बहस का न्यौता मिले तो देखेंगे: रुश्दी

  • 30 जनवरी 2013
सलमान रुश्दी
Image caption अब तक मुसलमान सलमान रुश्दी का बहिष्कार करते रहे हैं

सलमान रुश्दी को लेकर मुस्लिम संगठनों में दुनिया भर में नाराजगी देखने को मिलती है. लेकिन पहली बार भारत के कुछ मुस्लिम विद्धानों ने उन्हें इस्लाम पर बहस के लिए निमंत्रित किया है.

इस निमंत्रण को लेकर सलमान रुश्दी भी संजीदा हैं.

उन्होंने इस निमंत्रण पर कहा है, "मैं ने भी आपकी तरह ही अख़बारों में ये ख़बर पढ़ी है, मुझे बहस के लिए कोई निमंत्रण नहीं मिला है. अख़बारों में छपी ख़बर पर टिप्पणी करना मुश्किल है. लेकिन देखते हैं पहले उनके पास से निमंत्रण तो मिले."

इस्लाम पर बहस करने के लिए जिन मुस्लिम विद्धानों ने रुश्दी को आमंत्रित किया है, वे ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रभावी सदस्य हैं. इनमें वरिष्ठ वकील यूसुफ मुचाला और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में कानून के प्रोफेसर डॉ. शकील सामदानी शामिल हैं.

सलमान रुश्दी को अगर आधिकारिक तौर पर निमंत्रण मिलता है तो वे इस बहस में शामिल होने पर विचार कर सकते हैं. वे कहते हैं, "वैसे बहस के हमेशा दो पहलू होते हैं. तो हम देखते हैं."

अभिनय का इरादा

वैसे विवादों से घिरे रहने वाले लेखक सलमान रुश्दी कहते हैं कि उनके भीतर एक अभिनेता भी छिपा है. वो कहते हैं कि अगर किसी ने उन्हें एक उम्दा रोल दिया तो वो एक्टिंग करने पर विचार करेंगे.

सलमान रुश्दी ने अपनी किताब ‘मिडनाइट्स चिल्ड्रन’ पर आधारित दीपा मेहता की फिल्म 'मिडनाइट्स चिल्ड्रन' का स्क्रीन प्ले खुद ही लिखा है. ये फिल्म भारत में शुक्रवार को रिलीज़ हो रही है.

अपने पुराने शहर मुंबई में बीबीसी से हुई ख़ास बातचीत में उन्होंने कहा कि अब वो अभिनय के लिए भी तैयार हैं.

वो कहते हैं, "मैं जब कम्ब्रिज में था, तो मैंने थोड़ी बहुत एक्टिंग की थी. मैं अब अगर कुछ करना चाहूँगा तो एक्टिंग. कोई अच्छा रोल मिले तो क्यों नहीं."

मुंबई में पले बढ़े सलमान रुश्दी अपने उपन्यास 'मिडनाइट्सस चिल्ड्रन' से प्रसिद्ध हुए और विवादास्पद ‘सैटेनिक वर्सेज’ के बाद दुनिया भर में सुर्खियों में आ गए.

अपने बयानों से भी वे अक्सर विवादों में रहे हैं.

मुंबई से प्रेम

लेखक बनने से पहले रुश्दी मुंबई की विज्ञापन एजेंसियों में कॉपी राइटर के तौर पर काम किया करते थे.

सलमान रुश्दी ने एक दो फिल्मों में अभिनय भी किया है. 'ब्रिजेट जोंज़ डायरी' नाम की फिल्म में उन्होंने एक छोटा सा रोल किया था. इसके अलावा 'देन शी फाउंड मी' फिल्म में भी उन्होंने अभिनय किया था.

सलमान रुश्दी को मुंबई से अब भी काफी लगाव है. और वो इस शहर की प्रशंसा करते थकते नहीं.

वो कहते हैं, “मुंबई में मेरा बचपन गुज़रा है. बॉम्बे अब दस गुना ज्यादा बड़ा हो गया है और भीड़ भी अधिक हो गई है. बॉम्बे अब मुंबई हो गया है. लेकिन अब भी यहां के लोग दिलचस्प हैं जो कई राज्यों से आकर यहां आबाद हैं.”

वो एक दिन लंबे समय के लिए मुंबई वापस आकर रहना चाहते हैं ताकि वो एक और किताब लिख सकें.

वो कहते हैं, "मैं बदलते भारत पर मिडनाइट्स चिल्ड्रन जैसी एक और किताब लिखना चाहूँगा जिसके लिए मुझे एक लंबे अरसे के लिए भारत आकर रहना पड़ेगा. मालूम नहीं कब लेकिन ये संभव है कि मैं यहां लम्बे समय के लिए आकर रहूँ."

'जनता से कटे राजनेता'

सलमान रुश्दी के विचार में भारत में नेता आम जनता से कटे हैं. वो कहते हैं, “भारत के नेता एक बबल (अपनी दुनिया) में रहते हैं.”

Image caption रुश्दी के उपन्यास पर दीपा मेहता ने फिल्म बनाई है

हाल में दिल्ली में एक चलती बस में एक युवती के साथ हुए बलात्कार के बाद जनाक्रोश पर टिप्पणी करते हुए सलमान रुश्दी ने कहा कि जिस तरह से सरकार और पुलिस ने बलात्कार के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले प्रदर्शनकारियों के साथ सुलूक किया वो सही नहीं था.

उन्होंने कहा, “केवल राहुल गांधी की आलोचना करना सहीं नहीं बल्कि पूरा सरकारी नेतृत्व जनता के क्रोध को समझने में नाकाम रहा है.”

'सैटेनिक वर्सेज' जैसे विविदास्पाद उपन्यास के लेखक भारत में महिलाओं पर बढ़ते अत्याचार से काफी चिंतित हैं.

उन्होंने कहा, “बलात्कार के कांड गावों और शहरों में लगभग हर दिन हो रहे हैं. लेकिन भारतवासियों को महत्वपूर्ण प्रश्न ये पूछना चाहिए कि पुरुष भारतीय महिलाओं के साथ कैसा बर्ताव करते हैं और खुद महिलाएं महिलाओं के प्रति कैसा सुलूक करती हैं. महिलाएं अपने बच्चों की परवरिश किस तरह से करती हैं इस पर भी ध्यान देने की ज़रूरत है.”

सलमान रूश्दी इन दिनों भारत के दौरे पर हैं और मुंबई में अपने उपन्यास मिडनाइट्स चिल्ड्रेन पर आधारित दीपा मेहता की एक फिल्म को प्रोमोट करने में जुटे हैं.

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