंगा जिन्हें मेरे विचारों के बारे में टीवी से पता चला जिसमें एक बयान दिखाया गया होगा पूरा परिप्रेक्ष्य नहीं था. मैं आगे से शायद असहिष्णु समाज पर नहीं बोल सकूंगा. ''

उधर दलित विचार कांचा इलिया ने कहा है कि आशीष नंदी का बयान गलत भले ही हो लेकिन उनकी मंशा सही है और वो लगातार दलितों के लिए काम करते रहे हैं.

जयपुर में ही कांचा इलिया ने एक बयान देते हुए कहा कि आशीष नंदी ने आरक्षण का समर्थन किया है और वो लगातार दलितों का समर्थन करते रहे हैं इसलिए मैं अपने भाई बहनों से अपील करुंगा कि वो नंदी के खिलाफ विरोध बंद करें.

आखिर हुआ क्या था

जयपुर महोत्सव में एक चर्चा के दौरान जिसमें नंदी, आईबीएन7 चैनल के संपादक आशुतोष, रिचर्ड शोराबजी और जाने माने पत्रकार तरुण तेजपाल थे.

तेजपाल के इस वक्तव्य पर कि भ्रष्टाचार सभी को एक जगह लाकर खड़ा कर देता है, नंदी ने कहा कि वो इसका समर्थन करते हैं.

योगेंद्र यादव

"आशीष नंदी को लोग समझ नहीं रहे हैं और लोग वर्तमान मीडिया संस्कृति में फंस गए हैं जहां एक जटिल तर्क को एक सीधा बयान बना कर पेश कर दिया जाता है."

नंदी ने आगे कहा कि भारत में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार के मामले अनुसूचित जाति, जनजाति और ओबीसी वर्ग के आते हैं.

उनका कहना था, ‘‘यह कहना बहुत अशोभनीय और घिनौना होगा लेकिन तय़् यही है कि सबसे अधिक भ्रष्ट लोगों में ओबीसी, अनुसूचित जाति या जनजाति के लोगों की संख्या बढ़ रही है. जब तक ये होगा तब तक मुझे अपने गणतंत्र से उम्मीद है.’’

इससे पहले कि वो आगे और विवरण देते आईबीएन7 के संपादक ने इसका कड़ा विरोध किया और फिर दर्शकों ने भी.

इस घटना के बाद क्लिक करें फर्स्ट पोस्ट को दिए इंटरव्यू में नंदी ने अपने बयान को और स्पष्ट करते हुए कहा कि उनके कहने का पूरा मतलब ये था कि दलितों और ओबीसी लोगों की तुलना में ऊंची जाति के लोगों के पास अपने भ्रष्टाचार को छुपाने के कई उपाय होते हैं और इसलिए वो पकड़े नहीं जाते हैं.

हालांकि इस स्पष्टीकरण के बावजूद कुछ संगठनों ने नंदी के ख़िलाफ विरोध प्रदर्शन किया और उनके ख़िलाफ मामला दर्ज किया गया है.

अब जाने माने समाजशास्त्री योगेंद्र यादव ने अख़बार क्लिक करें इंडियन एक्सप्रेस में एक लेख लिख कर कहा है कि आशीष नंदी को लोग समझ नहीं रहे हैं और लोग वर्तमान मीडिया संस्कृति में फंस गए हैं जहां एक जटिल तर्क को एक सीधा बयान बना कर पेश कर दिया जाता है.

योगेंद्र यादव आगे लिखते हैं कि नंदी के तर्क विडंबना से भरे होते हैं और वो इन तर्कों को नहीं मानते लेकिन इसके आधार पर नंदी को जातिवादी करार देना बिल्कुल अनुचित है और दुख की बात ये है कि दलित और पिछड़े लोगों के नेता भी ये नहीं समझ पाते हैं कि कौन उनके हित की बात करता है और कौन उनके अहित की.

योगेंद्र यादव की बात कई हद तक सही लगती है. अगर सोशल मीडिया की टिप्पणियों को देखा जाए तो कई लोगों ने नंदी के जटिल तर्कों को समझने की बजाय मीडिया में आए एक बयान के आधार पर टिप्पणियां की है और कई मामलों में भाषा अभद्र तक हो गई है.

आशीष नंदी के ख़िलाफ पुलिस केस कोई नई बात नहीं है. उनके खिलाफ इससे पहले भी कई मामले दर्ज हुए हैं और उन्हें धर्म विरोधी तक करार दिया गया है.

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